महराजगंज की सिसवा सीट पर BJP या सपा कौन पड़ रहा भारी? समझिए पूरा समीकरण

रजत सिंह

• 01:55 PM • 06 Oct 2026

महराजगंज की सिसवा विधानसभा सीट पर 2027 के चुनाव को लेकर सरगर्मी तेज है. जानिए सिसवा का सियासी इतिहास, जातीय समीकरण, बीजेपी-सपा के दावे और स्थानीय पत्रकारों की राय.

Akhilesh Yadav and CM Yogi

Akhilesh Yadav and CM Yogi

Google CTA

नेपाल और बिहार की सीमा से सटी महराजगंज की सिसवा विधानसभा सीट अपनी भौगोलिक स्थिति के साथ-साथ दिलचस्प सियासी इतिहास के लिए जानी जाती है. पिछले छह दशकों में दल और उम्मीदवार बदलते रहे. लेकिन 'स्टेट परिवार' का प्रभाव यहां की राजनीति के केंद्र में रहा. 1993 में पहली बार खिलने के बाद सिसवा धीरे-धीरे बीजेपी का मजबूत गढ़ बन गया और वर्तमान में बीजेपी के प्रेमसागर पटेल लगातार दूसरी बार यहां से विधायक हैं. अब सवाल यह है कि क्या 2027 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी अपनी हैट्रिक बनाएगी या सपा बाजी मारेगी? आइए समझते हैं सिसवा के जमीनी हालात, जातीय समीकरण और स्थानीय पत्रकारों की राय.

यह भी पढ़ें...

कभी व्यापारिक केंद्र था सिसवा, जानिए सियासी सफरनामा

सिसवा को कभी पूर्वांचल के बड़े व्यापारिक केंद्रों में गिना जाता था. हालांकि समय के साथ यह पहचान थोड़ी फीकी पड़ी. लेकिन इसकी राजनीतिक विरासत आज भी बरकरार है.

1993 से पहले: कांग्रेस और जनता दल का प्रभाव रहा.

2002: बीजेपी के शिवेंद्र सिंह उर्फ शिवू बाबू ने जीत दर्ज की.

2007: बीजेपी जीती, लेकिन चेहरा बदला और महंत दुबे विधायक बने.

2012: शिवेंद्र सिंह ने सिंबल बदलकर समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीत हासिल की.

2017: बीजेपी के प्रेमसागर पटेल ने सपा के शिवेंद्र सिंह को 68,186 वोटों के बड़े अंतर से हराया.

2022: प्रेमसागर पटेल ने दोबारा बीजेपी के टिकट पर जीत दर्ज की और सपा के सुशील कुमार तिबड़ेवाल को लगभग 62,000 वोटों से शिकस्त दी.

बीजेपी का विकास का दावा बनाम सपा के आरोप

बीजेपी (विधायक प्रेमसागर पटेल) का पक्ष

विकास कार्य: 10 वर्षों में राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेज, आवासीय विद्यालय, पावर हाउस और 148 साल पुरानी सिसवा को नगर पालिका का दर्जा दिलवाया.

बिजली व परिवहन: क्षेत्रों में 18 से 22 घंटे बिजली आपूर्ति का दावा. ठूठीबारी से लखनऊ-दिल्ली तक एसी बस सेवा और निचलौल में 100 करोड़ से अधिक की लागत से ट्रांसपोर्ट डिपो, रेस्तरां व मॉल निर्माण की मंजूरी.

पंचायत फैसले: योगी सरकार द्वारा प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने के ऐतिहासिक फैसले की सराहना.

समाजवादी पार्टी के आरोप

2022 के हथकंडे: सपा नेताओं का आरोप है कि चुनाव से दो दिन पहले महिलाओं के खातों में ई-श्रम कार्ड के तहत ₹1,000 भेजकर चुनाव का रुख मोड़ा गया.

महंगाई और भ्रष्टाचार: डीजल, पेट्रोल, गैस और खाद की किल्लत/महंगाई और प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने का मुद्दा उठाते हुए बीजेपी पर भ्रष्टाचार का आरोप.

क्या कहते हैं स्थानीय पत्रकार? 

स्थानीय पत्रकारों के अनुसार, महराजगंज की 5 सीटों में सिसवा सबसे 'हॉट सीट' और पॉलिटिकल बैटलग्राउंड बनी हुई है.

बीजेपी की स्थिति: प्रेमसागर पटेल की शीर्ष नेतृत्व में मजबूत पकड़ मानी जाती है. क्षेत्र का व्यापारी वर्ग और ग्रामीण इलाका पारंपरिक रूप से बीजेपी समर्थक माना जाता है.

सपा की रणनीति: सपा के विभिन्न गुट और पूर्व मंत्री इस बार एकजुट होकर फील्डिंग कर रहे हैं.

कांटे की टक्कर: मुकाबला मुख्य रूप से बीजेपी और सपा के बीच ही रहने के आसार हैं. हालांकि अंतिम तस्वीर प्रत्याशियों के आधिकारिक ऐलान के बाद ही साफ होगी.
 

ये भी पढ़ें: यूपी के राज्यसभा चुनाव में तीसरा प्रत्याशी न उतारने के पीछे की अखिलेश यादव ने बताई वजह