अमेठी की सदर सीट पर क्या राज्यसभा चुनाव में धोखा देने वाली विधायक को टिकट देंगे अखिलेश यादव?

रजत सिंह

• 01:04 PM • 06 Oct 2026

अमेठी सदर सीट पर 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज है. सपा से महाराजी प्रजापति की दावेदारी, भाजपा में अमिता सिंह और सांभवी सिंह के बीच टिकट की खींचतान और कांग्रेस-बसपा की दावेदारी ने मुकाबले को बहुकोणीय बना दिया है.

Amethi Sadar Assembly Seat

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उत्तर प्रदेश की चर्चित अमेठी सदर विधानसभा सीट पर आगामी चुनाव को लेकर राजनीतिक तापमान अभी से चढ़ने लगा है. 2024 के राज्यसभा चुनाव के दौरान बगावती रुख अपनाने के बावजूद समाजवादी पार्टी से वर्तमान विधायक महाराजी प्रजापति (देवी) का दावा फिर से मजबूत माना जा रहा है. दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी के भीतर अमेठी राजघराने की अंदरूनी कलह सतह पर आ गई है जहां पूर्व सांसद संजय सिंह की पत्नी अमिता सिंह और उनकी पहली पत्नी गरिमा सिंह की बहू सांभवी सिंह के बीच टिकट को लेकर खींचतान जारी है. इसके साथ ही 'इंडिया' गठबंधन के तहत कांग्रेस की दावेदारी और बहुजन समाज पार्टी की 'ब्राह्मण कार्ड' खेलने की तैयारी ने अमेठी सदर के मुकाबले को बहुकोणीय और दिलचस्प बना दिया है.

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सपा से महाराजी प्रजापति की दावेदारी मजबूत, लेकिन स्थानीय गुटबाजी बनी चुनौती

पूर्व कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रजापति की पत्नी और वर्तमान सपा विधायक महाराजी प्रजापति 2024 के राज्यसभा चुनाव के दौरान वोटिंग से दूर रहकर सुर्खियों में आई थीं. हालांकि पूजा पाल और अन्य बागी विधायकों के विपरीत सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने उन पर कड़ा रुख नहीं अपनाया और उनके पारिवारिक आयोजनों में शामिल होकर यह संदेश दिया कि वे अब भी पार्टी का हिस्सा हैं.

सहानुभूति और PDA गणित: गायत्री प्रजापति के जेल में होने से मिलने वाली सहानुभूति और सपा के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण में फिट बैठने के कारण उनका टिकट पक्का माना जा रहा है.

अंदरूनी विरोध: हालांकि स्थानीय स्तर पर सपा का एक बड़ा खेमा और जिलाध्यक्ष उनके कामकाज से असंतुष्ट हैं और उनसे दूरी बनाए हुए हैं. चर्चाएं यह भी हैं कि सपा से टिकट न मिलने की स्थिति में वे भाजपा का रुख भी कर सकती हैं.

अन्य दावेदार: सपा से वफादारी का हवाला देते हुए जय सिंह यादव और मनीराम वर्मा जैसे स्थानीय नेता भी टिकट की लाइन में खड़े हैं.

भाजपा में राजघराने की जंग: अमिता सिंह बनाम सांभवी सिंह

अमेठी में पारंपरिक रूप से चुनावी जंग 'प्रजापति बनाम राजघराना' की रही है. लेकिन इस बार भाजपा के अंदर ही राजपरिवार के दो धड़े आमने-सामने हैं.

संजय सिंह का खेमा: पूर्व सांसद संजय सिंह अपनी पत्नी रानी अमिता सिंह के लिए भाजपा से टिकट की पुरजोर पैरवी कर रहे हैं.

गरिमा सिंह का खेमा: पूर्व विधायक गरिमा सिंह अपनी बहू सांभवी सिंह को मैदान में उतारना चाहती हैं, जो क्षेत्र में लगातार जनसंपर्क कर रही हैं.

अन्य दावेदार: राजघराने की इस फाइट के इतर भाजपा जिलाध्यक्ष सुधांशु शुक्ला, अमित सिंह और राजेश अग्रहरी भी मजबूती से दावेदारी ठोक रहे हैं.

'इंडिया' गठबंधन में कांग्रेस का दावा और बसपा की ब्राह्मण रणनीति

अमेठी पारंपरिक रूप से कांग्रेस का गढ़ रहा है, इसलिए 'इंडिया' गठबंधन के तहत कांग्रेस सदर सीट पर अपना दावा ठोक सकती है. कांग्रेस की तरफ से नरेश मिश्रा (नरेंद्र मिश्रा) और शुभम सिंह प्रमुख दावेदार के रूप में सामने आ रहे हैं.

दूसरी ओर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की नजर इलाके के ब्राह्मण मतदाताओं पर है. बीएसपी किसी मजबूत ब्राह्मण चेहरे को प्रत्याशी बनाने की फिराक में है. जबकि संदीप पांडे बसपा के संभावित प्रत्याशी के रूप में अपनी दावेदारी पेश करते हुए क्षेत्र में सक्रिय हैं.

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