लेटेस्ट न्यूज़

विंध्याचल धाम के दरबार से कोई नहीं लौटता खाली हाथ, त्रिकोण यात्रा से दूर होते हैं हर दुख, पूरी होती है मनोकामना

Vindhyachal Shaktipeeth: मिर्जापुर का मां विंध्यवासिनी धाम देश के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है. गंगा तट पर स्थित इस पवित्र मंदिर में हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. जानिए शक्ति के त्रिकोण का धार्मिक महत्व, मां काली और मां अष्टभुजा देवी से जुड़ी मान्यताएं, तंत्र-मंत्र साधना का रहस्य, नवरात्रि में जुटने वाली भीड़ और नंगे पांव की जाने वाली त्रिकोण यात्रा की पूरी जानकारी.

ADVERTISEMENT

social share
google news
1

1/6

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में गंगा तट पर स्थित मां विंध्यवासिनी धाम देश के प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मां के दरबार में पहुंचने वाले भक्त की हर मनोकामना पूरी होती है. यही वजह है कि आम श्रद्धालुओं से लेकर बड़े राजनेता तक यहां आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं. नवरात्रि के दौरान यहां लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है.
 

2

2/6

मान्यताओं के अनुसार जहां अन्य शक्तिपीठों में माता सती के अंग गिरे थे, वहीं विंध्याचल धाम में मां विंध्यवासिनी अपने पूर्ण स्वरूप में विराजमान हैं. इस कारण यह धाम विशेष धार्मिक महत्व रखता है. इसे दस महाविद्याओं का प्रमुख केंद्र भी माना जाता है, जहां मां महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती तीनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
 

3

3/6

विंध्याचल धाम को तंत्र-मंत्र और देवी साधना के लिए अत्यंत सिद्ध स्थान माना जाता है. मान्यता है कि असम के कामाख्या धाम की तरह यहां भी साधना करने से विशेष सिद्धियां प्राप्त होती हैं. यही कारण है कि हर नवरात्रि में देशभर से अघोरी, तांत्रिक और साधक यहां साधना और अनुष्ठान के लिए पहुंचते हैं.
 

4

4/6

विंध्याचल धाम को शक्ति के त्रिकोण के रूप में भी जाना जाता है. इस त्रिकोण में मां विंध्यवासिनी के साथ दक्षिण दिशा में मां काली और दूसरी ओर मां अष्टभुजा देवी विराजमान हैं. धार्मिक मान्यता है कि इन तीनों शक्तियों के दर्शन और पूजा से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और उन्हें विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है.
 

5

5/6

शक्ति के इस त्रिकोण की यात्रा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है. बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने की कामना लेकर नंगे पांव मां विंध्यवासिनी, मां काली और मां अष्टभुजा देवी के दर्शन करते हैं. भक्तों का विश्वास है कि श्रद्धा और आस्था के साथ की गई यह यात्रा जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है.
 

6

6/6

अगर आप मां विंध्यवासिनी धाम की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो सुबह के समय दर्शन करना सबसे सुविधाजनक माना जाता है. नवरात्रि में यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है, इसलिए पहले से यात्रा की योजना बनाना बेहतर रहता है. मां विंध्यवासिनी मंदिर के साथ शक्ति त्रिकोण के अंतर्गत मां काली और मां अष्टभुजा देवी के दर्शन भी जरूर करें. गंगा घाट पर स्नान, स्थानीय प्रसाद और धार्मिक बाजार की भी सैर आपकी यात्रा को और यादगार बना सकती है.

(इस खबर को यूपी Tak के साथ इंटर्नशिप कर रही मान्या पाण्डेय ने लिखा है.)