खफा हुए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को दोबारा स्नान कराने की तैयारी में जुटा प्रशासन? सामने आई अब ये 3 मांगों वाली जानकारी
Shankaracharya Swami Avimuktheswaranand: प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच तनाव चरम पर है. मौनी अमावस्या पर हुई कथित मारपीट का मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है, जहां अधिवक्ता गौरव द्विवेदी ने लेटर पिटीशन दाखिल कर दोषी अफसरों के सस्पेंशन और CBI जांच की मांग की है.
ADVERTISEMENT

Shankaracharya Swami Avimuktheswaranand: प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच बढ़ा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है. सूत्रों के अनुसार प्रशासन अब बीच का रास्ता निकालने और शंकराचार्य को ससम्मान दोबारा स्नान कराने की जुगत में लगा है.हालांकि प्रशासनिक अधिकारी इन चर्चाओं को सिरे से खारिज कर रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि उनकी तरफ से दोबारा स्नान कराने या संपर्क करने की कोई कोशिश नहीं की गई है.ऐसे में अब ये मामला सुलझने की बजाय और उलझता हुआ नजर आ रहा है.
शंकराचार्य की तीन बड़ी शर्तें
एक तरफ जहां खबर सामने आ रही है कि प्रशासन अविमुक्तेश्वरानंद को दोबारा स्नान के लिए मनाने की कोशिश कर रहा है. तो वहीं दूसरी ओर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों के साथ हुई कथित बदसलूकी का मामला अब कोर्ट तक पहुंच गया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक लेटर पिटीशन दाखिल कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गुहार लगाई गई है. इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक अधिवक्ता गौरव द्विवेदी द्वारा दायर इस याचिका में प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं. याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस और प्रशासन ने आस्था के साथ खिलवाड़ किया और संतों के साथ हिंसक व्यवहार किया जो मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है.ऐसे में अब सबकी नजरें हाईकोर्ट के रुख पर टिकी हैं कि क्या न्यायालय इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ कड़ा फैसला सुनाता है.
अधिकारियों को सस्पेंड करने की उठी मांग
- याचिका में मांग की गई है कि 18 जनवरी को बटुकों के साथ मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए और संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को सस्पेंड किया जाए.
यह भी पढ़ें...
- पूरे घटनाक्रम की निष्पक्षता से जांच कराने के लिए मामले को सीबीआई (CBI) को सौंपने की अपील की गई है.
- वहीं तीसरा ये कि चारों शंकराचार्यों के स्नान के लिए एक स्थायी प्रोटोकॉल (SOP) बनाया जाए ताकि आने वाले समय में ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न हो.










