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संभल दंगों पर 450 पन्नों की रिपोर्ट आने का बाद टेंशन! जुमे की नमाज को लेकर ये क्या होने लगा

संतोष शर्मा

संभल दंगों पर न्यायिक आयोग की 450 पन्नों की रिपोर्ट ने नया तनाव पैदा किया. जानें रिपोर्ट में डेमोग्राफिक बदलाव और साजिश के खुलासे के बाद क्यों जुमे की नमाज़ पर प्रशासन हाई अलर्ट पर है.

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संभल में हुई हिंसा के बाद उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गठित न्यायिक आयोग की 450 पन्नों की रिपोर्ट ने प्रदेश में हड़कंप मचा दिया है. रिपोर्ट के गोपनीय होने के बावजूद इसके अहम बिंदू लीक हो गए हैं. इसके बाद शहर में तनाव का माहौल है. इन लीक्ड जानकारियों के आधार पर यह रिपोर्ट संभल में हुए दंगों को एक गहरी साजिश का हिस्सा बताती है. इसमें संभल के बदलते डेमोग्राफिक समीकरणों की ओर भी इशारा किया गया है. 

इस रिपोर्ट के आने के बाद डीजीपी मुख्यालय ने मुरादाबाद रेंज के सभी जिलों खासकर संभल में हाई अलर्ट जारी कर दिया है. जुमे की नमाज़ को देखते हुए विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई है. इसमें सोशल मीडिया और नमाज़ के दौरान दिए जाने वाले भाषणों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है. 

रिपोर्ट में क्या खुलासा हुआ?

पीटीआई (PTI) की एक रिपोर्ट के मुताबिक न्यायिक आयोग ने अपनी 450 पन्नों की रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी है. इस रिपोर्ट के मुख्य दावे बेहद गंभीर हैं:

डेमोग्राफिक बदलाव: रिपोर्ट में दावा किया गया है कि संभल में हिंदुओं की आबादी लगातार घट रही है. सूत्रों के मुताबिक आज़ादी के समय शहर की नगरपालिका में हिंदुओं की आबादी 45% थी. ये अब घटकर मात्र 15-20% रह गई है, जबकि मुस्लिम आबादी 85% तक पहुंच गई है.

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साजिश और बाहरी तत्व: रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नवंबर 2024 की हिंसा कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि यह हिंदुओं को निशाना बनाने की एक सुनियोजित साजिश थी. इसमें बाहरी दंगाई और कुछ कट्टरपंथी समूहों की भूमिका भी सामने आई है.

पुलिस की भूमिका: रिपोर्ट में यूपी पुलिस की सराहना की गई है कि उन्होंने समय रहते कार्रवाई कर एक बड़े नरसंहार को टाल दिया.

सुरक्षा व्यवस्था में क्यों है सख्ती?

न्यायिक आयोग की इस रिपोर्ट में दिए गए गंभीर इनपुट्स के बाद प्रशासन किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहता. यही वजह है कि डीजीपी मुख्यालय ने मुरादाबाद रेंज के जिलों में विशेष अलर्ट भेजा है. संभल में जुमे की नमाज़ के लिए सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं. सोशल मीडिया पर अफवाहों और भड़काऊ पोस्ट पर नज़र रखने के लिए जिला, रेंज और जोन की साइबर टीमों को सक्रिय किया गया है. नमाज़ के दौरान दिए जाने वाले धार्मिक तकरीरों (भाषणों) पर भी नज़र रखी जा रही है ताकि कोई भड़काऊ बात न फैले.

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क्या था नवंबर 2024 का विवाद?

संभल विवाद की शुरुआत नवंबर 2024 में तब हुई थी जब हिंदू याचिकाकर्ताओं ने शाही जामा मस्जिद को एक प्राचीन मंदिर की जगह पर बनाने का दावा करते हुए अदालत में एक याचिका दायर की. अदालत के आदेश पर 24 नवंबर को हुए एक सर्वेक्षण ने तनाव बढ़ा दिया. इसके बाद हुई हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई और 29 पुलिसकर्मी घायल हुए. इस मामले में पुलिस ने सपा सांसद जियाउर रहमान बर्क और मस्जिद समिति के प्रमुख जफर अली सहित लगभग 2,750 अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की थी.

संभल में सांप्रदायिक तनाव का इतिहास

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि संभल का एक लंबा सांप्रदायिक इतिहास रहा है. इसकी शुरुआत 1953 में शिया-सुन्नी झड़प से हुई थी. इसके बाद 1956, 1959, और 1966 में भी यहां दंगे हुए. रिपोर्ट के अनुसार इन घटनाओं के बाद से ही शहर में हिंदू आबादी में लगातार कमी आ रही है.

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