रामचरितमानस पर विवाद के बीच अब स्वामी मौर्य बोले- पंडित-पुजारी विरोध कर रहे, उनके धंधे...

सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य.
सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य. फोटो: @SwamiPMaurya/ ट्विटर

हाल ही में रामचरितमानस पर दिए गए अपने बयानों के कारण विवादों से घिरे सपा नेता और MLC स्वामी प्रसाद मौर्य बुधवार को रायबरेली पहुंचे. यहां उन्होंने कहा कि वह अपने बयान पर कायम हैं.

रामचरितमानस पर दिए गए अपने बयान को लेकर स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपने विरोधियों पर जमकर हमला किया और कहा कि केवल एक ही जाति के लोग विरोध कर रहे हैं. पंडित-पुजारी बिरादरी के लोग ही विरोध कर रहे हैं, जिनके धंधे पर खतरा मंडरा रहा है.

उन्होंने आगे कहा कि पंडित-पुजारी बिरादरी के लोगों को आभास हो गया है कि मौर्य जी के आवाहन पर सभी आदिवासी दलित-पिछड़े और महिलाएं मंदिर में जाना बंद कर देंगे तो चढ़ावा बंद हो जाएगा. उनकी पेट पूजा बंद हो जाएगी. उनका धंधा ठप हो जाएगा, इसलिए वह पागलों की तरह भौंक रहे हैं.

स्वामी मौर्य ने कहा कि हम किसी भी जाति, किसी भी धर्म और किसी भी आराध्य पर कोई टिप्पणी नहीं करते हैं, बल्कि धर्म के नाम पर दलितों-पिछड़ों-आदिवासियों महिलाओं के ऊपर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी का विरोध करता हूं और करता रहूंगा.

उन्होंने आगे कहा कि मैं अपनी बात पर कायम हूं, मैं सैकड़ों बार सार्वजनिक मंचों से इस बात पर हमला कर चुका हूं. आज भी कर रहा हूं, आगे भी करता रहूंगा.

गौरतलब है कि सपा के विधान परिषद सदस्य स्वामी प्रसाद मौर्य ने बीते रविवार को बयान देते हुए रामचरितमानस पर सवार खड़े किए थे. उन्होंने कहा था, ''रामचरितमानस की कुछ पंक्तियों में जाति, वर्ण और वर्ग के आधार पर यदि समाज के किसी वर्ग का अपमान हुआ है तो वह निश्चित रूप से धर्म नहीं है. यह 'अधर्म' है.''

मौर्य ने आगे कहा था कि रामचरित मानस की कुछ पंक्तियों में तेली और 'कुम्हार' जैसी जातियों के नामों का उल्लेख है जो इन जातियों के लाखों लोगों की भावनाओं को आहत करती हैं.

मौर्य ने मांग की कि पुस्तक के ऐसे हिस्से, जो किसी की जाति या ऐसे किसी चिह्न के आधार पर किसी का अपमान करते हैं, पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए.

वहीं, स्वामी प्रसाद मौर्य ने स्वामी प्रसाद मौर्य ने रविवार को यूपीतक से बातचीत करते हुए कहा था कि कोई भी हो, हम उसका सम्मान करते हैं. लेकिन धर्म के नाम पर जाति विशेष, वर्ग विशेष को अपमानित करने का काम किया गया है, हम उस पर आपत्ति दर्ज कराते हैं. रामचरितमानस में एक चौपाई लिखी है, जिसमें तुलसीदास शूद्रों को अधम जाति का होने का सर्टिफिकेट दे रहे हैं.

उन्होंने कहा था कि ब्राह्मण भले ही दुराचारी, अनपढ़ और गंवार हो, लेकिन वह ब्राह्मण है तो उसे पूजनीय बताया गया है, लेकिन शूद्र कितना भी ज्ञानी, विद्वान हो, उसका सम्मान मत करिए. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यही धर्म है? अगर यही धर्म है तो ऐसे धर्म को मैं नमस्कार करता हूं. ऐसे धर्म का सत्यानाश हो, जो हमारा सत्यानाश चाहता हो.

प्रदेश की पूर्ववर्ती भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्य पिछले साल हुए राज्य विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा छोड़कर सपा में शामिल हो गए थे. मौर्य ने कुशीनगर जिले की फाजिलनगर सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए थे. हालांकि बाद में सपा ने उन्हें विधान परिषद का सदस्य बना दिया था.

सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य.
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