नरेंद्र गिरि संदिग्ध मौत: सुसाइड या साजिश? जानें अब तक की सारी कहानी

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उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 20 सितंबर को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत एक पहेली बनती जा रही है. पुलिस प्रशासन इसे सुसाइड बता रहा है, तो साधु संत और भक्त इसे एक साजिश बताकर सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं. मामले में अभी तक पुलिस ने नरेंद्र गिरि के शिष्य आनंद गिरि को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि लेटे हुए हनुमान मंदिर के पुजारी आद्या तिवारी और उनके बेटे संदीप तिवारी पुलिस हिरासत में है.वहीं, यूपी के मुख्यमंत्री समेत कई बड़े नेताओं ने नरेंद्र गिरि के पार्थिव शरीर का अंतिम दर्शन किया.

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि चार भाइयों में दूसरे नंबर के थे. वह प्रयागराज में छतौना गांव के रहने वाले थे. नरेंद्र गिरि का असली नाम नरेंद्र सिंह था. उनके पिता भानु सिंह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सक्रिय सदस्य थे. उन्होंने बाबू सरजू सिंह इंटर कॉलेज से हाई स्कूल की परीक्षा पास की थी. नरेंद्र गिरि के दो भाई शिक्षक और एक होमगार्ड है.

नरेंद्र गिरि निरंजनी अखाड़े से जुड़े हुए थे. 1986 में वह अखाड़े के पदाधिकारी बने थे. इसके बाद उन्होंने अखाड़े के विस्तार के लिए बहुत काम किया. बाद में सचिव बनने के बाद अखाड़े और मठ की संपत्ति का खूब विस्तार किया. इसके बाद वह 1998 में अखाड़ा परिषद के पदाधिकारी बने.

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2010 में नरेंद्र गिरि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष चुने गए और तब से वह लगातार अध्यक्ष पद पर काबिज रहे. उन्होंने कुंभ मेले में फर्जी अखाड़ों पर नकेल कसी थी और फर्जी संतों की एक लिस्ट भी जारी की थी.

नरेंद्र गिरी के मुख्य शिष्य आनंद गिरि पहले इससे पहले भी विवादों में रहे हैं. आनंद गिरि ऑस्ट्रेलिया में छेड़खानी के आरोप में सिडनी के जेल में भी बंद हुए थे. जेल से छूटने के बाद दोनों के बीच जमीन से जुड़े विवाद सामने आ गए थे. नरेंद्र गिरि ने आनंद गिरी को परिवार से जुड़े रहने और मठ की संपत्ति को परिवार में भेजने के आरोप में मठ से निष्कासित कर दिया था. इसके बाद आनंद गिरि ने अपने गुरु नरेंद्र गिरी पर मठ की जमीन बेचने का आरोप लगाया था. इसी के बाद दोनों में विवाद बढ़ता गया. बाद में आनंद गिरि ने एक वीडियो जारी कर इस विवाद को विराम देने की कोशिश की थी और मठ में जाकर नरेंद्र गिरि से पैर पकड़कर माफी मांगी थी. नरेंद्र गिरी ने अपने शिष्य को माफ भी कर दिया था, लेकिन अखाड़े में शामिल नहीं किया था.

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बता दें कि 20 सितंबर की शाम में नरेंद्र गिरि का शव उनके कमरे में पंखे से लटकता मिला. उन्होंने 12 पेज का कथित सुसाइड नोट भी लिखा था, जिसमें आनंद गिरि, लेटे हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी आद्या तिवारी और उनके बेटे संदीप तिवारी का जिक्र किया था.

कथित सुसाइड नोट में आनंद गिरि के लिए लिखा गया था कि उनके शव को वह ना छुएं, जबकि आद्या और संदीप को अच्छा आदमी नहीं बताया गया. साथ ही कथित सुसाइड नोट में नरेंद्र गिरि ने अपने गुरु के बगल में अपनी समाधि बनाने की बात कही.

महंत नरेंद्र गिरि की हुई इस तरह अचानक मौत से लोगों में तमाम तरह की चर्चाएं हैं. साधु संत और लोग इसे उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग कर रहे हैं. वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक जांच कमेटी बनाने की बात कही है, जिसमें एडीजी, आईजी कमिश्नर और कुछ अधिकारी शामिल होंगे.

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