उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की कटरा बाजार विधानसभा सीट पर 2027 के चुनावों से पहले हलचल तेज हो गई है. यह सीट दशकों से भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता और 6 बार के विधायक बावन सिंह का गढ़ मानी जाती रही है जिन्होंने 2012, 2017 और 2022 में लगातार तीन बार जीत हासिल कर हैट्रिक लगाई है. वहीं दूसरी ओर समाजवादी पार्टी इस सीट पर लगातार ब्राह्मण प्रत्याशियों पर दांव आजमा रही है. हाल ही में बीजेपी छोड़कर सपा का दामन थामने वाले ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि भवानी भीख शुक्ला के आने से सपा के अंदर टिकट को लेकर त्रिकोणीय घमासान छिड़ गया है. जानिए क्या बावन सिंह चौथी बार बीजेपी से मैदान में उतरेंगे या सपा के तीन बड़े ब्राह्मण चेहरों में अखिलेश यादव किस पर दांव खेलेंगे.
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6 बार के विधायक बावन सिंह का दबदबा
बावन सिंह का राजनीतिक प्रभाव: बावन सिंह कटरा बाजार से 6 बार विधायक रह चुके हैं. 2012 में जब पूरे प्रदेश में सपा की लहर थी, तब भी उन्होंने यहां से जीत दर्ज की थी. उनके पिता भी यहां से दो बार विधायक रहे थे, जिससे इस क्षेत्र में उनके परिवार का व्यापक जनाधार है.
संभावित चुनौती: जहां एक तरफ बावन सिंह बीजेपी से सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर एंटी-इंकंबेंसी और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के करीबी माने जाने वाले सुनील सिंह जैसे नए चेहरों की दावेदारी से भी चर्चाएं गरमा गई हैं.
समाजवादी पार्टी में घमासान: 3 बड़े ब्राह्मण चेहरों के बीच टिकट की जंग
भवानी भीख शुक्ला: कटरा बाजार ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि भवानी भीख शुक्ला हाल ही में अपने समर्थकों के साथ बीजेपी छोड़ सपा में शामिल हुए हैं. अखिलेश यादव द्वारा उन्हें पार्टी में शामिल कराए जाने के बाद से ही कटरा बाजार से उनके चुनाव लड़ने की प्रबल संभावना जताई जा रही है.
बैजनाथ दुबे: पूर्व विधायक बैजनाथ दुबे सपा के दो बार विधायक रह चुके हैं और 2022 का चुनाव बेहद कम अंतर से हारे थे. पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा और मजबूत जनाधार के कारण उनका दावा भी बेहद मजबूत है.
विनोद कुमार शुक्ला: बसपा से सपा में आए कद्दावर नेता विनोद कुमार शुक्ला भी टिकट की रेस में अपनी दावेदारी मजबूती से पेश कर रहे हैं.
कटरा बाजार का मुख्य सियासी मुकाबला
2002 के बाद से इस सीट पर मुख्य मुकाबला मुख्य रूप से बीजेपी के बावन सिंह और सपा के बैजनाथ दुबे के बीच ही देखने को मिला है. सपा के भीतर भवानी भीख शुक्ला, बैजनाथ दुबे और विनोद शुक्ला के बीच अंदरूनी खींचतान को सुलझाना अखिलेश यादव के लिए एक बड़ी चुनौती होगा. जबकि बीजेपी को अपनी सीट बरकरार रखने के लिए मजबूत रणनीति अपनानी होगी.
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