श्रृंगार गौरी विवाद: सर्वे के दौरान आपत्ति कर मुस्लिम पक्ष गया था कोर्ट, वहां क्या हुआ?

श्रृंगार गौरी विवाद: सर्वे के दौरान आपत्ति कर मुस्लिम पक्ष गया था कोर्ट, वहां क्या हुआ?
फोटो: रोशन जायसवाल

वाराणसी के श्रृंगार गौरी विवाद में प्रतिवादी अंजुमन इंतजामियां मसाजिद कमेटी की ओर से कोर्ट कमिश्नर बदले जाने के लिए अदालत में दिए गए प्रार्थना पत्र पर सुनवाई अब 9 जून 2022 को नियत की गई है. बता दें कि कोर्ट ने शनिवार को हो रही कमीशन की कार्रवाई पर किसी तरह का आदेश नहीं दिया है. इसका मतलब साफ है कि कोर्ट कमिश्नर शनिवार को भी सर्वे और वीडियोग्राफी की कार्रवाई जारी रखेंगे.

दरअसल, प्रतिवादी अंजुमन इंतजामियां मसाजिद कमेटी की तरफ से कोर्ट कमिश्नर को हटाने की मांग वाला प्रार्थना पत्र सिविल जज (सीनियर डिविजन) के कोर्ट में पेश किया गया था. बता दें कि कमेटी ने सर्वे और वीडियोग्राफी की कार्रवाई में कोर्ट कमिश्नर के ऊपर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगा था.

प्रार्थना पत्र में मांग की गई है थी कि 'कोर्ट एडवोकेट कमिश्नर को हटाकर, न्यायालय खुद या उनकी जगह किसी दूसरे वरिष्ठ वकील को मामले के निष्पादन के लिए नियुक्त करे, ताकि न्याय हो सके.'

मुस्लिम पक्ष के वकील ने क्या कहा?

आपको बता दें कि शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष के वकील अभय नाथ यादव ने वीडियोग्राफी सर्वे के लिए नियुक्त कोर्ट कमिश्नर की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए उन्हें बदलवाने के लिए शनिवार को अदालत में प्रार्थना पत्र देने की बात कही थी. वहीं, अदालत में शिकायत कर भी दी गई है.

उन्होंने सर्वे के दायरे में ली जाने वाली इमारतों को कुरेद-कुरेद कर दिखाए जाने का आरोप लगाते हुए कहा की अदालत ने खोदने या कुरेदने का कोई आदेश नहीं दिया था और वह आज (शुक्रवार) हुई कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं.

मुस्लिम पक्ष के वकील ने कहा था,

"आयोग की कार्यवाही अपराह्न चार बजे शुरू हुई और मस्जिद के पश्चिम की तरफ जो चबूतरा है उसकी वीडियोग्राफी कराई गई, उसके बाद कमिश्नर ने ज्ञानवापी मस्जिद का प्रवेश द्वार खुलवा कर अंदर जाने का प्रयास किया, जिस पर मैंने विरोध दर्ज कराया और कहा कि अदालत ने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया है कि मस्जिद के अंदर जाकर उसकी वीडियोग्राफी की जाए. लेकिन कोर्ट कमिश्नर ने दावा किया कि उन्हें ताला खुलवा कर उसकी वीडियोग्राफी कराने का आदेश मिला है, मगर सच्चाई यह है कि ऐसा कोई आदेश नहीं है, लिहाजा मैं कोर्ट कमिश्नर की निष्पक्षता पर सीधे प्रश्न चिह्न खड़ा करता हूं."

अभय नाथ यादव

क्या है मामला?

गौरतलब है कि विश्व वैदिक सनातन संघ के पदाधिकारी जितेन्द्र सिंह विसेन के नेतृत्व में राखी सिंह तथा अन्य ने अगस्त 2021 में अदालत में एक वाद दायर कर श्रंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन और अन्य देवी-देवताओं के विग्रहों की सुरक्षा की मांग की थी. सिविल जज (जूनियर डिवीजन) रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद गत 26 अप्रैल को अजय कुमार मिश्रा को एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त कर ज्ञानवापी परिसर का वीडियोग्राफी-सर्वे करके 10 मई को अपनी रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था. मिश्रा ने वीडियोग्राफी और सर्वे के लिये छह मई का दिन तय किया था.

(भाषा के इनपुट्स के साथ)

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