Opinion: अखिलेश के गुस्से की हुई डिकोडिंग! कैसे उनका ‘टेंपर’ परिवार, सहयोगी और पत्रकारों को करता रहा असहज
उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव लगातार प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए बीजेपी पर निशाना साध रहे हैं. उनकी पीसी में एक पैटर्न भी लगातार देखा गया है कि जब कोई पत्रकार उनसे ऐसा सवाल पूछता है और सवाल उनके मनमुताबिक नहीं होता, तो अखिलेश यादव भड़क जाते हैं.
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अखिलेश यादव
Opinion: उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव लगातार प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए बीजेपी पर निशाना साध रहे हैं, लेकिन उनकी पीसी में एक पैटर्न लगातार देखा गया है कि जब कोई पत्रकार उनसे ऐसा सवाल पूछता है जो उनके मनमुताबिक नहीं होता, तो अखिलेश यादव भड़क जाते हैं. पत्रकार को अपमानित करने लगते हैं, उसे बीजेपी का एजेंट बताने लगते हैं. कभी वह पत्रकार की जाति पूछकर उस पर हमलावर होते हैं तो कभी उसे बाहर करने की धमकी तक दे डालते हैं. यहीं से अखिलेश के व्यवहार में विरोधाभास दिखाई देता है. एक तरफ वह लोकतंत्र की बात करते हैं और पत्रकारों की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाते हैं, दूसरी तरफ खुद ऐसे सवालों पर भड़क जाते हैं जो उनके हिसाब या उनके राजनीतिक फायदे के मुताबिक नहीं होते.

