बिजनौर का सियासी समीकरण: 1445 वोटों से तय हुई थी जीत, 2027 में बीजेपी और सपा के बीच फिर कांटे की टक्कर!

सुषमा पांडेय

• 12:59 PM • 03 Oct 2026

बिजनौर विधानसभा सीट पर 2027 चुनाव से पहले बीजेपी और सपा के बीच मुकाबला दिलचस्प है. 2022 में बीजेपी की सुचि मौसम चौधरी मामूली अंतर से जीतीं जबकि 2024 में सपा ने बढ़त बनाई। बदले गठबंधन और जातीय समीकरण अहम होंगे.

Akhilesh, jayant and CM yogi

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उत्तर प्रदेश की जिला मुख्यालय सीट बिजनौर में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. पिछले दो चुनावों के आंकड़ों को देखें तो यहां का मुकाबला किसी थ्रिलर से कम नहीं रहा है. 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की प्रत्याशी सुचि मौसम चौधरी ने यह सीट महज 1,445 वोटों के बेहद मामूली अंतर से जीती थी. वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में पासा पलटा और इसी विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी ने बीजेपी-आरएलडी गठबंधन पर करीब 991 वोटों की बढ़त बना ली. दो चुनाव, दो अलग-अलग तस्वीरें और दोनों ही बार बेहद नजदीकी मुकाबला. ऐसे में 2027 के चुनाव से पहले सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बीजेपी अपनी जीत बरकरार रख पाएगी या सपा अपनी बढ़त को विधानसभा की जीत में तब्दील करेगी.

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2022 का बेहद नजदीकी मुकाबला और 2024 की लीड

बिजनौर विधानसभा सीट शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों के गठजोड़ वाली मिश्रित आबादी की सीट है. 2017 में बीजेपी की सुचि मौसम चौधरी ने यहां से जीत दर्ज की थी और 2022 में भी पार्टी ने उन्हीं पर भरोसा जताया. 2022 के चुनाव में बीजेपी की सुचि को 97,165 वोट मिले जबकि सपा-आरएलडी गठबंधन के प्रत्याशी नीरज चौधरी को 95,720 वोट मिले. जीत-हार का अंतर महज 1,445 वोटों का रहा.

वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में बिजनौर विधानसभा क्षेत्र के भीतर समीकरण थोड़े बदलते दिखे. यहां सपा के दीपक सैनी को 89,429 वोट मिले जबकि बीजेपी-आरएलडी गठबंधन के चंदन चौहान को 88,438 वोट मिले. सपा को इस विधानसभा सेगमेंट में 991 वोटों की बढ़त हासिल हुई जिसने आगामी 2027 के चुनाव के लिए लड़ाई को और दिलचस्प बना दिया है.

बिजनौर का जातीय गणित: किसके पास कितना वोट?

बिजनौर मुस्लिम बहुल सीट मानी जाती है जहां अन्य जातियों का समीकरण भी चुनाव परिणाम तय करने में बड़ी भूमिका निभाता है.

मुस्लिम मतदाता: लगभग 1,00,000 (सबसे बड़ा वोट बैंक)

जाट मतदाता: लगभग 70,000

एससी (दलित) मतदाता: लगभग 50,000

सैनी मतदाता: लगभग 25,000

राजपूत मतदाता: लगभग 22,000

कश्यप मतदाता: लगभग 12,000

ब्राह्मण मतदाता: लगभग 10,000

पाल मतदाता: लगभग 10,000

नाई व प्रजापति मतदाता: 7,000 और 6,000

वैश्य, गुर्जर और पंजाबी: लगभग 5,000-5,000

जीत-हार का मार्जिन बेहद कम होने के कारण मुस्लिम और जाट के अलावा सैनी, कश्यप, पाल और दलित वोटर्स किसी भी दल का खेल बनाने या बिगाड़ने की ताकत रखते हैं.

बदले राजनीतिक गठबंधन और जाट-दलित फैक्टर

2022 के चुनाव में जयंत चौधरी की आरएलडी समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में थी जिससे जाट और मुस्लिम वोटों का बड़ा हिस्सा आरएलडी प्रत्याशी नीरज चौधरी को मिला था. हालांकि अब स्थितियां बदल चुकी हैं और जयंत चौधरी एनडीए (बीजेपी) के पाले में हैं.

2027 के चुनाव में सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि जाट मतदाता आरएलडी-बीजेपी के साथ रहते हैं या वोटों का बंटवारा होता है. स्थानीय पत्रकारों का मानना है कि यदि इस सीट पर जाट-दलित समीकरण साथ आता है या मुस्लिम-दलित गठजोड़ बनता है तो मुकाबला पूरी तरह से किसी भी तरफ झुक सकता है.

किसान, गन्ने का भुगतान और प्रत्याशी का चयन

बिजनौर एक प्रमुख किसान बहुल क्षेत्र है जहां गन्ने का बकाया भुगतान और गन्ने का सरकारी मूल्य एक बड़ा स्थानीय मुद्दा रहा है. किसानों का रुख और चुनाव से पहले गन्ने के मूल्यों में होने वाली संभावित बढ़ोतरी बीजेपी के लिए राहत का सबब बन सकती है. इसके अलावा स्थानीय पत्रकारों के अनुसार प्रत्याशी का चयन सबसे निर्णायक साबित होगा. प्रत्याशी के नाम का ऐलान होने के बाद ही 2027 की अंतिम तस्वीर साफ हो पाएगी.


 
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