Who is Rajan ji Maharaj: राजन तिवारी उर्फ राजन जी महाराज भजन और कथा वाचन के लिए जाने जाते हैं. लेकिन गोरखपुर में आयोजित कथा के दौरान कुछ ऐसा हुआ कि महाराज जी ने व्यासपीठ से ही तीखे तेवर अपना लिए. उन्होंने भरी सभा में चुनौती देते हुए कहा कि 'किसी ने माई का दूध पिया है तो गोली मार कर दिखाए.इस दौरान राजन जी महाराज ने आरोप लगाया कि उनके घर (गोरखपुर-देवरिया क्षेत्र) में ही उनकी टीम के साथ अभद्रता की गई और उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई. उन्होंने कहा कि 16 साल की कथा यात्रा में पहली बार उनके बच्चों को गोली मारने की बात कही गई जिसे वह बर्दाश्त नहीं करेंगे. महाराज ने खुलासा किया कि उन्हें खबर मिली है कि उनसे मिलवाने के नाम पर ₹1100 की अवैध वसूली की जा रही है. उन्होंने साफ किया कि वह मिलने का कोई पैसा नहीं लेते. उन्होंने कहा कि कथा प्रेम से सुनने की चीज है ना कि राजनीति और दबंगई दिखाने की. इस विवाद के बाद चर्चा में आए राजन जी महाराज कौन है आइए जानते हैं. साथ ही उनके थावाचक बनने की कहानी भी काफी दिलचस्प है.
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डॉक्टर से कथावाचक बनने तक का सफर
आज करोड़ों दिलों पर राज करने वाले राजन जी महाराज के कथावाचक बनने की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है.कोलकाता के स्कॉटिक्स चर्च कॉलेज (जहाँ विवेकानंद ने पढ़ाई की थी) से केमिस्ट्री में बीएससी करने वाले राजन तिवारी कभी डॉक्टर बनना चाहते थे. उन्होंने दोस्तों के साथ मिलकर रेलवे के ब्रेक शू बनाने वाली लोहे की फैक्ट्री भी चलाई. गायक बनने का सपना लेकर वह 2008 में मुंबई भी गए. मुंबई में एक सिंगिंग रियलिटी शो के टॉप-36 में चुने जाने के बाद जब वह अंतिम 12 से बाहर हुए तो अंधेरी रेलवे स्टेशन पर बैठकर खूब रोए थे. आज वह इसे रघुनाथ जी की कृपा मानते हैं.
सोशल मीडिया खूब वायरल होते हैं राजन महाराज
राजन जी महाराज के गाए सोहर और भजन आज हर घर में गूंजते हैं.उनका गीत 'राजा जी... जरूरत लड़ना हमार डीएम हो' न केवल सोहर के रूप में बल्कि वेब सीरीज तक में इस्तेमाल हुआ है.इंटरनेट की दुनिया में उनके गाए "मंगल भवन अमंगल हारी" का इस्तेमाल मीम्स में खूब किया जाता है जिससे वह युवाओं के बीच भी बेहद लोकप्रिय हैं.
गुरु से मिलन और राजन तिवारी का 'महाराज' बनना
राजन जी के भाई विनय के एक भोजपुरी कैसेट ने उनकी किस्मत बदल दी. वह कैसेट प्रसिद्ध संत प्रेम भूषण जी महाराज तक पहुंचा. जब प्रेम भूषण जी कोलकाता आए तब उनकी मुलाकात राजन तिवारी से हुई. गुरु ने उनके भीतर के छिपे कलाकार और भक्त को पहचाना और यहीं से राजन तिवारी के राजन जी महाराज बनने का सफर शुरू हुआ.
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