मारने की धमकी देते थे और...शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद केस में पीड़ित बटुक ने कैमरे पर रोते हुए ये सब कह दिया
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Shankaracharya Avimukteshwaranand Case: Shankaracharya Avimukteshwaranand Case: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाले मध्य प्रदेश के बटुक ने कैमरे के सामने अपनी आपबीती सुनाई.बटुक ने दावा किया कि आश्रम में उसे डराया-धमकाया जाता था और मुकुंदानंद गुरु दीक्षा के नाम पर गलत काम करते थे.
Shankaracharya Avimukteshwaranand Case: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद के खिलाफ प्रयागराज में पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज होने के बाद हड़कंप मचा हुआ है. इस बीच मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर आश्रम से जुड़े एक बटुक ने कैमरे के सामने आकर उन खौफनाक यादों को साझा किया है जिनका वह शिकार हुआ. बटुक का आरोप है कि उसे गुरु दीक्षा के नाम पर प्रताड़ित किया जाता था और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी जाती थी.
'जून 2024 से शुरू हुआ गंदा काम'
पीड़ित बटुक के अनुसार, वह जून 2024 में नरसिंहपुर स्थित आश्रम पहुंचा था. शुरुआती 10-15 दिन सब ठीक रहा, लेकिन उसके बाद मुकुंदानंद और अरविंद जैसे शिष्यों ने उसके साथ घिनौनी हरकतें शुरू कर दीं. बटुक का दावा है कि मुकुंदानंद उसे जबरदस्ती यह कहकर ले जाता था कि 'चलो गुरु दीक्षा ग्रहण करो' और फिर उसके साथ शोषण किया जाता था.
'रोते-चीखते थे हम, पर कोई नहीं सुनता था'
बटुक ने बताया कि वह और उसके जैसे कई अन्य बच्चे अक्सर रोते रहते थे. लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं होती थी. उसने आरोप लगाया कि वहां लगभग 20 बच्चे हैं जिन्हें इसी तरह प्रताड़ित किया जाता है. उसे डराने के लिए कहा जाता था कि 'अगर किसी को बताया तो तुम्हें और तुम्हारे माता-पिता को मार डालेंगे.'
तीसरी मंजिल का 'स्विमिंग पूल' और सखी का रहस्य
इंटरव्यू के दौरान बटुक ने एक और चौंकाने वाला दावा किया. उसने बताया कि आश्रम की तीसरी मंजिल पर एक छोटा स्विमिंग पूल बना हुआ है. उसने आरोप लगाया कि वहां एक 'सखी' रहती है जो शंकराचार्य को नहलाती है.बटुक ने कहा 'यह सब हम लोगों को मालूम है और हमने अपनी आंखों से देखा है.'
18 जनवरी की घटना और भागने की कहानी
बटुक ने बताया कि 18 जनवरी को माघ मेले के दौरान हुई अफरा-तफरी का फायदा उठाकर वह वहां से भाग निकला और आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज के शिविर में पहुंचा. उसने साफ तौर पर कहा कि उस पर कोई दबाव नहीं है और वह केवल न्याय चाहता है. वह अब भी डरा हुआ है क्योंकि उसे और न्याय दिलाने वाले गुरुओं को लगातार धमकियां मिल रही हैं. दूसरी तरफ, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद इन सभी आरोपों को एक बड़ी साजिश बता रहे हैं. उनका कहना है कि वे 18 जनवरी को सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में थे. फिलहाल प्रयागराज की झूंसी पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर एफआईआर दर्ज कर ली है और जांच के लिए वाराणसी और अन्य आश्रमों तक पहुंच रही है.
