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यूपी की राय: आगरा के मीना बाजार पर सीएम योगी ऐसा क्या बोल गए जिसे लेकर भिड़ी जनता!

Agra Fort Meena Bazaar History: आगरा किले के मीना बाजार को लेकर सीएम योगी के बयान ने नई बहस छेड़ दी है. क्या वाकई मुगलों ने वहां महिलाओं का शोषण किया? देखिए आगरा के स्थानीय लोगों की राय और ऐतिहासिक दावों पर तीखी चर्चा.

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में आगरा किले के मीना बाजार को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जिसके बाद आगरा के स्थानीय लोगों और इतिहासकारों के बीच तीखी बहस छिड़ गई है. सीएम योगी ने कहा कि मुगलों के समय मीना बाजार में हिंदू बहन-बेटियों की इज्जत के साथ खिलवाड़ होता था और अब सरकार वहां शिवाजी महाराज का भव्य म्यूजियम बनाने जा रही है. यूपी Tak की इस विशेष चर्चा 'यूपी की राय' में आगरा के लोगों ने अपनी राय साझा की. 

आपको बता दें कि सीएम योगी ने सदन में कहा था कि आगरा किले के अंदर मीना बाजार सजता था जहां मुगल बादशाहों के लिए महिलाओं को पसंद किया जाता था और फिर उन्हें 'हरम' में भेज दिया जाता था. उन्होंने घोषणा की कि कोठी मीना बाजार मैदान में छत्रपति शिवाजी महाराज का म्यूजियम बनेगा. कुछ स्थानीय लोगों और मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि 800 साल के इतिहास में ऐसा कोई प्रामाणिक उदाहरण नहीं मिलता जहां मुगल बादशाहों ने इस तरह का दुराचार किया हो. उनके अनुसार, मीना बाजार केवल रानियों और दासियों की खरीदारी के लिए था और वहां पुरुषों का प्रवेश वर्जित था.

चर्चा में यह बात उठी कि 1666 में शिवाजी महाराज आगरा आए थे और औरंगजेब ने उन्हें यहीं नजरबंद किया था. शिवाजी महाराज के साहसी तरीके से वहां से निकलने की घटना आज भी प्रेरणादायक है. स्थानीय लोगों ने एक स्वर में माना कि शिवाजी महाराज राष्ट्रनायक हैं. बहस इस बात पर हुई कि क्या मुगलों को आक्रांता माना जाए या भारतीय वास्तुकला और इतिहास का हिस्सा. 

कुछ लोगों का मानना है कि 2027 के चुनावों को देखते हुए ऐसे बयान दिए जा रहे हैं ताकि राजनीतिक ध्रुवीकरण किया जा सके. उनका कहना है कि सरकार को इतिहास खंगालने के बजाय सड़क, पानी, शिक्षा और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों पर बात करनी चाहिए. वहीं, दूसरे पक्ष का कहना है कि आने वाली पीढ़ियों को मुगलों के दमन और शोषण की सच्चाई बताना बहुत जरूरी है. उनका आरोप है कि अब तक इतिहास के साथ छेड़छाड़ की गई है और मुगलों के अत्याचारों को छुपाया गया है. 

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राष्ट्रीय प्रतीक और पहचान

चर्चा के दौरान डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, वीर अब्दुल हमीद और अशफाक उल्ला खान जैसे महान व्यक्तित्वों को आदर्श मानने पर सहमति बनी, जबकि मुगलों की नीतियों को लेकर समाज दो धड़ों में बंटा नजर आया.