रायबरेली: गांव का ये सरकारी स्कूल प्राइवेट वालों के काटता है कान, एक शख्स ने बदली तस्वीर

रायबरेली: गांव का ये सरकारी स्कूल प्राइवेट वालों के काटता है कान, एक शख्स ने बदली तस्वीर
फोटो - शैलेन्द्र प्रताप सिंह

अमूमन सरकारी स्कूलों के बारे में लोगों की यही धारणा होती है कि वहां वहां बहुत कम बच्चे पढ़ने जाते होंगे और पढ़ाई का स्तर भी अच्छा नहीं होगा. लेकिन रायबरेली में एक सरकारी स्कूल ऐसा भी है जहां पर प्राइवेट स्कूलों से ज्यादा छात्र यहां पढ़ने आते हैं और यहां के बच्चे किसी से कम नहीं हैं. अपनी मेहनत से एक रिटायर्ड आर्मी अफसर ने इस स्कूल में 120 की संख्या को 567 बच्चों में बदल डाला. यही नहीं लोगों की धारणा इस तरह बदल दी कि अगल-बगल के प्राइवेट स्कूलों में ताले बंद हो गए .

अहम बिंदु

रायबरेली शहर से 40 किलोमीटर दूर गदागंज ब्लाक के विद्यालय अंबारा मतई सबसे अलग है. यहां के शिक्षकों ने सरकारी स्कूलों के प्रति लोगों की धारणा बदल दी है. विद्यालय में साफ-सफाई से लेकर खेल-खेल में पढ़ाई बच्चों को काबिल बना रही है.

इस विद्यालय में स्मार्ट क्लास, आनलाइन क्लास की सुविधा देखकर लगता है कि यह विद्यालय किसी कान्वेंट स्कूल से कम नहीं है. यह विद्यालय सैनिक स्कूल की तरह ही संचालित हो रहा है. बता दें कि गांव अंबर मतई में पूर्व में अव्यवस्था के चलते अभिभावकों का मोह भी सरकारी विद्यालयों के प्रति कम होता चला गया. विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या काफी कम हो गई थी, लेकिन समय बदलने के साथ शिक्षा का स्तर सुधरा अब करीब 6 साल बाद स्कूल की में बच्चों की संख्या 567 की है. प्रधानाध्यापक समेत कुल 12 शिक्षक और एक शिक्षामित्र यहां पढ़ाते हैं. 500 से ज्यादा बच्चों के लिए खाने के लिए 7 रसोइयों की व्यवस्था भी है. अब कान्वेंट स्कूल छोड़कर अमीरों के बच्चों ने भी यहां दाखिल लेना शुरू कर दिया है.

बता दें कि इस विद्यालय में शिक्षक अनुराग मिश्र की तैनाती वर्ष 2016 में हुई, उस दौरान विद्यालय में छात्रों की संख्या लगभग 126 ही थी. उन्होंने बच्चों को स्कूल लाने का प्रयास तेज किया. शुरुआत में परेशानी हुई, लेकिन बाद में बच्चे स्कूल पहुंचने लगे. वर्तमान मे यहां 567 बच्चे पंजीकृत हैं. उन्होंने शैक्षिक कार्य के साथ विद्यालय के कायाकल्प पर भी विशेष ध्यान दिया.

अनुराग मिश्रा ने बताया कि मैंने 2012 तक सेना में कार्य किया है उसके बाद मैं शिक्षक बना और विद्यालय के सभी बच्चों को एक सैनिक स्कूल की तरह ही शिक्षा प्रदान की जा रही है. विद्यालय कॉन्वेंट विद्यालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध है. विद्यालय परिसर में सुरक्षा की दृष्टि से सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं झूलों से लेकर खेलकूद के सामान तक की व्यवस्था की. इतना ही नहीं टीवी लगाकर स्मार्ट क्लास से बच्चों की पढ़ाई शुरू कराई. स्कूल में ब्लैक बोर्ड की जगह व्हाइट बोर्ड पर मार्कर से पढ़ाई हो रही है. कोरोना काल में बच्चों को आनलाइन पढ़ाई कराई गई. खेल खेल में शिक्षा, पैरेंट्स मीटिंग भी होती है विद्यालय में बच्चों को स्कूल में टाइमटेबल बनाकर शिक्षक पढ़ाई करा रहे हैं.

बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा, 30 दिन बाद बच्चों के मानसिक लेवल की जांच करते हुए, उसमें पिछड़े बच्चों को उपचारात्मक शिक्षा दी जाती है. पैरेंट्स मीटिंग भी की जाती है. निजी विद्यालय छोड़कर आ रहे बच्चे विद्यालय में पढ़ाई के स्तर बेहतर होते ही अब कान्वेंट स्कूलों को छोड़कर बच्चे यहां पढ़ाई करने आ रहे हैं. इनमें समृद्ध किसान, व्यापारियों के बच्चे भी शामिल हैं.

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