Mood kya hai Azamgarh: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल अभी से गर्माने लगा है. 2022 के चुनाव में जिले की सभी 10 विधानसभा सीटों पर एकतरफा परचम लहराने वाली समाजवादी पार्टी (सपा) के लिए आगामी राह इतनी आसान नजर नहीं आ रही है. जिले के वरिष्ठ पत्रकारों और ग्राउंड रिपोर्टर्स के बीच हुई खास चर्चा के अनुसार, इस बार आजमगढ़ में जातिगत और धार्मिक समीकरणों के साथ-साथ विकास, विधायक निधि का सदुपयोग और जनप्रतिनिधियों के प्रति जन-आक्रोश बड़ा मुद्दा बनने जा रहा है. पत्रकारों का मानना है कि यदि सपा ने समय रहते अपनी रणनीति और निष्क्रिय विधायकों के टिकट नहीं बदले तो भाजपा और एनडीए गठबंधन यहां सपा के 'अजेय दुर्ग' में बड़ी सेंध लगा सकते हैं.
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सपा का 'यादव लैंड' दुर्ग और MY फैक्टर की चुनौती
चर्चा के दौरान वरिष्ठ पत्रकारों ने बताया कि आजमगढ़ को लंबे समय से समाजवादी पार्टी का गढ़ और 'यादव लैंड' माना जाता रहा है. 2022 के चुनाव में भी एमवाई (मुस्लिम-यादव) समीकरण और पारंपरिक वोट बैंक के बल पर सपा ने सभी 10 सीटों पर क्लीन स्वीप किया था. पत्रकारों के अनुसार, यदि इस बार भी चुनाव केवल पारंपरिक जातिगत और धार्मिक समीकरणों पर लड़ा गया तो पलड़ा सपा के पक्ष में झुक सकता है. हालांकि भारतीय जनता पार्टी द्वारा कुछ सीटों पर यादव उम्मीदवार उतारने और एमवाई वोट बैंक में सेंधमारी की योजना से सपा के लिए मुकाबला कड़ा हो सकता है.
सपा के लिए 3 से 4 सीटों पर खतरे की घंटी
ग्राउंड रिपोर्टिंग के आधार पर पत्रकारों ने खुलासा किया कि जिले की कम से कम तीन से चार सीटों पर मौजूदा सपा विधायकों के प्रति जनता में जबरदस्त गुस्सा है.
सगड़ी, मेहनगर और दीदारगंज: इन क्षेत्रों में जनता की मुख्य शिकायत यह है कि विधायक जीतने के बाद क्षेत्र में दिखाई नहीं दिए और विधायक निधि का सही इस्तेमाल नाली, खड़ंजे और छोटी सड़कों जैसे बुनियादी कामों के लिए भी नहीं किया गया.
अतरौलिया सीट पर बदलाव की हवा: अतरौलिया विधानसभा में भी जनता परिवर्तन का मन बना रही है. सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर का बढ़ता प्रभाव और राजभर वोट बैंक का एकतरफा ध्रुवीकरण यहां सपा के लिए बड़ी चुनौती खड़ा कर रहा है.
बीजेपी का 'मास्टरस्ट्रोक'
पत्रकारों ने इस बात को स्वीकार किया कि आजमगढ़ में एक भी विधायक न होने के बावजूद योगी सरकार ने विकास के कई बड़े प्रोजेक्ट दिए हैं असर अब जमीन पर दिख रहा है.
महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय: शिक्षा के क्षेत्र में इस विश्वविद्यालय की स्थापना को पत्रकार एक मील का पत्थर मान रहे हैं.
अन्य परियोजनाएं: अटल आवासीय विद्यालय, संगीत महाविद्यालय और अतरौला मार्ग जैसी प्रमुख सड़कों के निर्माण से बीजेपी ने जनता के बीच एक सकारात्मक संदेश दिया है.
अपराध नियंत्रण और कल्याणकारी योजनाएं: अपराध पर लगाम, मुफ्त राशन, पीएम आवास योजना और 5 लाख रुपये के आयुष्मान कार्ड का लाभ पाने वाले लाभार्थी वर्ग (खासकर मुस्लिम और पिछड़ा वर्ग) में बीजेपी के प्रति झुकाव देखने को मिल रहा है.
जाति से ऊपर उठकर विकास ढूंढ रही युवा पीढ़ी
चर्चा का सबसे अहम निष्कर्ष यह निकला कि आजमगढ़ की युवा पीढ़ी अब सिर्फ जाति या धर्म के नाम पर वोट देने को तैयार नहीं है. युवाओं का पूरा फोकस विकास, रोजगार, बेहतर जल-निकासी (ड्रेनेज) और बुनियादी सुविधाओं पर है. अगर सपा जातिगत राजनीति के भरोसे रहकर निष्क्रिय विधायकों पर ही दांव लगाती है तो युवाओं का यह रुख बीजेपी के पक्ष में जा सकता है.
आजमगढ़ के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 का चुनाव 50-50 के कड़े मुकाबले में बदल सकता है. सपा को अपना गढ़ बचाने के लिए सर्वे के आधार पर निष्क्रिय विधायकों के टिकट काटने होंगे. वहीं भाजपा विकास और लाभार्थी वर्ग के सहारे आजमगढ़ में अपनी हैट्रिक बनाने की कोशिश करेगी.
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