UP: भीषण गर्मी में बिजली कटौती से लोग परेशान, अखिलेश से लेकर स्मृति तक के गढ़ का जानें हाल

UP: भीषण गर्मी में बिजली कटौती से लोग परेशान, अखिलेश से लेकर स्मृति तक के गढ़ का जानें हाल
सांकेतिक तस्वीरफोटो: @aksharmaBharat/ ट्विटर

पिछले कई हफ्तों से यूपी में लगातार अघोषित रूप से बिजली कटौती जारी है और इस वजह से लोग अब त्राहिमाम करने लगे हैं. समाजवादी पार्टी चीफ अखिलेश यादव के गढ़ माने जाने वाले इटावा हो या कालीन नगरी भदोही, मुरादाबाद हो, देवरिया या फिर स्मृति ईरानी का संसदीय क्षेत्र अमेठी. हर जगह बिजली कटौती से हाहाकार मचा हुआ है.

आइए जानते हैं कि इन इलाकों में बिजली कटौती का क्या हाल है और बिजली की भीषण कटौती से त्राहिमाम कर रहे लोग क्या कह रहे हैं.

भदोही में बिजली कटौती से कालीन उद्योग पर पड़ रहा असर

इन दिनों उत्तर प्रदेश के भदोही में भी बिजली आपूर्ति की समस्या बढ़ गई है. जिसका असर कालीन उद्योग पर भी पड़ रहा है.अघोषित बिजली कटौती के कारण कालीन का उत्पादन प्रभावित हो रहा है. कालीन बुनाई के कार्यों से जुड़े कामगारों का मानना है कि अगर इसी तरह बिजली कटौती जारी रहेगी, तो कालीन उत्पादन में भारी कमी आ सकती है.

भदोही जिले में बड़े पैमाने पर कालीन का उत्पादन और निर्यात किया जाता है. कालीन बुनाई का कार्य बड़ी कम्पनियों के साथ ग्रामीण इलाकों में लूम लगा कर किया जाता है. कालीन की बुनाई हाथ और इलेक्ट्रिक टूल्स के मदद से होती है. जिसके लिए भीषण गर्मी में बुनकरों को पंखे-कूलर से हवा की जरूरत पड़ती है और टूल्स के लिए बिजली की आवश्यकता पड़ती है. लेकिन बिजली की कटौती की वजह से बुनाई का काम प्रभावित हो रहा है.

बिजली कटौती को लेकर कालीन बुनाई का कार्य कराने वाले भदोही विकास खंड के रमेश मौर्या का कहना है कि उनका ग्रामीण इलाके में कारखाना चलता है, जहां महज आठ घंटे बिजली मिल पा रही है. भीषण गर्मी में बुनकरों को पंखे-कूलर की जरूरत पड़ती है लेकिन जब बिजली कटौती हो रही है तो बुनकर कारखाने से बाहर चले जाते हैं और इससे बुनाई का कार्य प्रभावित होता है.

बुनकरों को तय समय पर कम्पनियों को कालीन बुनाई कर देना होता है. लेकिन अगर इसी तरह बिजली कटौती होती रही, तो कालीन के उत्पादन में कमी आएगी और इसका असर बुनकरों के साथ पूरे कालीन उद्योग को उठाना पड़ेगा.

कालीन बुनकर राकेश का कहना है कि वो दिहाड़ी पर मजदूरी करते हैं. लेकिन बिजली कटौती के कारण कार्य कम हो रहा है. इसका असर उनके मजदूरी पर भी पड़ रहा है. सरकार को चाहिए की बिजली कटौती पर रोक लगाए.

वहीं दूसरी तरफ बिजली कटौती को लेकर विभाग सफाई दे रहा है कि ऊपर से जितनी आपूर्ति मिल रही है उसे उपलब्ध कराया जा रहा है. ऊपर से ही आपूर्ति से सम्बंधित कुछ दिक्कतें आईं हैं, जो अगले तीन चार दिनों में ठीक होने की संभावना है.

बिजली कटौती से मुरादाबाद के लोग परेशान

देश और प्रदेश में जहां बिजली कटौती को लेकर हाहाकार मचा हुआ है, वहीं बिजली कटौती से मुरादाबाद जनपद भी अछूता नहीं है. मुरादाबाद जनपद में शहरी क्षेत्र में अलग-अलग हिस्सों में 3 से 4 घंटे की बिजली कटौती की जा रही है. वहीं ग्रामीण क्षेत्रों की बात करें तो 7 से 8 घंटे की कटौती की जा रही है.

बिजली विभाग के अनुसार, थर्मल प्लांट में कोयले की कमी की वजह से बिजली के प्रोडक्शन में और कमी आ सकती है. जितनी गर्मी अधिक बढ़ेगी, उतनी बिजली की मांग लगातार बढ़ेगी. इसलिए आने वाले समय में यही स्थिति रही तो बिजली की कटौती का समय और बढ़ जाएगा. बिजली कटौती का ज्यादा असर ग्रामीण क्षेत्र में देखा जा रहा है.

स्थानीय निवासी कमल कुमार ने बताया, "बिजली कटौती का कोई समय नहीं है. रात में किसी भी समय बत्ती गुल हो जाती है और इन्वर्टर की चार्जिंग खर्च होने पर आंख खुलती है तो पता चलता है कि बत्ती गुल हो गई है. इसके बाद पूरी रात जागते हुए बिताना पड़ता है."

एक अन्य स्थानीय निवासी जगदीश बताते हैं कि हमारे क्षेत्र में बिजली की स्थिति ठीक नहीं है. हालात यह हो चुके हैं कि रात के किसी भी समय लालबाग इलाके में बत्ती गुल हो जाती है. शिकायत करने जाते हैं तो कोई सुनने वाला नहीं है.

वहीं बिजली कटौती को लेकर अधीक्षण अभियंता शहर संजय कुमार ने बताया कि हमारे पास शहर की कटौती का कोई शेड्यूल नहीं है. पूर्व निर्देश के मुताबिक, 24 घंटे लगातार आपूर्ति दी जा रही है. फाल्ट होने की स्थिति में कुछ देर के लिए बत्ती बंद हो जाती है. प्रयास किया जा रहा है, सब व्यवस्थाएं ठीक रहें.

अघोषित बिजली कटौती से देवरिया के लोगों का हाल बेहाल

देवरिया जिले में विद्युत व्यवस्था लड़खड़ा गई है. विद्युत आपूर्ति के सरकारी दावे और वास्तविक आपूर्ति में भारी अंतर है. एक तरफ गर्मी का मौसम, दूसरी ओर विश्वविद्यालय की परीक्षाएं. लग्न का मौसम होने से भी व्यवसायी से लेकर शादी विवाह की तैयारी करने वाले लोग,अघोषित विद्युत कटौती से समाज का हर वर्ग परेशान हैं.

देवरिया के शहरी इलाकों में 17 तो देहात में 8-10 घंटे बिजली मिल रही है. जिला मुख्यालय की बात करें तो दिन और रात में ट्रिपिंग की संख्या बढ़ गई है. बिजली के आने जाने से कई बार घर में लगे इन्वर्टर भी जवाब दे दे रहे हैं.

छितौनी गांव निवासी अनूप यादव कहते हैं कि बिजली का रोस्टर क्या है और आपूर्ति कितने घण्टे की है. इसे विभागीय कर्मचारी नहीं बता पा रहे हैं. शिक्षक अभय सिंह बघेल कहते हैं कि बिजली की आवाजाही से मन खिन्न हो गया है. कोई टाइम टेबल ही नहीं है. गर्मी में अघोषित कटौती से दिनचर्या प्रभावित हो रही है. राजन कुशवाहा भी अभय की बातों से सहमति जताते हुए कहते हैं कि पिछली योगी सरकार में गांव देहात में बिजली की आपूर्ति तारीफ योग्य थी. किन्तु सरकार बनने के कुछ ही महीने में यह व्यवस्था फेल दिख रही है.

शिवपाल और अखिलेश के गढ़ में हो रही जबरदस्त कटौती से लोग परेशान

इटावा शहर के सुंदरपुर बिजली फीडर का हालात यह है कि इलाके के निवासी जागकर रात बिताने को मजबूर हैं.अगर फाल्ट हो जाता है तो 4 से 5 घंटे तक विद्युत आपूर्ति बाधित रहती है. इन्वर्टर डिस्चार्ज हो जाता है फिर चार्ज भी नहीं हो पाता. यही हाल दिन में भी होता है. कुल मिलाकर शहर में 18 घंटे से अधिक विद्युत आपूर्ति नहीं हो रही है.

ग्रामीण क्षेत्रों की बात करें तो बसरेहर ब्लॉक के रहने वाले मधुर शर्मा का कहना है कि रात 11:00 बजे लाइट आ जाती है तो आधी रात के बाद 2:00 बजे तक चलती है. फिर उसके बाद दोपहर 12:00 बजे आती है शाम को 5:00 से 7:00 तक ही चल पाती है. टुकड़ों टुकड़ों में विद्युत आपूर्ति हो रही है .

12 से 14 घंटे की कटौती से बुरा हाल है कोई कार्य नहीं हो पा रहा है. जसवंतनगर विधानसभा के निवासी बीजेपी नेता बिंदु यादव का कहना है कि मात्र 12 से 14 घंटे मिल रही है और रात भर बिजली परेशान करती है. ठीक से इन्वर्टर भी चार्ज नहीं हो पाता है और पानी की किल्लत भी रहती है. निलोई गांव के निवासी प्रेम सिंह शाक्य का कहना है कि गांव में रात में 5 घंटे की कटौती और दोपहर में भी बिजली गायब रहती है. मुश्किल से 12 घंटे मिल पा रही है.

स्मृति ईरानी के गढ़ अमेठी में अघोषित विद्युत कटौती से लोग हुए बेहाल

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के संसदीय क्षेत्र अमेठी में भी अघोषित विद्युत कटौती से लोग परेशान हो चुके हैं. आलम यह है कि रात में कब बिजली कट जाए कुछ भरोसा नहीं है. बिजली कट जाने पर लोग अंधेरे में रहने के लिए विवश हैं.

ग्रामीण क्षेत्र में 18 घंटे बिजली सप्लाई करने का निर्देश है. लेकिन उसका सही पालन नहीं हो पा रहा है. शाम के समय बिजली सप्लाई की सबसे अधिक जरूरत होती है. लेकिन जैसे ही शाम होती है बिजली कट जाती है. अघोषित बिजली कटौती अब लोगों के लिए एक बड़ी समस्या बन गई है.आलम यह है कि लोग मोबाइल की लाइट में अपने जरूरी काम निपटाने को मजबूर हैं.

अमेठी निवासी कमर महमूद मुर्गी पालन का व्यवसाय करते हैं. उनका कहना है कि भाजपा सरकार की घोषणा है कि ग्रामीण क्षेत्र को अठारह घंटे बिजली और शहरी क्षेत्र को 24 घंटे बिजली आपूर्ति होगी. लेकिन विद्युत कटौती के चलते उजाले में भोजन भी नहीं नसीब हो पा रहा है. उन्होंने कहा कि अगर सोलर पैनल ना लगाया होता और बिजली विभाग के भरोसे ये मुर्गी पालन का धंधा करता तो अब तक सब खत्म हो चुका होता.

अमेठी के ही रहने वाले अरुण गुप्ता कहते हैं कि भाजपा सरकार दूसरी बार अपने एजेंडे में बिजली के बिल कम कराने के नाम पर आई थी. बिल कम करने को कौन कहे, अघोषित कटौती ही उपभोक्ताओं का सर दर्द बन चुकी है.

वहीं अमेठी के अधिवक्ता राजेश मिश्रा ने कहा कि बीते दो साल से अधिक का समय बीत चुका है, आम जनता को मिट्टी का तेल उपलब्ध नहीं है. ऐसे में गरीब किसान मजदूर मेहनत करने के बाद घर लौटता है. भोजन पानी की व्यवस्था में लग जाता है और उसे इसी समय उजाले की ज्यादा जरूरत होती है. लेकिन उस वक्त बिजली कटौती के चलते वह अंधेरे में भोजन बनाने और करने को मजबूर है.

(भदोही से महेश जायसवाल, मुरादाबाद से जगत गौतम, देवरिया से राम प्रताप सिंह, अमेठी से आलोक श्रीवास्तव और इटावा से अमित तिवारी के इनपुट के साथ)

सांकेतिक तस्वीर
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