Akhilesh Yadav on Rajyasabha Seat: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी ने बड़ा फैसला लिया है. सपा अब राज्यसभा चुनाव में अपना तीसरा प्रत्याशी नहीं उतारेगी. पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि अब उनकी निगाह तीन पर नहीं, बल्कि 403 पर है. माना जा रहा है कि पार्टी का पूरा फोकस अपने दो घोषित उम्मीदवारों को जिताने और 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी पर रहेगा.
ADVERTISEMENT
अखिलेश यादव ने दिया बड़ा संकेत
अखिलेश यादव ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा, 'अब हमारी निगाह तीन पर नहीं, चार सौ तीन पर है.' इस एक लाइन के जरिए उन्होंने राज्यसभा चुनाव में तीसरे प्रत्याशी को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगा दिया. पार्टी ने विधानसभा में अपने मौजूदा आंकड़ों और चुनावी गणित का आकलन करने के बाद तीसरा उम्मीदवार न उतारने का फैसला किया है. अब सपा की रणनीति अपने दो प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने के साथ 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए संगठन और जमीनी तैयारी मजबूत करने की है.
37 वोट से जीतता है एक राज्यसभा उम्मीदवार
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव होना है. एक सीट जीतने के लिए किसी उम्मीदवार को 37 विधायकों के प्रथम वरीयता वाले वोटों की जरूरत होगी. फिलहाल यूपी विधानसभा की प्रभावी संख्या 396 है. सपा के पास कुल 98 विधायक बताए गए हैं. अगर जेल में बंद विधायक रमाकांत यादव को वोट डालने की अनुमति नहीं मिलती है तो सपा की प्रभावी संख्या 97 रह जाएगी. वहीं कांग्रेस के दो विधायकों का समर्थन मिलने पर सपा के पास कुल 99 वोट हो जाते हैं.
दो सीटों के लिए सपा के पास पर्याप्त वोट
दो राज्यसभा सीटें जीतने के लिए 74 विधायकों के वोटों की जरूरत है. दिए गए आंकड़ों के मुताबिक कांग्रेस के समर्थन के साथ सपा के पास 99 वोट हो सकते हैं. ऐसे में दो प्रत्याशियों को जिताने के लिए जरूरी आंकड़ा पार्टी के पास मौजूद है. हालांकि तीसरे उम्मीदवार के लिए समीकरण अलग था और उसे जीत दिलाने के लिए अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ती. इसी वजह से पार्टी ने तीसरे प्रत्याशी के मैदान में उतरने की संभावना को छोड़ने का फैसला किया.
तीसरे उम्मीदवार के लिए सपा की नजर कुछ तटस्थ और अन्य विपक्षी विधायकों पर भी थी. माना जा रहा था कि सुभासपा के सपा पृष्ठभूमि वाले विधायक, आरएलडी, अपना दल और सपा के कुछ बागी विधायकों के समर्थन से जरूरी आंकड़ा पूरा करने की कोशिश की जा सकती है. हालांकि इस रणनीति में क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक जोखिम की संभावना भी थी. ऐसे में सपा ने तीसरे प्रत्याशी को उतारने के बजाय अपने दो उम्मीदवारों की जीत पर फोकस करना बेहतर समझा.
अब 2027 की 403 सीटों पर नजर
राज्यसभा चुनाव में तीसरा उम्मीदवार न उतारने के फैसले के बाद सपा का राजनीतिक फोकस अब 2027 के विधानसभा चुनाव पर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है. अखिलेश यादव के बयान में भी इसका संकेत मिला है. 'तीन' के बजाय 'चार सौ तीन' पर निगाह होने का मतलब पार्टी का पूरा ध्यान उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर रखने की रणनीति से है. सपा अब राज्यसभा के जोड़-तोड़ से आगे बढ़कर 2027 की चुनावी तैयारी और जमीनी मजबूती पर ध्यान केंद्रित करेगी.
ADVERTISEMENT










