नॉर्वे के पूर्व राजनयिक ने वाराणसी के मंदिर और पीसा की मीनार के बीच की तुलना, कहा ये सब

नॉर्वे के पूर्व राजनयिक ने वाराणसी के मंदिर और पीसा की मीनार के बीच की तुलना, कहा ये सब
फोटो: @ErikSolheim/ ट्विटर

उत्तर प्रदेश का वाराणसी शहर अपने धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए दुनिया भर में मशहूर है. यहां के गंगा घाट पर दर्शन करने के लिए पहुंचने वाले लोगों का हर वक्त हुजूम लगा रहता है. कहने को तो वाराणसी में कई मंदिर हैं, जिनका अपना महत्व है, लेकिन यहां का रत्नेश्वर मंदिर जैसा कोई और मंदिर नहीं है. जो भी इस मंदिर को देखता है, चकित रह जाता है. इसी कड़ी में नॉर्वे के पूर्व राजनयिक एरिक सोलहेम ने भी इस मंदिर की तारीफ में कसीदे पढ़े हैं. एरिक सोलहेम ने शनिवार को ट्विटर पर रतनेश्वर मंदिर की एक तस्वीर शेयर की. बता दें कि अपने ट्वीट में एरिक सोलहेम ने रत्नेश्वर मंदिर और दुनिया के सात अजूबों में से एक इटली के पीसा की झुकी हुई मीनार के बीच की तुलना की है.

नॉर्वे के पूर्व राजनयिक ने ट्वीट कर कहा,

"पीसा मीनार केवल 4° झुकी हुई है, लेकिन वाराणसी के इस मंदिर को रत्नेश्वर मंदिर कहा जाता है. यह 9° झुक जाता है. अतुल्य भारत 🇮🇳."

एरिक सोलहेम

दरअसल, महादेव को समर्पित ऐतिहासिक रत्नेश्वर मंदिर सदियों पुराना है और यह तिरछा खड़ा हुआ है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंदिर की ऊंचाई 74 मीटर है, जो पीसा से 20 मीटर ज्यादा है. ऐसा कहा जाता है कि मंदिर का निर्माण 19वीं शताब्दी के बीच में हुआ था.

कुछ लोगों का यह भी मानना है कि यह एक शापित मंदिर है और पूजा अर्चना करने से उनके घर में कुछ बुरा हो सकता है.

जानिए पीसा की झुकी हुई मीनार के बारे में-

आपको बता दें कि पीसा की झुकी हुई मीनार का निर्माण 1173 में शुरू हुआ था. इस मीनार का निर्माण पूरा होने में करीब दो शताब्दियां लग गईं थीं. ऐसा माना जाता है कि पीसा की मीनार का झुकना तभी से शुरु हो गया था जबसे इसकी नींव रखी गई.

बलुआ मिट्टी पर खड़ी इस मीनार में अगले करीब 800 सालों तक झुकाव बढ़ता ही गया. कई आर्किटेक्ट्स और इंजीनियरों ने इसे और झुकने से रोकने की कोशिशें कीं, जो आज भी जारी हैं. मगर आज तक इसका कोई स्थाई उपाय नहीं मिल पाया है.

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