Opinion: चुनाव आते ही समाजवादी नेताओं की बढ़ती है गुंडागर्दी! फिर दिखा सपा के अराजकता का पुराना मॉडल
Opinion: इस लेख में लेखक ने संत कबीर नगर और रायबरेली की हालिया घटनाओं के साथ-साथ 2011 में मुरादाबाद में पुलिस अधिकारियों (तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह) पर हुए जानलेवा हमले का उदाहरण देकर सपा पर दंगाइयों को संरक्षण देने का दावा किया है.
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Akhilesh Yadav
Opinion: अभी गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर संत कबीरनगर के सपा सांसद ने सड़क पर अपनी गाड़ी फंसाकर निषाद समाज की आस्था को आहत किया. वह तैश में अभद्र तरीके से बोले- “कहां धर्म-कर्म के चक्कर में पड़े हो”. इससे निषाद समाज भड़क गया, जिसका बदला उत्तर प्रदेश का निषाद समाज समाजवादी पार्टी को अगले चुनाव में पटकनी देकर लेगा. इसी तरह रायबरेली में एक सपा नेता पुलिस अधिकारियों से भिड़ गया और ‘औक़ात में रहने’, ‘चूड़ियां पहन लो’ जैसी भाषा का इस्तेमाल किया. पुलिस ने समझदारी से काम किया अन्यथा ये सपाई तो मारपीट पर उतारू थे. इसके बाद यही लोग “विक्टिम कार्ड” खेलकर पुलिस के ख़िलाफ़ धरना देने लगे.

