मौनी अमावस्या पर विवाद के बाद माघ मेले को बीच में छोड़ निकले थे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, काशी पहुंच दिया पहला रिएक्शन
Shankaracharya Avimukteshwarananda Reaction: माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रशासन के बीच 11 दिनों से जारी विवाद के बाद शंकराचार्य बिना स्नान किए काशी लौट गए हैं. अब इस पूरे प्रकरण के बाद शंकराचार्य का पहला रिएक्शन सामने आया है. उन्होंने कहा कि जो हुआ ठीक नहीं हुआ और इसका परिणाम भी ठीक नहीं होगा.
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Shankaracharya Avimukteshwarananda Reaction: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला प्रशासन के बीच मौनी अमावस्या के दिन स्नान को लेकर शुरू हुआ विवाद 11 दिनों तक धरने में तब्दील रहा. लेकिन कोई समाधान ना निकलने पर शंकराचार्य ने भारी मन से संगम की रेती को छोड़ दिया. इसके बाद सियासी प्रतिक्रियाएं भी इस मामले पर आनी शुरु हो गईं. सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव का शंकराचार्य के वापस जाने को लेकर कहना था कि जगद्गुरु शंकराचार्य का बिना पवित्र स्नान किये छोड़कर जाना एक अनिष्टकारी घटना है. अब इस पूरे प्रकरण के बाद शंकराचार्य का पहला रिएक्शन सामने आया है.
'जो हुआ ठीक नहीं हुआ और इसका परिणाम भी ठीक नहीं होगा'
मीडिया से बात करते हुए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि 'जैसे लाखों आहुतियों के बाद एक पूर्णाहुति होती है वैसे ही माना जाता था कि शंकराचार्य के नहा लेने के बाद समस्त सनातन धर्मियों का स्नान पूरा हो गया. वह इस यज्ञ की पूर्णाहुति का नारियल था जो इस बार नहीं हो पाया. जो हुआ ठीक नहीं हुआ है और इसका परिणाम भी ठीक नहीं होगा.'
मेले से लौटने के पीछे की वजह बताते हुए शंकराचार्य ने भाजपा सरकार पर सीधा निशाना साधा. उन्होंने कहा कि 'भाजपा की केंद्र और राज्य सरकारें गो-हत्या बंद नहीं करना चाहतीं. मैं इस मांग को प्रमुखता से उठा रहा हूं. इसलिए मेरी आवाज दबाने की कोशिश की गई. 11 दिनों तक मौका देने के बाद भी अपनी गलती न सुधारना यह दर्शाता है कि सत्ता का मद विवेक पर भारी है.'
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डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को लेकर कही ये बात
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने शंकराचार्य से हठ त्यागने की अपील की थी. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि 'डिप्टी सीएम ने कहा कि भेजा जाएगा तब आएंगे,इसका मतलब उनका स्वयं का कोई विवेक नहीं है. एक विवेकशील व्यक्ति स्वयं निर्णय लेता है कि यह समय महत्वपूर्ण है और उसे जाना चाहिए. वे इस अवसर को चूक गए.'
क्या था पूरा विवाद?
बता दें कि मौनी अमावस्या के अवसर पर शंकराचार्य और प्रशासन के बीच संगम में वीवीआईपी तरीके से ससम्मान स्नान कराने को लेकर बहस हुई था.प्रशासन के रवैये से नाराज शंकराचार्य वहीं धरने पर बैठ गए थे. उनका साफ कहना था कि जब तक प्रशासन अपनी भूल स्वीकार कर उन्हें ससम्मान संगम नहीं ले जाता वह नहीं हटेंगे. 11 दिनों के इंतजार के बाद प्रशासन के न झुकने पर उन्होंने बिना स्नान किए वापस लौटने का ऐलान कर दिया.
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