कौन हैं भाजपा MLA बृजभूषण राजपूत जिन्होंने 100 ग्राम प्रधानों के साथ रोका अपने ही सरकार के कद्दावर मंत्री का रास्ता?

UP News: महोबा में भाजपा विधायक ने रोका मंत्री का रास्ता. अयोध्या में केशव मौर्य के सामने भिड़े दो दिग्गज नेता. इटावा में अवैध मजार पर प्रशासन का शिकंजा. जानिए यूपी की 3 बड़ी खबरें.

BJP MLA Brijbhushan Rajpoot

कुमार अभिषेक

31 Jan 2026 (अपडेटेड: 31 Jan 2026, 09:09 AM)

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यूपी Tak का स्पेशल शो 'आज का यूपी' राज्य की राजनीतिक और सामाजिक हलचल का सबसे सटीक विश्लेषण पेश करता है.  इस शो में हम राज्य की तीन बड़ी खबरों का गहराई से विश्लेषण करते हैं. आज के अंक में पहली बड़ी खबर भाजपा के भीतर मचे उस घमासान की है, जहां एक विधायक ने अपनी ही सरकार के कद्दावर मंत्री का रास्ता रोककर अपनी ताकत दिखाई. दूसरी खबर अयोध्या से है जहां डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की मौजूदगी में भाजपा के दो बड़े नेता आपस में भिड़ गए और मंच पर हाथापाई की नौबत आ गई. वहीं, तीसरी खबर इटावा से है जहां सपा प्रमुख अखिलेश यादव के गढ़ में अब वन विभाग की जमीन पर बनी एक मजार प्रशासन के निशाने पर आ गई है. 

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भाजपा में आंतरिक कलह! जब विधायक ने रोका कद्दावर मंत्री का रास्ता

महोबा के चरखारी में शुक्रवार को एक हैरतअंगेज नजारा देखने को मिला. भाजपा के ही विधायक बृजभूषण राजपूत ने अपनी ही सरकार के दिग्गज मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का काफिला रोक लिया. विधायक अपने साथ करीब 100 ग्राम प्रधानों को लेकर पहुंचे थे और उनकी नाराजगी जल जीवन मिशन व नमामि गंगे योजना को लेकर थी. 

विधायक का आरोप है कि पिछले 6 सालों में न तो घरों तक पानी पहुंचा है और न ही सड़कें दुरुस्त हुई हैं, उल्टे पाइपलाइन बिछाने के नाम पर सड़कों को खोदकर छोड़ दिया गया है. मौके पर काफी हंगामा हुआ और मंत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि वे खुद मौके पर जाकर निरीक्षण करेंगे और अगर लापरवाही मिली तो अधिकारियों को तत्काल सस्पेंड करेंगे. बाद में विधायक और मंत्री एक ही गाड़ी में बैठकर डीएम कार्यालय पहुंचे, जहां लंबी बैठक हुई. विधायक बृजभूषण राजपूत ने अब 20 दिन का अल्टीमेटम दिया है. 

कौन हैं बृजभूषण राजपूत?

यूपी विधानसभा की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, चरखारी (महोबा) से भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत का जन्म 28 मई, 1982 को जालौन के उरई में हुआ था. वह एक प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उनके पिता श्री गंगा चरण राजपूत तीन बार लोकसभा सांसद (1989, 1996, 1998) और राज्यसभा सांसद (2009) रह चुके हैं. बृजभूषण राजपूत उच्च शिक्षित हैं, उन्होंने स्नातकोत्तर के साथ ऑस्ट्रेलिया की मदर टेरेसा यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है. व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो उनका विवाह 9 मई, 2005 को कनक लोधी के साथ हुआ और उनके दो बेटे हैं. 

उनका राजनीतिक सफर काफी सक्रिय रहा है, जहां वे वर्ष 2017 में पहली बार सत्रहवीं विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए. इस दौरान उन्होंने विधान पुस्तकालय परामर्शदात्री समिति के सदस्य के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं. इसके बाद वह मार्च 2022 में लगातार दूसरी बार 18वीं विधानसभा के लिए विधायक चुने गए. राजनीति के अलावा वह कृषि और व्यापार (स्वराज ट्रैक्टर डीलर) से भी जुड़े हुए हैं और उनका मुख्य आवास महोबा के चरखारी स्थित 'ओल्ड पैलेस' में है. 

बृजभूषण राजपूत बुंदेलखंड के मुद्दों पर मुखर रहने के लिए जाना जाता है. वह 'बुन्देलखण्ड अधिकार क्षेत्र' के सेना प्रमुख के रूप में 2011 से ही राजनैतिक आंदोलनों में सक्रिय रहे हैं, जिसके लिए उन्हें लखनऊ में 18 दिनों तक बंदी भी रहना पड़ा था. उन्होंने बुंदेलखंड को 24 घंटे बिजली-पानी की आपूर्ति और पृथक बुंदेलखंड राज्य निर्माण की मांग को लेकर चक्का जाम और आमरण अनशन जैसे कड़े कदम भी उठाए हैं. गौसेवा, खेल, संगीत और समाज सेवा में उनकी विशेष रुचि है. 

अयोध्या में मंच पर भिड़े भाजपा नेता: डिप्टी सीएम के सामने हाथापाई

अयोध्या से एक और चौंकाने वाली खबर सामने आई है. पूर्व विधायक खब्बू तिवारी की माताजी को श्रद्धांजलि देने पहुंचे डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के सामने ही पार्टी के दो नेता आपस में भिड़ गए। मंच पर मौजूद सच्चिदानंद पांडे और भाजपा के जिला अध्यक्ष संजीव सिंह के बीच धक्का-मुक्की हुई. 

वीडियो में साफ दिख रहा है कि नेता एक-दूसरे को हाथ खींचकर पीछे करने की कोशिश कर रहे हैं. यह विवाद मंच पर नेता के पास खड़े होने की होड़ को लेकर शुरू हुआ. अयोध्या की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनावों और आगामी पंचायत चुनावों को लेकर बढ़ती इस खींचतान ने पार्टी के भीतर अनुशासन पर सवाल खड़े कर दिए हैं. 

इटावा में मजार पर 'बुलडोजर' की आहट! प्रशासन ने थमाया नोटिस

अखिलेश यादव के संसदीय क्षेत्र इटावा में अब एक मजार को लेकर कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है. इटावा लायन सफारी से महज 3 किलोमीटर दूर बीहड़ में स्थित 'बीहड़ वाले सैयद बाबा की मजार' को अवैध अतिक्रमण माना जा रहा है. प्रशासन का दावा है कि यह मजार वन विभाग की जमीन पर अवैध रूप से बनाई गई है. 

मजार कमेटी को नोटिस चस्पा कर दिया गया था, जिसकी समय सीमा 22 जनवरी को समाप्त हो गई. कमेटी ने स्वीकार किया है कि उनके पास मजार की जमीन के कोई वैध दस्तावेज नहीं हैं. उधर, लखनऊ के KGMC (केजीएमयू) में भी करीब दर्जन भर मजारों को हटाने का नोटिस दिया गया है, जिस पर अब मुस्लिम संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट तक जाने की चेतावनी दी है. 

यहां देखें वीडियो रिपोर्ट

 

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