रायबरेली में PDA रथ निकाल अखिलेश यादव ने भाजपा के साथ कांग्रेस को भी दिखाई ताकत! सपा चीफ के दांव से गरमाई सियासत

कुमार अभिषेक

• 09:43 AM • 25 Sep 2026

आज का यूपी: रायबरेली में अखिलेश यादव के पीडीए रथ से गर्माई सियासत. 'लोधी बनाम योगी' दांव, राहुल लोधी-पुलिस विवाद और 2027 चुनाव की रणनीति पर पढ़ें डिटेल रिपोर्ट.

Akhilesh Yadav

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यूपी Tak के खास शो 'आज का यूपी' में हम राज्य की तीन बड़ी खबरों का गहन विश्लेषण करते हैं. आज की पहली और सबसे बड़ी खबर रायबरेली से है जहां समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने नए 'पीडीए रथ' के जरिए जबरदस्त शक्ति प्रदर्शन किया और 'लोधी बनाम योगी' का नया सियासी दांव चलकर 2027 की लड़ाई की लकीर खींच दी है. दूसरी बड़ी खबर रायबरेली के बछरावां और हरचंदपुर में सपा विधायकों और स्थानीय पुलिस-प्रशासन के बीच हुई तीखी झड़प, कॉलेज में हुए विवाद और उसके बाद उभरे राजनीतिक घमासान से जुड़ी है. वहीं तीसरी प्रमुख खबर अखिलेश यादव द्वारा चलाए जा रहे 'सॉफ्ट हिंदुत्व' व 'नीला-लाल' कॉम्बिनेशन और बारिश के बीच उमड़े जनसैलाब के सहारे कांग्रेस व बीजेपी दोनों को अपनी ताकत दिखाने की नई रणनीति पर केंद्रित है. आइए इन तीनों खबरों को विस्तार से समझते हैं.

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अखिलेश का 'PDA रथ' और 'लोधी बनाम योगी' का नया दांव

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने रायबरेली की बछरावां सीमा से लेकर हरचंदपुर तक अपने विशेष 'पीडीए रथ' से विशाल यात्रा निकाली. बस पर नीले रंग से 'जो पीड़ित है वो पीडीए' और लाल रंग से 'पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक' लिखा हुआ था. यात्रा के दौरान अखिलेश ने जनसभा को संबोधित करते हुए राज्य सरकार पर सीधा हमला बोला और कहा कि उन्हें पहले लगता था कि चुनाव 'बीजेपी बनाम पीडीए' है. लेकिन रायबरेली की घटना देखकर लगता है कि मुकाबला 'लोधी बनाम योगी' हो गया है.

अखिलेश यादव ने बछरावां के पासी समुदाय से आने वाले दलित विधायक श्याम सुंदर भारती और हरचंदपुर के लोधी समुदाय से आने वाले विधायक राहुल लोधी को एक साथ मंच पर रखकर गैर-यादव ओबीसी और दलित वोट बैंक को साधने का बड़ा सियासी संदेश दिया. उन्होंने साफ कहा कि एक तरफ प्रताड़ित करने वाले लोग हैं और दूसरी तरफ पीड़ित 'पीडीए' परिवार है.

विधायक राहुल लोधी-पुलिस झड़प मामला और बुलडोजर कार्रवाई पर हमला

रायबरेली में बीते दिनों एक स्थानीय कॉलेज में एबीवीपी और सपा समर्थित छात्रों के बीच हुए विवाद ने तूल पकड़ लिया था. इस घटना के बाद सपा के हरचंदपुर विधायक राहुल लोधी की स्थानीय पुलिस व प्रशासन से तीखी नोकझोंक और झड़प हुई थी जिसकी तस्वीरें खूब वायरल हुईं. इसी घटनाक्रम के बाद अखिलेश यादव ने राहुल लोधी के घर जाकर चाय पीने और जनसभा करने का ऐलान किया.

रैली के दौरान अखिलेश ने प्रशासन और सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि बीजेपी सरकार हार के डर से बिना नोटिस दिए लोगों के ढाबे, मकान और धार्मिक स्थल तक बुलडोजर से गिरवा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि कमजोर हो चुकी सरकार अधिकारियों के दम पर जनप्रतिनिधियों और आम जनता का अपमान कर रही है जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

'नीला-लाल' कॉम्बिनेशन, सॉफ्ट हिंदुत्व और कांग्रेस-बीजेपी को सियासी संदेश

अखिलेश यादव की इस पहली बड़ी चुनावी यात्रा में कई नए प्रयोग देखने को मिले. एक तरफ जहां उन्होंने नीले झंडे, नीले रंग के अक्षरों और दलित-पासी नेताओं को तरजीह देकर बसपा के कोर कैडर में सेंध लगाने की कोशिश की. वहीं दूसरी तरफ गले में लाल गमछा और रास्ते में हनुमान जी के मंदिर जाकर दर्शन-पूजन करने की शैली से 'सॉफ्ट हिंदुत्व' का भी संदेश दिया.

बारिश और खराब मौसम के बावजूद सड़कों पर उतरी समर्थकों की भारी भीड़ को देखकर अखिलेश यादव गदगद नजर आए. उन्होंने दावा किया कि रायबरेली की सड़कों पर लाखों की संख्या में लोग स्वप्रेरित होकर पहुंचे हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश ने इस विशाल जनसैलाब के जरिए न केवल सत्ताधारी बीजेपी को बल्कि अपने सहयोगी दल कांग्रेस को भी रायबरेली (जो कांग्रेस का गढ़ माना जाता है) में अपनी जमीनी ताकत का अहसास कराया है.

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