यूपी Tak के खास शो 'आज का यूपी' में आज हम राज्य की तीन बड़ी खबरों का गहन विश्लेषण कर रहे हैं.आज की पहली बड़ी खबर उत्तर प्रदेश की 10 सीटों पर होने वाले राज्यसभा चुनाव के ऐलान से जुड़ी है जहां इस बार तीसरी सीट जीतने के लिए समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच कांटे की टक्कर होने वाली है. दूसरी बड़ी खबर राज्यसभा चुनाव के उस जमीनी वोट-गणित पर आधारित है जिसमें हाल के दिनों में विधायकों के देहांत से बीजेपी को हुए नुकसान और ओम प्रकाश राजभर व आरएलडी के विधायकों पर अखिलेश यादव की पैनी नजर की रणनीति को समझाया गया है. वहीं तीसरी बड़ी खबर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट शेयरिंग को लेकर छिड़ी रार पर शिवपाल यादव के उस बयान को लेकर है जिसमें उन्होंने स्थानीय नेताओं की बयानबाजी को दरकिनार करते हुए फैसला शीर्ष नेतृत्व पर छोड़ दिया है.
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क्या इस बार बीजेपी को पटकनी दे पाएंगे अखिलेश यादव?
उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनाव की घोषणा होते ही राज्य में सियासी पारा चढ़ गया है. पिछले चुनाव में बीजेपी ने समाजवादी पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष रहे संजय सेठ को मैदान में उतारकर और सपा में सेंधमारी (क्रॉस वोटिंग) कराकर 8वीं सीट जीत ली थी. लेकिन इस बार स्थितियां बदली हुई हैं.
सपा का उम्मीदवार फॉर्मूला
समाजवादी पार्टी इस बार तीन प्रत्याशियों को उतारने की तैयारी में है. माना जा रहा है कि एक सीट पर प्रोफेसर रामगोपाल यादव, दूसरी सीट पर कोई बड़ा मुस्लिम चेहरा और तीसरी सीट पर किसी दलित या पिछड़े (OBC) नेता को मौका दिया जा सकता है.
इस बार अखिलेश यादव किसी भी कीमत पर अपनी तीसरी सीट खोना नहीं चाहते. सपा न केवल अपने विधायकों को एकजुट रखने में जुटी है बल्कि एनडीए कुनबे के असंतुष्ट विधायकों पर भी अपनी नजरें गड़ाए हुए है.
राज्यसभा का नया समीकरण
विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों की बात करें तो 403 सदस्यों वाली यूपी विधानसभा में फिलहाल 397 विधायक हैं. कई विधायकों के निधन के कारण इस बार सातवीं और आठवीं सीट का समीकरण काफी दिलचस्प हो गया है.
पिछले एक साल में बीजेपी के दो विधायकों (अनिल शर्मा और श्याम बिहारी लाल) का देहांत हुआ है. इसके अलावा सपा के सुधाकर सिंह और बसपा के उमाशंकर सिंह का भी निधन हुआ है. इससे बीजेपी के कोटे के वो तीन वोट कम हो गए हैं जो पिछली बार उसे मिले थे.
ओम प्रकाश राजभर की पार्टी (सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी) के 6 में से कई विधायक सपा के करीबी माने जाते हैं. अब्बास अंसारी जेल से बाहर हैं और उनका वोट सपा को जाना तय माना जा रहा है. इसके अलावा जाफराबाद विधायक जगदीश नारायण राय और आरएलडी के मुस्लिम विधायकों पर भी सपा की नजरें टिकी हैं, जिससे तीसरी सीट पर सपा को बढ़त मिलने की संभावना जताई जा रही है.
इमरान मसूद के बयान पर शिवपाल यादव का जवाब
पिछले कुछ दिनों से समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन और सीट शेयरिंग को लेकर बयानबाजी तेज है. कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने बयान दिया था कि राहुल गांधी के नेतृत्व के बिना चुनाव जीतना संभव नहीं है और सीट शेयरिंग पर जल्द फैसला होना चाहिए. इस पर सपा सांसद इकरा हसन ने भी प्रतिक्रिया दी थी.
जब इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव से सवाल पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बड़बोले नेताओं के बयानों की कोई अहमियत नहीं है. शिवपाल यादव ने कहा कि सपा और कांग्रेस का 'इंडिया गठबंधन' बरकरार है. सीटों के बंटवारे पर अंतिम फैसला कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष (अखिलेश यादव) मिलकर करेंगे. पीछे से बोलने वाले नेताओं की बातें गठबंधन के फैसले को प्रभावित नहीं करेंगी.
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