Opinion: ‘कौशल प्रदेश’ में बदलता उत्तर प्रदेश, जानें कैसे बदली योगी मॉडल ने युवाओं की किस्मत और राज्य की तस्वीर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राज्य के युवाओं को इस काबिल बनाना चाहते हैं कि वे उद्योगों की रीढ़ बन सकें. 'कौशल प्रदेश' की अवधारणा इसी सोच का नतीजा है. पढ़िए इस टॉपिक पर प्रो. संजय सिंह बघेल का पूरा लेख.
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Opinion: किसी भी राज्य की वास्तविक पूंजी किसे माना जा सकता है-प्राकृतिक संसाधनों को, इन्फ्रास्ट्रक्चर को, या फिर उद्योगों को ? इस सवाल के जवाब अलग-अलग हो सकते हैं लेकिन राज्य की वास्तविक संपदा उसका कुशल मानव संसाधन है और यही उसे समृद्धि के मार्ग पर भी ले जाता है. भूमि, खनिज, पूंजी और आधुनिक तकनीक विकास के आवश्यक घटक हैं लेकिन इन सभी को उत्पादक शक्ति में बदलने का कार्य प्रशिक्षित, दक्ष और नवाचार में विश्वास रखने वाला मानव संसाधन ही करता है. कुशल मानव संसाधन ही सामाजिक परिवर्तन का भी सबसे प्रभावी माध्यम है. यह उत्पादकता बढ़ाता है, युवाओं के पलायन को रोककर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाता है. उत्तर प्रदेश ने पिछले नौ वर्षों में ‘स्किल इंडिया’ के राष्ट्रीय संकल्प को धरातल पर उतारते हुए स्वयं को ‘कौशल प्रदेश’ में गढ़ा है तो यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उस सोच का ही प्रतिफल है, जो युवा शक्ति को विकास की सबसे महत्वपूर्ण इकाई के रूप में देखती है.
