UP Political News: उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने पिछले कुछ दिनों से चल रही अपनी राजनीतिक दल-बदल की अटकलों पर पूरी तरह से चुप्पी तोड़ दी है. मुजफ्फरनगर के नसीरपुर गांव में एक शोक सभा के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि वे भारतीय जनता पार्टी का हिस्सा हैं और समाजवादी पार्टी में शामिल होने की खबरें महज अफवाह हैं.
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'कहने वालों का काम है कहना'
किसान नेता पूरन सिंह के पिता की 13वीं के अवसर पर आयोजित शोक सभा में पहुंचे बृजभूषण शरण सिंह ने अपने संबोधन में कहा:
- भाजपा से गहरा नाता: उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका परिवार दशकों से भाजपा से जुड़ा रहा है और वे खुद 6 बार सांसद रह चुके हैं.
- अटकलों का खंडन: सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में उनके सपा में जाने की चर्चाओं पर उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि लोगों का काम कहना है, लेकिन वे अभी भी भाजपा के ही समर्थक हैं.
- भविष्य की राजनीति: उन्होंने फिलहाल किसी भी तरह की राजनीतिक भविष्यवाणी से इनकार किया और कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में अभी बहुत समय बाकी है.
अखिलेश यादव का 'दबाव' वाला दावा
दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के हालिया बयानों ने इस विवाद को और हवा दी थी. अखिलेश यादव ने दावा किया था कि भाजपा के अंदर कई बड़े नेता भारी दबाव में हैं और वे भविष्य में PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) गठबंधन की ओर रुख करने का मन बना रहे हैं. राजनीतिक जानकार इसे भाजपा के भीतर पनप रहे संभावित असंतोष के संकेत के रूप में देख रहे थे.
क्या कहते हैं समीकरण?
बृजभूषण शरण सिंह जैसे वरिष्ठ नेता की राजनीतिक स्थिति में जरा सा भी बदलाव उत्तर प्रदेश के सियासी समीकरणों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है. हालांकि उन्होंने वर्तमान में भाजपा के साथ अपनी निष्ठा दोहराई है, लेकिन उनके "अभी राजनीति में समय बहुत है" वाले बयान ने विश्लेषकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है.
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