बिना स्नान किए माघ मेले से नाराज होकर लौटे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद तो क्यों हंसने लगे ओम प्रकाश राजभर?

OP Rajbhar: उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने माघ मेले से बिना स्नान किए लौटे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर तीखा तंज कसा है. राजभर ने चुटकी लेते हुए कहा कि महाराज वहां रोज नहाते थे.बिना स्नान के साधु कैसे रह सकता है?

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यूपी तक

30 Jan 2026 (अपडेटेड: 30 Jan 2026, 04:57 PM)

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OP Rajbhar: माघ मेले से बिना स्नान किए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद वापस लौट चुके हैं. इसे लेकर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा था कि उनके साथ जो कुछ भी हुआ वो अच्छा नहीं हुआ है. वहीं इस मामले को लेकर सियासी गलियारों में भी काफी रिएक्शन देखने को मिला.  लेकिन अब इस पूरे मामले पर कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर का एक बार फिर से बड़ा बयान सामने आया है. राजभर ने इस मामले पर चुटकी लेते हुए शंकराचार्य के धरने को वीआईपी कल्चर से जोड़ा. साथ ही  यूजीसी नियमों के विरोध में इस्तीफा देने वाले मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री पर भी सवाल खड़ा किया है.

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रोज नहाते थे शंकराचार्य

जब राजभर से पूछा गया कि शंकराचार्य बिना संगम स्नान किए वापस लौट गए  उन्होंने अपने हुए कहा कि 'अरे महाराज,वह वहां रोज नहाते थे. भला कोई साधु इतने दिनों तक बिना स्नान किए कैसे रह सकता है?' जब उनसे संगम में डुबकी न लगाने पर सवाल हुआ तो उन्होंने मुहावरे का सहारा लेते हुए कहा कि 'मन चंगा तो कठौती में गंगा.' यह पहली बार नहीं है जब राजभर ने इस मुद्दे पर हमला बोला हो. इससे पहले भी उन्होंने कहा था कि एक तरफ देश से वीवीआईपी कल्चर खत्म करने की बात होती है.वहीं दूसरी तरफ वीआईपी स्नान के लिए अनशन किया जा रहा है.

मजिस्ट्रेट के इस्तीफे को बताया नेतागिरी

बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री द्वारा यूजीसी नियमों के विरोध और शंकराचार्य को लगी ठेस को आधार बनाकर दिए गए इस्तीफे पर भी राजभर ने कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि नौकरी से इस्तीफा देने के लिए पारिवारिक कारण या बीमारी का आधार होना चाहिए. किसी आंदोलन के समर्थन में इस्तीफा देना नेतागिरी है. राजभर ने स्पष्ट किया कि इसी कारण उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ है और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा रही है.

हाईकोर्ट पहुंचा मौनी अमावस्या विवाद

एक तरफ राजनीतिक बयानबाजी जारी है तो दूसरी तरफ शंकराचार्य के शिष्यों के साथ हुई कथित मारपीट का मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है. अधिवक्ता ने एक लेटर पिटीशन दाखिल कर 3 मांगें रखी हैं.

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