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1000 साल उम्र, 5 वर्ष के बालक जैसे दिखेंगे रामलला… अनोखा है अयोध्या में बन रहा राम मंदिर

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अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कार्य जोर शोर से चल रहा है. आगामी 22 जनवरी को राम लला की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी. मंदिर परिसर में…

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Ayodhya Ram Mandir News: अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कार्य जोर शोर से चल रहा है. आगामी 22 जनवरी को राम लला की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी. मंदिर परिसर में चारों वेदों की सभी शाखाओं का पारायण और यज्ञ लगातार चल रहा है. इस बीच राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कई अहम जानकारियां साझा की हैं. उन्होंने बताया कि मंदिर का ग्राउंड फ्लोर तैयार हो चुका है और फर्स्ट फ्लोर पर निर्माण कार्य चल रहा है.

उन्होंने बताया, “मई, 2022 से इस मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हुआ. राजस्थान के बंसी पहाड़पुर का गुलाबी सैंडस्टोन है. फ्लोर का मकराना मार्बल है और गर्भगृह में श्वेत मार्बल है. मंदिर के नीचे खोखला नहीं है. मंदिर और परकोटा दोनों की आयु एक हजार साल है. इसके निर्माण में 22 लाख क्यूबिक पत्थर का प्रयोग होगा. 70 में से 20 एकड़ में निर्माण चल रहा है. बाकी में हरियाली होगी.”

रामलला की मूर्ति को लेकर चंपत राय ने बताया, “5 वर्ष के बालक की ड्रॉइंग तैयार की गई. ललाट तक ऊंचाई 51 इंच होनी है. देवत्व और बाल सुलभता जिस प्रतिमा में होगी, उसे चुना जाएगा. कर्नाटक के पत्थर से दो मंदिर बन रहे हैं. एक मकराना से बन रहा है.” उन्होंने बताया कि दक्षिणी भुजा पर हनुमान जी होंगे, जबकि पूर्वी दिशा में प्रवेश द्वार होगा, जिसमें दिव्यांग जनों के लिए खास व्यवस्था होगी.

श्रद्धालुओं के लिए हैं ये सब व्यवस्था

चंपत राय के अनुसार, “तीर्थ यात्रियों के लिए खास व्यवस्था की गई है. एक साथ पच्चीस हजार यात्रियों का सामान रखने के लिए लॉकर बनाए जाएंगे. इसके अलावा, पानी, शौचालय, चिकित्सालय की व्यवस्था होगी.”

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राम मंदिर परिसर होगा हरा भरा

राम मंदिर परिसर का अधिकांश हिस्सा सैकड़ों पेड़ों के साथ हरा-भरा क्षेत्र होगा और खुद के सीवेज तथा जल शोधन संयंत्र, एक दमकल चौकी एवं विशिष्ट बिजली लाइन जैसी सुविधाओं के साथ आत्मनिर्भर होगा.

राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने मंगलवार को यहां संवाददाताओं को बताया कि 70 एकड़ परिसर का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा हरित क्षेत्र होगा. उन्होंने कहा, “हरित क्षेत्र में ऐसे हिस्से शामिल हैं, जो बहुत घने हैं और इसके कुछ हिस्सों में सूरज की रोशनी भी मुश्किल से ही नीचे पहुंच पाती है.” हरित क्षेत्र में लगभग 600 मौजूदा पेड़ संरक्षित किए गए हैं.

चंपत राय ने आगे बताया कि मुख्य मंदिर तक पहुंचने के लिए पर्यटक पूर्वी दिशा से 32 सीढ़ियां चढ़ेंगे. राय ने कहा कि पारंपरिक नागर शैली में निर्मित मंदिर परिसर 380 फुट लंबा (पूर्व-पश्चिम दिशा), 250 फुट चौड़ा और 161 फुट ऊंचा होगा. उन्होंने बताया कि मंदिर की प्रत्येक मंजिल 20 फुट ऊंची होगी और इसमें कुल 392 खंभे और 44 द्वार होंगे.

वहीं, अयोध्या के कुबेर टीला पर जटायु की मूर्ति स्थापित की गई है. राय ने कहा, “कुबेर टीला पर मौजूद एक प्राचीन शिव मंदिर का भी पुनरुद्धार किया गया है.”

 

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