4 दिन बाद नोएडा के नाले से यूं निकाली गई युवराज की कार, इसका सनरूफ बता रहा दर्दनाक मौत की पूरी कहानी
Yuvraj Car: युवराज की कार पानी से भरे गड्ढे से हादसे के चौथे दिन यानी करीब 90 घंटे बाद मंगलवार को बरामद हुई.कार की सामने आई तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि उसके परखच्चे उड़े हुए हैं और कार का सनरूफ भी खुला हुआ है. बता दें कि युवराज इसे सनरूफ से बाहर निकलकर मदद मांग रहा था.
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नोएडा सेक्टर 150 में शनिवार रात निर्माणाधीन मॉल के बेंसमेट में भरे पानी में कार सहित डूबने से इंजीनियर युवराज की मौत हो गई थी.

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युवराज का शव इस हादसे के अगले दिन यानी रविवार सुबह बरामद कर लिया गया था. लेकिन उनकी कार उसी पानी भरे गड्ढे में गिरी थी जिसे हादसे के चौथे दिन यानी करीब 90 घंटे बाद मंगलवार को गड्ढे से निकाला गया.

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कार की सामने आई तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि उसके परखच्चे उड़े हुए हैं और कार का सनरूफ भी खुला हुआ है. बता दें कि युवराज इसे सनरूफ से बाहर निकलकर मदद मांग रहा था.

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निर्माणाधीन मॉल के पानी से लबालब बेसमेंट में समाई कार को मंगलवार को क्रेन की मदद से बाहर निकाल लिया गया. कार को निकालने के लिए भारी-भरकम क्रेन और गोताखोरों की टीम लगी रही जिसके बाद कई घंटों की मशक्कत के बाद सफलता मिली.

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यह हादसा 16 जनवरी की रात करीब 12 बजे हुआ था. निर्माणाधीन मॉल के बेंसमेट में भरे पानी में अंधेरा होने के कारण युवराज की कार सीधे उसमें जा गिरी. चश्मदीदों के अनुसार, युवराज करीब 2 घंटे तक मदद के लिए चिल्लाता रहा.इस दौरान युवराज के पिता खुद मौके पर पहुंचे और फिर फायर ब्रिगेड को सूचित किया गया.

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रात भर चले रेस्क्यू ऑपरेशन में करीब 3:30 बजे SDRF की टीम पहुंची लेकिन विजिबिलिटी जीरो होने के कारण उस समय न तो कार मिली और न ही युवराज. रविवार सुबह युवराज का शव तो मिल गया. लेकिन कार गहरे पानी में ही फंसी रही.

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स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति भारी नाराजगी है. लोगों का आरोप है कि इतने बड़े हादसे के बाद जिलाधिकारी मेधा रुपम को मौके पर रहकर रेस्क्यू का नेतृत्व करना चाहिए था. लेकिन वहां सिर्फ एक एसडीएम पहुंचे. जब वहां मौजूद भीड़ ने एसडीएम से गंभीर सवाल पूछे तो उन्होंने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे.'

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जैसे ही इस हादसे की गूंज लखनऊ तक पहुंची मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया. इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए नोएडा अथॉरिटी के सीईओ एम. लोकेश को उनके पद से हटा दिया गया है.

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हादसे की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी (SIT) टीम का गठन किया गया है. इस टीम में एडीजी जोन मेरठ, मंडल आयुक्त मेरठ और पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर शामिल हैं. वहीं इस जांच का नेतृत्व एडीजी जोन मेरठ करेंगे.









