बृजभूषण शरण सिंह और कालराज मिश्र की मुलाकात के बाद अब कुछ बड़ा होने वाला है? मिला ये हिंट

Brijbhushan and Kalraj Mishra meeting: बृजभूषण शरण सिंह और कालराज मिश्र की मुलाकात ने भाजपा के पुराने नेताओं के एकजुट होने के संकेत दिए हैं. इस मुलाकात में पुराने संबंधों और राजनीति की दिशा पर चर्चा हुई. 

कुमार अभिषेक

• 04:52 PM • 04 Feb 2026

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Brijbhushan and Kalraj Mishra meeting: उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक मुलाकात की सबसे ज्यादा चर्चा है. यह मुलाकात है पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह और भाजपा के दिग्गज नेता कालराज मिश्र की.दिल्ली में हुई इस भेंट का वीडियो खुद बृजभूषण शरण सिंह ने सोशल मीडिया पर साझा किया है. कहने को तो यह मुलाकात यूजीसी बिल पर रोक लगने के बाद एक-दूसरे को बधाई देने के लिए थी.लेकिन इसके पीछे की सियासी केमिस्ट्री कुछ और ही कहानी बयां कर रही है.

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यूजीसी बिल पर केंद्र सरकार को पीछे हटना पड़ा और अदालत ने इस पर रोक लगा दी. बृजभूषण शरण सिंह शुरू से ही इस बिल के खिलाफ मुखर रहे थे. लेकिन अब जब बिल रुक चुका है तो इसके विरोध में स्वर बुलंद करने वाले नेता एकजुट हो रहे हैं.कालराज मिश्र ने भी इस मुद्दे पर जो कड़ा रुख अपनाया और उसकी तारीफ करते हुए बृजभूषण ने कहा कि 'आपके बयान से देश का बहुत भला हुआ है वरना पूरा ताना-बाना बिगड़ जाता.'

कालराज मिश्र से मुलाकात के दौरान बृजभूषण शरण सिंह ने उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया. इस दौरान उन्होंने 1989 के उस दौर को याद किया जब कालराज मिश्र ने ही उन्हें राजनीति में पहला ब्रेक दिया था.
लांकि हालांकि वो चुनाव हार गए. लेकिन 91 और 96 में जो पार्लियामेंट के चुनाव हुए थे उसमें बृजभूषण शरण सिंह को भाजपा का टिकट कालराज मिश्र ने ही उन्हें दिलाया था.  यह बात उन्होंने खुद स्वीकारी है. 

ब्राह्मण-ठाकुर गठजोड़ और पुराने चेहरों की वापसी

सियासी गलियारों में चर्चा है कि यह मुलाकात सिर्फ दो नेताओं का मिलना भर नहीं है बल्कि यूपी में भाजपा के पुराने ब्राह्मण-ठाकुर केमिस्ट्री को फिर से जीवित करने की कोशिश है.कालराज मिश्र जहां ब्राह्मणों के बड़े चेहरे हैं.वहीं बृजभूषण की ठाकुर राजनीति में मजबूत पकड़ है. हैरानी की बात यह है कि सिर्फ बृजभूषण ही नहीं बल्कि हाशिए पर चल रहे अन्य पुराने दिग्गज भी अब सक्रिय हो रहे हैं.उमा भारती ने भी 2029 में झांसी से चुनाव लड़ने का ऐलान कर रखा है. विनय कटियार अयोध्या से 2029 के रण में उतरने की तैयारी में हैं. ऐसे में अब ये साफतौर पर देखा जा सकता है कि भाजपा का वह पुराना कोर जो कभी पार्टी की पहचान हुआ करता था और अब धीरे-धीरे रिटायरमेंट की ओर है. वह अब फिर से संगठित हो रहा है.

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