गोरखपुर से हार के बावजूद अखिलेश यादव के खास बने 'संजयन त्रिपाठी', गदगद होकर बोले- 'पूरा जीवन सपा प्रमुख को समर्पित'

रजत सिंह

31 Oct 2026 (अपडेटेड: 31 Oct 2026, 12:46 PM)

UP MLC Election: यूपी विधान परिषद चुनाव में हार के बावजूद गोरखपुर से सपा प्रत्याशी रहे संजय त्रिपाठी को अखिलेश यादव ने पूरा सम्मान दिया है. इससे भावुक होकर संजयन त्रिपाठी ने अपना तन, मन, धन और पूरा जीवन अखिलेश यादव को समर्पित करने का ऐलान किया है.

Akhilesh Yadav and Sanjay Tripathi

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UP MLC Election: उत्तर प्रदेश में विधान परिषद (शिक्षक-स्नातक) चुनाव के परिणाम सामने आ गए हैं. इस चुनाव में सपा की स्थिति मजबूत दिखी है. समाजवादी पार्टी ने इस बार शानदार प्रदर्शन किया है और 3 सीटों से बढ़ाकर 5 सीटें अपने नाम कर ली हैं. हालांकि बीजेपी ने 2020 में 6 सीटें जीती थीं, और इस बार भी उसके खाते में 6 ही सीटें आई हैं. वहीं अखिलेश यादव ने MLC चुनाव में अपने शानदार परफॉर्मेंस के बाद सभी उम्मीदवारों को एक मंच पर बुलाया. सपा की इस बैठक का एक वीडियो खूब सुर्खियों में है. यह वीडियो गोरखपुर से सपा प्रत्याशी रहे संजयन त्रिपाठी का है. बता दें, संजयन त्रिपाठी चुनाव हारे हैं. वह हार के बावजूद पार्टी से मिले सम्मान से गदगद है उन्होंने अब अपना पूरा जीवन अखिलेश यादव को समर्पित करने का ऐलान कर दिया है. वहीं अखिलेश यादव ने भी इस मौके पर गोरखपुर की पुरानी 'हाता बनाम भाता' की राजनीति को हवा देते हुए बीजेपी पर तीखा हमला बोला है, और कहा कि सपा जनता के बल पर चुनाव जीती है और बीजेपी ने अपनी सीटें छल से बचाई हैं.

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संजयन त्रिपाठी का भावुक बयान

एमएलसी चुनाव में हारने और जीतने वाले सभी प्रत्याशियों को अखिलेश यादव ने मंच पर बुलाया था. इस दौरान गोरखपुर से चुनाव हारने वाले संजयन त्रिपाठी काफी भावुक नजर आए. उन्होंने मंच से कहा, 'मैं इकलौता दुर्भाग्यशाली हूं जो यहां जीत कर नहीं आया, लेकिन मैं अखिलेश यादव का आभार जताता हूं कि उन्होंने मुझ पर विश्वास किया है. मैं गोरखपुर से लड़ रहा था और सीधे सूबे के सबसे ताकतवर व्यक्ति के निशाने पर था. जिस दिन मैंने बीजेपी छोड़कर सपा का दामन थामा था, तभी तय कर लिया गया था कि मुझे जीतने नहीं देना है.'

अखिलेश को सौंपा अपना जीवन

संजयन त्रिपाठी ने चुनाव में प्रशासन और बीजेपी पर फर्जी वोट बढ़ाने और डराने-धमकाने का आरोप भी लगाया है. उन्होंने कहा है कि, 'पूरी प्रशासनिक मशीनरी का इस्तेमाल करके शिक्षकों और प्रबंधकों को डराया गया था. इसके बावजूद मुझे 9500 वोट मिले, जिसे मैं अपनी उपलब्धि मानता हूं.' इसके बाद उन्होंने भावुक होकर कहा है कि, 'अखिलेश जी ने मुझे जितना सम्मान दिया है, उसकी मैंने कल्पना भी नहीं की थी. अब मैं अपना तन, मन, धन और पूरा जीवन उन्हें समर्पित करता हूं. मेरा लक्ष्य 2027 में अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री के तौर पर देखना है.'

अखिलेश बोले- 'इन्हें हाता नहीं भाता'

संजयन त्रिपाठी के इस बयान के बाद अखिलेश यादव ने भी बीजेपी पर करारा प्रहार किया. उन्होंने गोरखपुर की ब्राह्मण बनाम ठाकुर राजनीति का जिक्र करते हुए कहा है कि, 'इन्हें 'हाता नहीं भाता' (यह शब्द अखिलेश यादव गोरखपुर में योगी आदित्यनाथ की सरकार पर तंज की तरह इस्तेमाल करते हैं). उन्होंने आगे कहा कि अपनी सीट बचाने और संजय त्रिपाठी को हराने के चक्कर में इन्होंने बीजेपी का काम तमाम करा दिया है.' अखिलेश यादव ने आगे कहा कि भले ही सपा 5 सीटें जीती है लेकिन बीजेपी इस चुनाव में 50 जिलों में हारी है. उन्होंने वाराणसी सीट पर हुए हंगामे को लेकर भी बीजेपी पर तंज कसा और कहा कि बीजेपी ने रातभर जो संघर्ष किया उससे उन्होंने अपनी बदनामी कराई है. इतना ही नहीं अखिलेश यादव ने कहा समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार जनता के बल पर जीते हैं, जबकि बीजेपी अपनी छह सीटें छल और बेईमानी से जीती है.

ब्राह्मणों को साधने की कोशिश में सपा?

संजयन त्रिपाठी चुनाव हार गए हैं, फिर भी अखिलेश यादव उन्हें पार्टी में बहुत सम्मान देते हुए दिख रहे हैं. अब इस पूरे घटनाक्रम को अखिलेश यादव की ब्राह्मण वोट बैंक को साधने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है. पूर्वांचल में खासकर प्रयागराज से लेकर गोरखपुर, बस्ती और देवरिया तक, ब्राह्मण वोटर चुनाव में अहम भूमिका निभाते हैं. माना जा रहा है कि हार के बाद भी संजय त्रिपाठी को इतना सम्मान देकर सपा 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए ब्राह्मणों को अपने पाले में लाने की बड़ी कोशिश कर रही है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या 2027 में यूपी का ब्राह्मण वोटर सत्ता बदलने में अखिलेश यादव का साथ देगा या फिर से बीजेपी के साथ ही खड़ा रहेगा.

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