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Opinion: यूपी में प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का उत्सव, योगी सरकार के 35 करोड़ पौधों के महाअभियान ने हरित विकास की नई मिसाल पेश की

Opinion : भारतीय चिंतन-परंपरा में कहा जाता है- ‘वृक्षो रक्षति रक्षत:’. अर्थात यदि हम वृक्ष की रक्षा करते हैं तो वे हमारी रक्षा करते हैं. प्रकृति और मनुष्य के बीच इससे सार्थक संदेश शायद ही कुछ हो सकता है कि तुम वृक्ष बचाओगे तो वे तुम्हें बचाएंगे. यही शाश्वत सत्य भी है और इसी सूत्र ने सभ्यता के आरंभ से ही मनुष्य और प्रकृति के बीच अटूट संबंध प्रतिपादित किया है.

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UP Tree Plantation Campaign
UP Tree Plantation Campaign (Photo:AI)
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Opinion : भारतीय चिंतन-परंपरा में कहा जाता है- ‘वृक्षो रक्षति रक्षत:’. अर्थात यदि हम वृक्ष की रक्षा करते हैं तो वे हमारी रक्षा करते हैं. प्रकृति और मनुष्य के बीच इससे सार्थक संदेश शायद ही कुछ हो सकता है कि तुम वृक्ष बचाओगे तो वे तुम्हें बचाएंगे. यही शाश्वत सत्य भी है और इसी सूत्र ने सभ्यता के आरंभ से ही मनुष्य और प्रकृति के बीच अटूट संबंध प्रतिपादित किया है. जंगलों ने हमे छाय़ा दी, नदियों ने सभ्यता का विकास किया और वृक्षों की जड़ों में हमें जीवन के मूल तत्व मिले. परंतु आधुनिक विकास की दौड़ ने हमें इतना अंधा कर दिया कि हम यह भूलते गए कि हमें जीवन देने वाली प्रकृति के प्रति भी हमारा कोई दायित्व है. ऐसे समय में जब जलवायु परिवर्तन वैश्विक चुनौती बनकर खड़ा है, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने एक ऐसा उदाहरण पूरे देश के समक्ष रखा है जो प्रशासनिक दक्षता की अद्भुत मिसाल के साथ ही प्रकृति के प्रति कृतज्ञता की अद्भुत अभिव्यक्ति भी है. उत्तर प्रदेश ने गत 12 जुलाई को एक ही दिन में 35 करोड़ से अधिक पौधों के रोपण का रिकार्ड बनाया है. यह न सिर्फ विस्मयकारी है, बल्कि इसके पीछे योगी सरकार की तैयारी, समन्वय और विराट संकल्प भी दिखाई देता है. नेतृत्व की स्पष्ट दृष्टि और दृढ़ता भी सामने आती है. ऐसा होने पर ही असंभव लक्ष्यों को साकार किया जा सकता है. गहराई से देखने पर इस पूरे अभियान की आत्मा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पर्यावरणीय सोच दिखाई देती है. वह हमेशा से मानते रहे हैं कि विकास और पर्यावरण-संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं और उनका यही दृष्टिकोण उत्तर प्रदेश की वन नीति का आधार बना जिसने प्रशासनिक क्षमता, दूरदर्शी सोच और जनसहभागिता के अद्भुत संगम से पौधरोपण की यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की. पौधरोपण को सीएम योगी ने महायज्ञ की संज्ञा दी है. भारतीय परंपरा में इसके भी निहितार्थ हैं. यज्ञ का अर्थ है त्याग, समर्पण और सामूहिक कल्याण के लिए किया गया संकल्पबद्ध कर्म. जब हम कोई पौधा रोपते हैं तो अपने लिए किसी प्रतिफल की आकांक्षा नहीं करते, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए छाया, शुद्ध हवा और जल-संरक्षण में निवेश करते हैं. हमारी सनातन संस्कृति में वृक्ष देवतुल्य हैं, नदियां मां हैं, पर्वत पूज्य हैं तो इसलिए कि हमारे मनीषियों में प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की एक गहरी वैज्ञानिक और आध्यात्मिक समझ थी. बीते नौ सालों में यूपी सरकार ने करोड़ों पौधे रोपकर इस सह अस्तित्व को संजीवनी देने के साथ ही उस सांसस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने का काम किया है, जिसमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञता जीवन-दर्शन का केंद्रीय तत्व था.