बिजनौर विधानसभा सीट पर बीजेपी-सपा में सीधी टक्कर, 2027 में जाट और मुस्लिम वोटर्स किसका देगा साथ?
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Bijnor Assembly Seat: बिजनौर विधानसभा सीट पर 2027 के चुनाव में बीजेपी और सपा के बीच मुकाबला दिलचस्प हो सकता है. जाट-मुस्लिम वोटरों के साथ दलित और पिछड़े वर्ग के मतदाता भी अहम होंगे, जबकि जयंत चौधरी की आरएलडी के साथ गठबंधन और गन्ना भुगतान जैसे स्थानीय मुद्दे चुनावी समीकरण बदल सकते हैं.
Bijnor Assembly Seat: उत्तर प्रदेश की बिजनौर विधानसभा सीट जिला मुख्यालय की सीट है. यहाँ शहर और गांव दोनों की मिली-जुली आबादी रहती है. पिछले कुछ चुनावों में यहाँ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच बेहद कांटे की टक्कर देखने को मिली है. साल 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की सूचि चौधरी ने महज 1,445 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी. वहीं, 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा ने यहाँ से थोड़ी बढ़त बना ली थी. इस वजह से 2027 का आगामी विधानसभा चुनाव बहुत ही रोचक होने वाला है.
मुस्लिम और जाट वोटर हैं निर्णायक
इस विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम और जाट वोटर सबसे ज्यादा असरदार हैं. यहाँ करीब एक लाख मुस्लिम और 70 हजार जाट वोटर हैं, जो हार-जीत तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं. इनके अलावा दलित और अन्य पिछड़े वर्ग के वोटर भी चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने की ताकत रखते हैं. पिछले चुनावों में मुस्लिम वोटरों का झुकाव सपा की तरफ ज्यादा रहा है, लेकिन 2027 के चुनाव में उनका रुख इस बात पर निर्भर करेगा कि पार्टियां किसे अपना उम्मीदवार बनाती हैं.
जयंत के आने से बदलेंगे समीकरण
साल 2022 के चुनाव में बीजेपी और राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) दोनों ने ही जाट उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था. इस वजह से जाट वोटों का बंटवारा हो गया था. लेकिन अब जयंत चौधरी की आरएलडी बीजेपी के साथ है. इससे आगामी चुनाव में जाट वोटरों की रणनीति पर सीधा असर पड़ेगा. इसके साथ ही इस क्षेत्र में किसानों के स्थानीय मुद्दे, खासकर गन्ने के भुगतान की समस्या, चुनाव में एक बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
चंद वोटों से तय होगा परिणाम
मुस्लिम वोटों के बंटवारे का फायदा उठाकर बीजेपी की सूचि चौधरी यहाँ से विधायक बनी थीं. स्थानीय पत्रकारों का मानना है कि इस सीट के चुनावी समीकरणों को समझना बहुत जरूरी है. यहाँ कुछ हजार वोटों का मामूली अंतर ही पूरा परिणाम बदल सकता है. जाट, मुस्लिम और दलित वोटरों के गठजोड़ से ही 2027 के चुनाव का असली नतीजा तय होगा. फिलहाल किसी भी पार्टी ने अपने उम्मीदवार घोषित नहीं किए हैं, इसलिए तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन हर दल के लिए यह सीट एक बड़ी चुनौती बनी हुई है.
