Swami Ram Vishal Das controversial statement: समाजवादी पार्टी की युवा सांसद इकरा हसन इन दिनों एक बार फिर सुर्खियों में हैं. साधारण पहनावा और तल्ख राजनीतिक बयानों के लिए जानी जाने वाली इकरा हसन इस बार अपनी किसी सियासी टिप्पणी नहीं बल्कि हिंदूवादी संगठनों के नेताओं द्वारा उन पर की गई अभद्र टिप्पणियों के कारण चर्चा में हैं. हाल ही में शामली की गौरी शंकर गौशाला से जुड़े स्वामी राम विशाल दास का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है. 31 जनवरी को आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने इकरा हसन को निशाना बनाते हुए बेहद अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया है.
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स्वामी राम विशाल दास ने कहा कि 'अगर वास्तव में आप गुर्जर समाज की बेटी हैं और भाईचारा निभाना चाहती हैं तो किसी गुर्जर नौजवान से शादी कर लें. इससे आप तीन तलाक और हलाला जैसी कुरीतियों से बच जाएंगी और आपको वोट मांगने भी नहीं जाना पड़ेगा.' इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. लोगों का कहना है कि एक महिला सांसद के व्यक्तिगत जीवन और धर्म को लेकर इस तरह की टिप्पणी करना न केवल असंवैधानिक है बल्कि महिला गरिमा के भी खिलाफ है.
इकरा हसन पर होने वाले हमलों के पीछे की वजह उनका खुद को गुर्जर समाज से जोड़ना बताया जाता है. 2024 के चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने खुद को गुर्जरों की बेटी बताकर वोट मांगे थे. हिंदूवादी संगठनों जैसे करणी सेना और अन्य स्थानीय समूहों का तर्क है कि यह केवल वोटों के ध्रुवीकरण की राजनीति है. इससे पहले करणी सेना के योगेंद्र राणा ने भी इकरा हसन को लेकर निकाह का विवादित प्रस्ताव दिया था जिस पर पुलिस ने एफआईआर भी दर्ज की थी.
कौन हैं इकरा हसन
विवादों के इतर इकरा हसन की पहचान संसद में एक प्रखर वक्ता के रूप में भी है. उनके पास एक मजबूत राजनीतिक पृष्ठभूमि है. उनके दादा, पिता (मुनव्वर हसन) और माता (तबस्सुम हसन) तीनों ही सांसद रह चुके हैं. उनके भाई नाहिद हसन तीन बार के विधायक हैं. इकरा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज से स्नातक किया और फिर लंदन से अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कानून में एमएससी (MSc) की डिग्री हासिल की. संसद में उन्होंने शिक्षा बजट और अल्पसंख्यकों के मुद्दों पर सरकार को मजबूती से घेरा है. खासकर मुगल इतिहास के साथ छेड़छाड़ के मुद्दे पर उनके भाषण ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं.
कैराना में वर्चस्व की वापसी
2024 के लोकसभा चुनाव में इकरा हसन ने भाजपा के प्रदीप चौधरी को लगभग 69,000 वोटों से हराकर अपनी मां की हार का बदला लिया. यह जीत उनके परिवार के लिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि पिछले कई चुनावों से भाजपा कैराना में पलायन के मुद्दे को लेकर उनके परिवार को निशाना बनाती रही थी.
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