बहराइच में BJP नेता विजय सिंह को मारने उनके फार्म हाउस तक पहुंच गए थे सुपारी किलर, मंदिर में दीपक जलाने की टाइमिंग से बची जान!
उत्तर प्रदेश के बहराइच में पुलिस और STF ने मुठभेड़ के बाद बीजेपी नेता विजय सिंह की हत्या की बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया. सुपारी किलर्स पूरी रेकी कर चुके थे, लेकिन मंदिर में दीप जलाने की बदली टाइमिंग ने नेता की जान बचा ली.
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Bahraich News: बहराइच में पुलिस ने कुछ बदमाशों के साथ मुठभेड़ के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नेता विजय सिंह की हत्या की प्लानिंग को नाकाम कर दिया है. बदमाशों ने विजय सिंह को मारने का फुल फ्रूप प्लान बना लिया था. पूरी रेकी हो रखी थी कि बीजेपी नेता को कहां घेरकर मारना है. लेकिन हैरतअंगेज बात ये है कि मंदिर में दिए जलाने की टाइमिंग ने विजय सिंह की जान बचा ली. पुलिस ने इस मामले में एक और हैरान कर देने वाला खुलासा किया है. विजय सिंह की हत्या करने की इस पूरी साजिश का सूत्रधार उनके बड़े भाई का दामाद निकला है. आइए आपको सिलसिलेवार इस पूरे मामले की जानकारी देते हैं.
आपको बता दें कि बहराइच में अपने फार्म हाउस पर बने मंदिर में दीपक जलाने की बदली टाइमिंग के चलते बीजेपी नेता व पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विजय सिंह की शनिवार देर शाम जान बचा दी. सुपारी किलर उन्हें मारने के लिए निकल पड़े थे. इस बीच इन शूटर्स की लखनऊ एसटीएफ और लोकल पुलिस की टीम से मुठभेड़ हो गई. इसमें एक बदमाश गोली लगने से घायल हो गया और इस घटना को अंजाम देने में लगे तीन अन्य को पुलिस ने पकड़ने में सफलता हासिल की है. पकड़े गए लोगों में बीजेपी नेता के बड़े भाई का एकलौता दामाद भी शामिल है. घायल बदमाश को पुलिस ने इलाज के लिए बहराइच मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया है. अब पुलिस इस मामले की वजह तलाशने में जुटी है कि कोई बीजेपी नेता को क्यों मारना चाहता था?
फार्म हाउस के मंदिर पर हर शनिवार दीपक जलाने जाते हैं विजय सिंह और सुपारी किलर्स को पता थी ये बात
हर शनिवार की तरह कल शाम भी कैसरगंज इलाके के प्रतिष्ठित बीजेपी नेता व पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विजय सिंह अपने कड़सठ बिटोरा के समीप स्थित फार्म हाउस पर बने मंदिर में दीपक जलाने पहुंचे थे. लेकिन संयोग से इस शनिवार वह जल्दी मंदिर पहुंच गए और दीपक जला कर जल्दी ही वापस अपने कैसरगंज कस्बे में स्थित घर पर आ गए जिसके चलते उनकी जान बच गई. यही वजह थी कि रेकी कर मारने आए बदमाशों को सफलता नहीं मिली. आरोपियों में बीजेपी नेता विजय सिंह के दिवंगत बड़े भाई तरुण कुमार सिंह का एकलौता दामाद आलोक सिंह पुत्र हरिद्वार सिंह भी शामिल है. आलोक बाराबंकी जिले के गांव हाजीपुर थाना घूंघटेर का निवासी है.
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पुलिस को शक है कि इसने ही बाराबंकी जिले के आजीवन कारावास प्राप्त शातिर बदमाशों परशुराम मौर्या पुत्र अंगद मौर्या (गोली लगने से घायल), प्रदीप यादव पुत्र राम सागर और साकेत रावत पुत्र मेवालाल को अपने छोटे ससुर विजय कुमार सिंह को जान से मारने की सुपारी दी थी. इसी के चलते आलोक सिंह इन तीन बदमाशों के साथ विजय सिंह की पहचान कराने उनके साथ कैसरगंज क्षेत्र में उनके कड़सठ बिटोरा गांव के पास स्थित फार्म हाउस पर पहुंचा था.
घटना से अनजान थे बीजेपी नेता किसी से नहीं था जान का खतरा, पुलिस की थ्योरी पर उठ रहे सवाल!
एसपी सिटी ने अस पुलिसिया मुठभेड़ को कैसरगंज निवासी बीजेपी नेता विजय सिंह की हत्या की साजिश से जोड़कर बताया है तो वहीं बीजेपी नेता व पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विजय सिंह ने देर रात यूपी Tak को बताया कि उन्हें इस घटना की कोई जानकारी नहीं थी. न ही उन्होंने न कभी पुलिस को अपनी जान के खतरे की आशंका के मद्देनजर कभी कोई सूचना दी थी. वो खुद हैरत में हैं कि ऐसा कैसे हो सकता है. उनके मुताबिक उनके तीन भाइयों में बड़े भाई तरुण कुमार सिंह की कोरोना महामारी के दौरान मृत्यु हो चुकी है. उनसे व उनके मझले भाई शैलेन्द्र कुमार सिंह से कोई भी प्रॉपर्टी को लेकर कोई डिस्प्यूट नहीं है. फिर उनके बड़े भाई के एकलौते दामाद आलोक सिंह ( साजिश का आरोपी) को उनसे क्यों परेशानी है ये उनकी समझ से बाहर है. पुलिस ने अबतक विजय सिंह से कोई पूछताछ की है.
क्या भाई की प्रॉपर्टी बेचने में बाधक बन रहे थे बीजेपी नेता विजय सिंह?
विजय सिंह ने बताया कि उनके बड़े भाई तरुण सिंह की मृत्यु के बाद उनकी संपत्ति की एकलौती वारिस उनकी बेटी है. ये बेटीअब उनकी भाभी के साथ लखनऊ स्थित उनके आवास पर रहती है. उसका पति बाराबंकी निवासी आरोपी आलोक सिंह पिछले काफी दिनों से उनके भाई की संपत्ति बड़े पैमाने पर बेच रहा था. लेकिन जब भी वो किसी से जमीन का सौदा करता तो लोग मुझसे जरूर पूछते थे जिसे लेकर उसे मुझसे चिढ़ हो सकती है. उसने लखनऊ की एक प्रॉपर्टी जो उनके व उनके बड़े भाई के नाम से थी उसमें भी उनका हिस्सा बेच दिया था. वो उस जमीन में अपने मझले भाई शैलेन्द्र सिंह को भी हिस्सेदार बनाना चाहते थे. वो बिकी हुई जमीन का पैसा भी अपने कमीशन के चक्कर में अपनी सास यानि उनकी भाभी को कम करके बताता था जबकि वह जमीन अधिक रेट पर बेचता था. उन्होंने शक जाहिर किया है कि संभवतः उनके भाई का दामाद आलोक सिंह प्रॉपर्टी बिक्री में किसी न किसी रूप में दखल होने से नाराज था. जबकि उन्होंने उसके काम में कभी कोई दखल नहीं किया इसके अतिरिक्त उनकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं है.
एसपी सिटी ने क्या बताया?
मुठभेड़ के बाद जिले के एसपी सिटी रामानंद कुशवाहा ने जानकारी देते हुए सनसनी पैदा कर दी कि कैसरगंज पुलिस को लखनऊ एसटीएफ ने सूचना दी थी कि जेल से छूटे चार व्यक्ति पूर्व जिला पंचायत सदस्य विजय सिंह को जान से मारने के लिए रेकी कर रहे हैं. जिस पर एसटीएफ व पुलिस ने संयुक्त रूप से कॉम्बिंग शुरू की. इसमें संदिग्ध अवस्था में ये चारों बदमाश थाना कैसरगंज क्षेत्र अंतर्गत कड़सठ बिटोरा के पास दिखाई पड़े. इन्हें पकड़ने की पुलिस ने कोशिश की जिसमें एक बदमाश परशुराम मौर्या ने पुलिस पर गोली चला दी. इसके बाद आत्मरक्षा में एसटीएफ और कैसरगंज पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई में गोली चलाई. परशुराम मौर्या गोली लगने से घायल हो गया.
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