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सपा MLC आशुतोष सिन्हा की जीत से गदगद हुए बसपा नेता अतुल राय, लिखी लंबी-चौड़ी पोस्ट, क्या करेंगे पार्टी ज्वाइन?

Atul Rai Social Media Post: पूर्वांचल की राजनीति में इन दिनों बसपा नेता और घोसी के पूर्व सांसद अतुल राय की एक सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा में है. इस पोस्ट में उन्होंने समाजवादी पार्टी के एमएलसी आशुतोष सिन्हा को दूसरी बार विधान परिषद सदस्य चुने जाने पर बधाई दी है.

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Atul Rai Social Media Post
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Atul Rai Social Media Post: पूर्वांचल की राजनीति में इन दिनों बसपा नेता और घोसी के पूर्व सांसद अतुल राय की एक सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा में है. इस पोस्ट में उन्होंने समाजवादी पार्टी के एमएलसी आशुतोष सिन्हा को दूसरी बार विधान परिषद सदस्य चुने जाने पर बधाई दी है. अतुल राय ने आशुतोष सिन्हा को अपना बचपन का दोस्त बताते हुए कॉलेज के दिनों की यादें साझा की हैं. 

उन्होंने बताया कि दोनों कभी 15-15 रुपये मिलाकर एक लीटर पेट्रोल भरवाते थे और आशुतोष की सिल्वर स्प्लेंडर से कॉलेज जाया करते थे. छात्रसंघ चुनाव के दौरान अतुल राय ने आशुतोष के लिए प्रचार भी किया था और रातभर पोस्टर चिपकाए थे. अब इस पोस्ट और दोनों की तस्वीर को पूर्वांचल की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है. 

हालांकि अतुल राय ने इसे केवल अपने पुराने दोस्त को दी गई बधाई बताया है. उन्होंने साफ किया है कि वह अभी भी बसपा में ही हैं. इतनी ही वहीं वह यूपी तक से बातचीत में यह भी जाहिर कर चुके हैं कि वह 2027 के विधानसभा चुनाव में अपनी पत्नी या भाई के लिए बसपा से टिकट चाहते हैं. फिलहाल उनकी समाजवादी पार्टी में जाने की कोई बात सामने नहीं आई है.

अतुल राय ने दोस्त को दी बधाई

आशुतोष सिन्हा के दूसरी बार विधान परिषद सदस्य चुने जाने के बाद अतुल राय ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखी है. इसमें उन्होंने आशुतोष को अपना बाल सखा बताया और कॉलेज के दिनों की कई यादें साझा की हैं.

अतुल राय ने लिखा कि उन्हें आज भी वह समय याद है, जब पेट्रोल 30 रुपये लीटर मिलता था. दोनों दोस्त 15-15 रुपये मिलाकर एक लीटर पेट्रोल भरवाते थे. इसके बाद आशुतोष की सिल्वर स्प्लेंडर बाइक से कॉलेज जाते थे. बाइक का नंबर यूपी 70 V3 315 था.

अतुल राय ने बताया कि कॉलेज के दिनों में दोनों छात्रसंघ चुनाव में अपने प्रत्याशियों के लिए प्रचार करते थे. एक दिन आशुतोष सिन्हा ने उनसे कहा कि वह छात्रसंघ चुनाव में उपाध्यक्ष पद पर लड़ना चाहते हैं. आशुतोष स्वभाव से अंतर्मुखी थे, इसलिए वह अपनी बात सीधे अपने सीनियर से नहीं कह पा रहे थे.

इसके बाद अतुल राय ने अपने साथियों के सामने यह बात रखी और सभी की सहमति जुटाई. उन्होंने बताया कि आशुतोष के लिए उन्होंने रातभर पोस्टर चिपकाए थे. अब दूसरी बार विधान परिषद चुनाव जीतने पर उन्हें अपने दोस्त पर गर्व है.

क्या तस्वीर के पीछे कोई खास राजनीति है?

अतुल राय की पोस्ट और आशुतोष सिन्हा के साथ उनकी तस्वीर सामने आने के बाद इसे पूर्वांचल की राजनीति से जोड़कर देखा जाने लगा है. इसकी वजह यह भी है कि दोनों नेता अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े हैं. अतुल राय बसपा में हैं, जबकि आशुतोष सिन्हा समाजवादी पार्टी के एमएलसी हैं.

हालांकि इस तस्वीर को लेकर किसी राजनीतिक बदलाव का संकेत नहीं मिला है. अतुल राय ने अपने सहयोगी विनय सिंह से फोन पर बातचीत में साफ किया है कि यह केवल एक औपचारिक बधाई पोस्ट थी. आशुतोष उनके पुराने दोस्त हैं और उनकी जीत से उन्हें खुशी हुई है, इसलिए उन्होंने पोस्ट लिखी है.

अतुल राय ने यह भी स्पष्ट किया है कि विधान परिषद चुनाव में बसपा की ओर से कोई उम्मीदवार नहीं था. उन्होंने न तो किसी को वोट दिया और न ही किसी को वोट दिलाने के लिए कोई कोशिश की थी.

बसपा से ही टिकट चाहते हैं अतुल राय

अतुल राय 2027 के विधानसभा चुनाव में अपनी पत्नी या भाई को चुनाव लड़ाने की तैयारी में हैं. यूपी तक के पॉडकास्ट में उनसे पूछा गया था कि क्या वह अपनी पत्नी को चुनाव मैदान में उतारने की कोशिश कर रहे हैं?

इस पर अतुल राय ने कहा था कि अगर बहन जी यानी मायावती का आदेश होगा, तो वह अपनी पत्नी या भाई में से किसी को भी चुनाव लड़ा सकते हैं. उन्होंने बीजेपी में जाने की अटकलों को भी खारिज किया था. अतुल राय ने कहा था कि बीजेपी की ओर से उनसे कोई संपर्क नहीं किया गया है और न ही उनकी ऐसी कोई बातचीत हुई है.

इससे साफ है कि फिलहाल अतुल राय बसपा में ही बने हुए हैं और पार्टी से टिकट मिलने की उम्मीद कर रहे हैं. बता दें वह मऊ की घोसी लोकसभा सीट से बसपा के सांसद भी रह चुके हैं.

मोहम्मदाबाद सीट पर अलग समीकरण

पूर्वांचल की मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी का अंसारी परिवार चुनाव लड़ता रहा है. ऐसे में अतुल राय के सपा में जाने की चर्चा के साथ इस सीट के राजनीतिक समीकरणों को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं.

हालांकि अतुल राय ने फिलहाल बसपा छोड़ने का कोई संकेत नहीं दिया है. वह बसपा से ही अपनी राजनीतिक दावेदारी कर रहे हैं. ऐसे में आशुतोष सिन्हा को दी गई उनकी बधाई को अभी सिर्फ दो पुराने दोस्तों के रिश्ते के तौर पर ही देखा जा रहा है.

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