यूपी में बारिश के बाद धंसा एक और एक्सप्रेसवे, तस्वीरें भी आई सामने... 36000 करोड़ की लागत से हुआ था निर्माण
UP Ganga Expressway: करीब 36 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत से बना 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे बारिश के दौरान उन्नाव से प्रयागराज की ओर किलोमीटर 421 के पास धंस गया. एक्सप्रेसवे के साइड हिस्से में करीब 10 मीटर गहरा गड्ढा होने की जानकारी सामने आई है.
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करीब 36 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत से बना गंगा एक्सप्रेसवे भी बारिश के दौरान धंस गया है. मेरठ से प्रयागराज को जोड़ने वाला 594 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे देश के सबसे बड़े एक्सप्रेसवे में शामिल है. उन्नाव से प्रयागराज की ओर किलोमीटर संख्या 421 के पास सड़क का हिस्सा धंसने की बात सामने आई है.

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मौके पर एक्सप्रेसवे की साइड का हिस्सा बैठा हुआ दिखाई दिया. यहां करीब 10 मीटर तक गहरा गड्ढा होने की जानकारी दी गई है. घटना के बाद कार्यदाई संस्था UPEIDA की टीम और मजदूर मौके पर पहुंच गए और बारिश के बीच ही मरम्मत का काम शुरू कर दिया. बड़ी मशीनों और डंपरों की मदद से धंसे हिस्से को ठीक करने का काम किया जा रहा है.

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मौके पर मौजूद मजदूरों ने बताया कि बारिश की वजह से रेनकट हुआ था, जिसे अब भरा जा रहा है. एक मजदूर ने बताया कि करीब दो घंटे से मरम्मत का काम चल रहा था. उसके मुताबिक संबंधित अधिकारी भी मौके पर आकर स्थिति देख चुके हैं. हालांकि, जब अधिकारियों से इस मामले में जानकारी लेने की कोशिश की गई तो उन्होंने कैमरे पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया.

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गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था. करीब 594 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे को उत्तर प्रदेश के 12 जिलों को जोड़कर बनाया गया है. इसके शुरू होने के बाद मेरठ से प्रयागराज के बीच करीब 12 घंटे का सफर घटकर लगभग 6 घंटे होने की बात कही गई थी. ऐसे में उद्घाटन के महज तीन महीने बाद बारिश में एक्सप्रेसवे के धंसने से इसकी निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं.

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खास बात यह है कि इससे पहले कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के धंसने का मामला भी सामने आया था. अब गंगा एक्सप्रेसवे के हिस्से के बैठने के बाद बड़े एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता को लेकर फिर चर्चा शुरू हो गई है. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि सड़क के धंसने की मुख्य वजह क्या रही और निर्माण में किसी तरह की कमी थी या नहीं.

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इस मामले पर UPEIDA का कहना है कि एक्सप्रेसवे बनने के बाद पहली बरसात में कुछ जगहों पर थोड़ी-बहुत समस्या सामने आ सकती है. विभाग के मुताबिक एक्सप्रेसवे के निर्माण में बड़े पैमाने पर मिट्टी की भराई की जाती है और बारिश के दौरान मिट्टी बैठने से ऐसी स्थिति बन सकती है. UPEIDA ने कहा कि तकनीकी टीमें मौके पर मौजूद हैं और तत्काल सुधार का काम किया जा रहा है, ताकि आवागमन प्रभावित न हो.

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UPEIDA के मुताबिक गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण में अत्याधुनिक तकनीक और तय मानकों का इस्तेमाल किया गया है. तकनीकी टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं और जरूरत के अनुसार तुरंत कार्रवाई की जा रही है. विभाग ने यह भी कहा है कि गंगा एक्सप्रेसवे पर आवागमन निर्बाध रूप से जारी है. फिलहाल 421 किलोमीटर के पास मरम्मत का काम जारी है, लेकिन बारिश के बीच एक्सप्रेसवे के धंसने की यह तस्वीरें निर्माण गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों का जवाब आने तक चर्चा में बनी रहेंगी.
