Paramahansachary warning to Avimukteshwarananda: सनातन धर्म के दो बड़े चेहरों के बीच जुबानी जंग अब आर-पार की लड़ाई में बदल गई है. अयोध्या के तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंसाचार्य ने द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन्हें खुली चेतावनी दे डाली है.परमहंसाचार्य ने साफ लहजे में कहा है कि जब तक शंकराचार्य उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से माफी नहीं मांग लेते उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम की पावन नगरी अयोध्या में कदम नहीं रखने दिया जाएगा.
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परमहंसाचार्य की इस नाराजगी के पीछे शंकराचार्य का वह बयान है जिसमें उन्होंने कथित तौर पर सीएम योगी आदित्यनाथ की तुलना मुगल शासकों से कर दी थी. परमहंसाचार्य ने कहा कि 'सनातन के सूर्य योगी आदित्यनाथ के खिलाफ ऐसी अमर्यादित टिप्पणी निंदनीय है. जब तक वह क्षमा नहीं मांगते अयोध्या में उनकी एंट्री बैन रहेगी.'
गौ रक्षा आंदोलन पर भी उठाए सवाल
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद इन दिनों गाय को राजमाता का दर्जा दिलाने और गौ हत्या रोकने के लिए 40 दिनों का अल्टीमेटम दे चुके हैं. हालांकि परमहंसाचार्य ने इस आंदोलन को राजनीति से प्रेरित करार दिया है. उनका तर्क है कि केवल गाय नहीं पूरे गौवंश (बैल, बछड़ा, नंदी) को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाना चाहिए तभी पूर्ण गौ-रक्षा संभव है.
माघ मेले की वो झड़प और अधूरा स्नान
बता दें कि विवाद की शुरुआत प्रयागराज माघ मेले से हुई थी. मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य अपनी पालकी पर सवार होकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे. लेकिन प्रशासन ने उन्हें सुरक्षा कारणों से रोक दिया. आरोप है कि इस दौरान धक्का-मुक्की हुई और बटुओं की चोटी तक खींची गई. इस अपमान से आहत होकर शंकराचार्य बिना स्नान किए ही बनारस लौट आए और तब से वे लगातार प्रशासन और योगी सरकार पर हमलावर हैं.
वशीकरणवाले बयान को लेकर चर्चा में रहे हैं परमहंसाचार्य
यह पहली बार नहीं है जब परमहंसाचार्य ने कोई चौंकाने वाला बयान दिया हो. हाल ही में वे तब सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पीएम मोदी पर वशीकरण कर दिया था जिसे उन्होंने अपनी साधना से काटा. उन्होंने यह भी दावा किया था कि इसी वशीकरण की वजह से सरकार ने सवर्णों के खिलाफ कुछ नीतियां जैसे की यूजीसी नियमावली लागू की थीं.
क्या अब होगा टकराव?
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की तिथि पर भी सवाल उठा चुके हैं और अब तक अयोध्या नहीं गए हैं. अब देखना यह है कि क्या वे परमहंसाचार्य की चुनौती स्वीकार कर अयोध्या जाते हैं या फिर काशी-अयोध्या के बीच छिड़ा यह संत युद्ध कोई नया मोड़ लेता है.
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