जन्माष्टमी की पूजा पर भूलकर भी न देखें भगवान श्रीकृष्ण की पीठ, नष्ट हो जाएंगे सारे पुण्य, जानें क्या कहती है कथा?
कृष्ण जन्माष्टमी पर भगवान के दर्शन और पूजा का विशेष महत्व है, लेकिन कभी भी भगवान श्रीकृष्ण की पीठ नहीं देखनी चाहिए. शास्त्रों के अनुसार, कृष्ण जी की पीठ पर अधर्म (पाप) का वास होता है, जिसे देखने से इंसान के पुण्य कम होने लगते हैं.
ADVERTISEMENT

1/7
कृष्ण जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के भक्त पूरी श्रद्धा के साथ उनकी पूजा-अर्चना करते हैं. इस दिन देश भर के प्रसिद्ध कृष्ण मंदिरों में भारी भीड़ उमड़ती है और भक्त भगवान के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से आते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दर्शन या पूजा के दौरान कभी भी श्रीकृष्ण की पीठ नहीं देखनी चाहिए?

2/7
धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण की पीठ पर अधर्म यानी पाप का वास होता है. ऐसा माना जाता है कि जो भी व्यक्ति अनजाने में या जानबूझकर उनकी पीठ के दर्शन करता है, उसके पुण्य धीरे-धीरे नष्ट होने लगते हैं और पापों में वृद्धि होने लगती है. इसके पीछे एक रोचक पौराणिक कथा जुड़ी है.

3/7
कथा के अनुसार, एक बार भगवान श्रीकृष्ण का जरासंध के साथ युद्ध चल रहा था. तभी जरासंध का मित्र और एक मायावी असुर, कालयवन भी युद्धभूमि में पहुंच गया और कृष्ण को ललकारने लगा. कालयवन को यह वरदान प्राप्त था कि युद्ध के मैदान में उसे कोई भी नहीं हरा सकता.

4/7
श्रीकृष्ण जानते थे कि कालयवन के पूर्व जन्म के पुण्य बहुत अधिक हैं और भगवान किसी को भी उसके पुण्यों का प्रभाव खत्म होने से पहले दंड नहीं देते. इसलिए, युद्ध के मैदान में उसे हराना संभव नहीं था. यह जानकर श्रीकृष्ण रणभूमि छोड़कर भागने लगे, जिससे उनका नाम 'रणछोड़' पड़ गया.

5/7
जब श्रीकृष्ण रणभूमि से भागे, तो कालयवन उनके पीछे-पीछे दौड़ने लगा. इस दौरान वह लगातार भगवान की पीठ देखता रहा. क्योंकि भगवान की पीठ पर अधर्म का वास माना गया है, इसलिए कृष्ण की पीठ देखने से कालयवन के सारे पुण्य धीरे-धीरे नष्ट हो गए और उसका घमंड ही उसके अंत का कारण बना.

6/7
भागते हुए श्रीकृष्ण एक गुफा में पहुंचे, जहां राजा मुचुकुंद गहरी नींद में सो रहे थे. राजा मुचुकुंद को देवराज इंद्र से यह वरदान मिला था कि जो भी उन्हें उनकी नींद से जगाएगा, वह उनकी पहली दृष्टि पड़ते ही जलकर भस्म हो जाएगा. श्रीकृष्ण इस वरदान के बारे में भली-भांति जानते थे.

7/7
श्रीकृष्ण ने अपनी एक पीतांबरी (पोशाक) राजा मुचुकुंद के ऊपर डाल दी और खुद छिप गए. पीछे से आए कालयवन ने उस पोशाक को देखकर सोचा कि श्रीकृष्ण सो रहे हैं. उसने मुचुकुंद को कृष्ण समझकर लात मारकर जगा दिया. जैसे ही राजा ने आंखें खोलीं और उनकी नजर कालयवन पर पड़ी, वह असुर वहीं जलकर राख हो गया. इसी घटना के बाद से कृष्ण की पीठ देखना अशुभ माना जाता है.

