हाईकोर्ट: वाद मित्र ने बताया मंदिर का इतिहास, बोले- श्रृंगार गौरी मां पार्वती का रूप हैं

हाईकोर्ट: वाद मित्र ने बताया मंदिर का इतिहास, बोले- श्रृंगार गौरी मां पार्वती का रूप हैं
इलाहाबाद हाई कोर्टफोटो: पंकज श्रीवास्तव

वाराणसी में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद विवाद पर शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. हाईकोर्ट में लगभग आधा घंटा सुनवाई चली. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आदि विश्वेश्वर नाथ मंदिर व मस्जिद के पुरातत्व विभाग से सर्वेक्षण कराने के वाराणसी जिला कोर्ट के आदेश पर लगी रोक 31 जुलाई तक बढ़ा दी है.

अहम बिंदु

ध्यान देने वाली बात है कि वाराणसी की अदालत में 31 साल पहले 1991 में दाखिल मुकदमे की सुनवाई हो सकती है या नहीं, हाईकोर्ट का मुख्य रूप से यही तय करना है. इसी मामले पर दोनों पक्ष अपनी दलीलें दे रहे हैं. इसके साथ ही एएसआई से खुदाई कराकर सर्वेक्षण कराए जाने समेत कई अन्य मुद्दों पर भी बहस होनी है.

कोर्ट ने कहा है कि याचिकाओं की सुनवाई बहस पूरी होने तक जारी रहेगी. याचिका की अगली सुनवाई ग्रीष्म अवकाश के बाद छह जुलाई को होगी. यह आदेश जस्टिस प्रकाश पाडिया की सिंगल बेंच ने अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमिटी वाराणसी और यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर दाखिल याचिकाओं की सुनवाई करते हुए दिया है.

अहम बिंदु

याचिका पर मंदिर पक्ष की ओर से वाद मित्र अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी ने पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि उप्र काशी विश्वनाथ मंदिर एक्ट 1983 की वैधता को चुनौती दी गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने कानून को वैध करार दिया है. इस अधिनियम की धारा 4(9)में मंदिर की व्याख्या की गई है. जिसमें साफ कहा गया है कि आदि विश्वेश्वर मंदिर जो काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी के नाम से जाना जाता है.

ज्योतिर्लिंग की हिंदू पूजा अर्चना करते हैं. पूजा का अधिकार व संपत्ति काशी विश्वनाथ में निहित है. यह भी कहा गया है कि भगवान विश्वेश्वर नाथ मंदिर में स्थित लिंग स्वयंभू है. इस ज्योतिर्लिंग का लंबा धार्मिक इतिहास है, जो कि पुराणों में वर्णित है. वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि वाराणसी में गंगा नदी के किनारे शिव विराजमान हैं, जो भारत में स्थित पांच ज्योतिर्लिंगों में से एक है. जिन्हें स्वयंभू माना जाता है. इस मामले में बहस जारी है.

समय की कमी के कारण बहस पूरी नहीं हो सकी है. विजय शंकर रस्तोगी ने विश्वेशर मंदिर का 15 वीं शताब्दी का एक नक्शा भी दिखाया है. उनका दावा है कि इसी नक्शे के आधार पर काशी विश्वेश्वर नाथ का मंदिर बना हुआ था. इस नक्शे को डॉ ए.एस. आल्टेकर ने बनाया था, जो प्राचीन इतिहास और संस्कृति विभाग के विभागाध्यक्ष थे. उन्होंने 1937 में हिस्ट्री आफ बनारस किताब लिखी थी. उस किताब में इस नक्शे को प्रस्तुत किया था.

इसी प्रकार से अंग्रेजों के समय में तत्कालीन डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट मिस्टर जेम्स प्रिन्सेप हुआ करते थे. उन्होंने भारत नक्शा बनाया है. दोनों नक्शे आपस में मिलते जुलते हैं. उन्होंने दावा किया है कि ज्ञानवापी में हुए सर्वे में वजूखाने में जो शिवलिंग मिला है वह तारकेश्वर महादेव का शिवलिंग हो सकता है.

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उन्होंने दावा किया कि इस नक्शे को देखकर यह स्पष्ट है कि वहां पर मंदिर ही हुआ करता था. विजय शंकर रस्तोगी ने मंदिर से जुड़ी कई जनकारियां भी साझा की. विजय रस्तोगी ने बताया कि श्रृंगार गौरी मां पार्वती का स्वरूप हैं.

यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के सीनियर एडवोकेट पुनीत गुप्ता के मुताबिक कोर्ट 6 जुलाई को अगली सुनवाई करेगा. उसके बाद लगातार सुनवाई करते हुए मामले में बहस कोर्ट पूरी करेगा.

इलाहाबाद हाई कोर्ट
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