Ghuskhor Pandat Controversy: नेटफ्लिक्स पर आने वाली निर्देशक नीरज पांडे और अभिनेता मनोज बाजपेयी की नई फिल्म 'घूसखोर पंडित' रिलीज से पहले ही विवादों के घेरे में आ गई है. फिल्म के टाइटल और इसके टीजर में दिखाए गए किरदारों को लेकर ब्राह्मण समाज ने कड़ी आपत्ति जताई है. पूर्वांचल में इस फिल्म को लेकर माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया है और सोशल मीडिया पर इसे ब्राह्मण विरोधी बताया जा रहा है.
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क्या है विवाद की वजह?
फिल्म के टीजर में मनोज बाजपेयी एक पुलिस वाले (अजय दीक्षित) की भूमिका में हैं. नरेशन में उन्हें 'पंडित' नाम से संबोधित करते हुए 'घूसखोर' और 'लंगोट का ढीला' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है. विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि 'पंडित' शब्द श्रद्धा और विद्वता का प्रतीक है.उसे इस तरह नकारात्मक रूप में पेश करना पूरे समाज का अपमान है. फिल्म और यूजीसी जैसे मुद्दों को लेकर उत्तर प्रदेश का सियासी और सामाजिक पारा पहले से ही चढ़ा हुआ है. इसी बीच इलाहाबाद विश्वविद्यालय में दो गुटों के बीच जमकर मारपीट हुई. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्थिति इतनी बिगड़ गई कि डंडे और फरसे तक निकल आए. कैंपस में तनाव को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है.
बनारस के संतों और राजनीतिक दिग्गजों ने खोला मोर्चा
बनारस के महंतों ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि ब्राह्मण समाज पूजा=पाठ और दक्षिणा में संतुष्ट रहने वाला समाज है. उन्हें घूसखोर कहना उनकी छवि खराब करने की सोची-समझी साजिश है. वहीं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने इस विवाद को भाजपा की साजिश करार दिया. उन्होंने कहा कि सरकार पहले हिंदू-मुसलमान कर रही थी,अब जातियों में बांट रही है.भाजपा ने हमेशा ब्राह्मणों का अपमान किया है चाहे वो हत्याएं हों या संन्यासियों का अपमान.'
फिल्म के मेकर्स की चुप्पी और मांगें
विवाद बढ़ता देख फिल्म के मेकर्स नीरज पांडे और नेटफ्लिक्स की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है.इस बीच प्रदर्शनकारियों की दो प्रमुख मांगें हैं.पहली ये कि फिल्म का टाइटल तुरंत बदला जाए. दूसरा, ब्राह्मण समाज को अपमानित करने वाले संवादों को हटाया जाए.
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