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प्रो. संगीत रागी को सपा नेता मनोज काका ने किया माफ, बोले- यह बहुजन समाज का अपमान था

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टीवी डिबेट में यादव समाज पर की गई विवादित टिप्पणी को लेकर सपा नेता मनोज काका ने अपनी बात रखी है. उन्होंने बताया कि प्रोफेसर संगीत रागी ने उनसे व्यक्तिगत तौर पर माफी मांग ली है और उन्होंने इसे स्वीकार भी कर लिया है.

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समाजवादी पार्टी के नेता मनोज काका ने हाल ही में टीवी डिबेट के दौरान हुए विवाद और जातिवाद के मुद्दे पर अपनी बात खुलकर रखी है. उन्होंने बताया कि एक टीवी डिबेट में यादव जाति को लेकर विवादित टिप्पणी की गई थी, जिसके बाद उनके कार्यालय में तोड़फोड़ हुई और सोशल मीडिया पर भारी नाराजगी देखने को मिली. इस विवाद के बाद प्रोफेसर संगीत रागी ने उनसे माफी मांग ली थी. मनोज काका ने साफ किया कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से तो माफी स्वीकार कर ली है, लेकिन समाज में फैली नफरत और मनुवादी सोच को वह कभी माफ नहीं कर सकते. उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह टिप्पणी केवल उनका नहीं, बल्कि पूरे बहुजन समाज का अपमान था.

डिबेट में हुआ था अपमान

मनोज काका ने बताया कि एक टीवी डिबेट के दौरान उनकी जाति (यादव) के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक बातें कही गई थीं. इस घटना के बाद समाज के लोगों में काफी गुस्सा देखने को मिला. उनके कार्यालय पर तोड़फोड़ की गई और सोशल मीडिया पर भी लोगों ने कड़ा विरोध जताया. हालांकि, बाद में विवादित टिप्पणी करने वाले प्रोफेसर संगीत रागी ने अपनी गलती मानते हुए उनसे व्यक्तिगत तौर पर माफी मांग ली थी.

नफरत वाली सोच से लड़ाई

इस पूरे विवाद पर मनोज काका ने कहा कि उन्होंने प्रोफेसर को निजी तौर पर माफ कर दिया है. लेकिन वह उस मनुवादी और नफरत भरी मानसिकता को कभी नहीं भूलेंगे, जो हमेशा से आदरणीय नेताओं और समाज का अपमान करती आई है. उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि समाज में भेदभाव और असहिष्णुता बढ़ती जा रही है, जिसका सामना बहुजन समाज के लोगों को करना पड़ता है. उन्होंने इस अपमानजनक भाषा को पूरे समाज का अपमान माना है.

बहुजन समाज के समान अधिकार

मनोज काका ने कहा कि उन्हें अपने समाज पर बहुत गर्व है और इसे और मजबूत होकर आगे बढ़ना चाहिए. उन्होंने साझा किया कि वह हरियाणा के एक सैनिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं और उन्हें अपने देश व समुदाय दोनों पर गर्व है. उनका मानना है कि देश का असली विकास तभी हो सकता है, जब हर वर्ग को आगे बढ़ने का बराबर मौका मिले. उन्होंने जोर देकर कहा कि जातिवाद और नफरत के खिलाफ इस लड़ाई में सबको अपनी भाषा और व्यवहार संयमित रखना चाहिए.

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