Opinion: योगी राज में महापुरुषों की विरासत का पुनर्जागरण, भूली पहचान को मिल रहा सम्मान और संरक्षण
उत्तर सरकार प्रदेश में क्षेत्रीय वीरों और वीरांगनाओं की स्मृतियों को सम्मान देने के लिए स्मारकों, संस्थानों के नामकरण और महिला बटालियनों जैसी पहल कर रही है. लेखक ने इस लेख में महाराजा सुहेलदेव, निषादराज, ऊदा देवी पासी और महाराजा बिजली पासी समेत कई ऐतिहासिक विरासत को सार्वजनिक पहचान से जोड़ने की प्रक्रिया को रेखांकित किया है.
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Opinion: किसी समाज की सबसे बड़ी पूंजी उसकी स्मृति होती है. स्मृति जब सार्वजनिक सम्मान से कटती है, तो नायक लोककथाओं में सिमट जाते हैं और नई पीढ़ी उन्हें इतिहास नहीं, किस्सा मानने लगती है. उत्तर प्रदेश में लंबे समय तक यही हुआ. अनेक क्षेत्रीय वीर और वीरांगनाएं श्रद्धा में जीवित रहीं, पर राजकीय पहचान, संस्थानों और पाठ्य चर्चा में उनकी जगह सीमित रही. योगी आदित्यनाथ सरकार का कार्यकाल इस अर्थ में एक सांस्कृतिक मोड़ है कि उसने भूली-बिसरी विरासत को फिर राज्य की भाषा बनाया. यह केवल उत्सव नहीं, पहचान का पुनरुद्धार है.

