Opinion: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले किसानों के मुद्दे पर पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव दावा कर रहे हैं कि बीजेपी सरकार में गन्ना किसानों की हालत खराब हुई है, जबकि योगी सरकार का दावा है कि उसने गन्ना किसानों के लिए कई सुधार किए हैं. लेकिन इन दावों और आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह जानना जरूरी है कि आखिर यूपी में किसानों को गन्ने का दाम कितना मिला, भुगतान कितना हुआ, उत्पादन कितना बढ़ा और उनकी फसल के लिए मिलों की व्यवस्था कितनी मजबूत हुई. इन कसौटियों पर योगी सरकार के कार्यकाल में गन्ना क्षेत्र में हुए बदलाव को देखें तो तस्वीर में बड़ा अंतर दिखाई देता है.
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रकबा और उत्पादकता दोनों में हुआ इजाफा
2016-17 में, यानी सपा के शासनकाल में, उत्तर प्रदेश में गन्ने का क्षेत्रफल 20.54 लाख हेक्टेयर था, जो 2025-26 में बढ़कर 28.61 लाख हेक्टेयर हो गया. इसी दौरान गन्ने की उत्पादकता 72 टन प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 2024-25 में 83.25 टन प्रति हेक्टेयर पहुंच गई.
यानी गन्ने की खेती का दायरा भी बढ़ा और एक हेक्टेयर जमीन से मिलने वाला उत्पादन भी बढ़ा. आज उत्तर प्रदेश गन्ना एवं चीनी उत्पादन में देश में प्रथम है और देश के कुल गन्ना उत्पादन का 57.26 प्रतिशत प्रदेश में होता है. यह आंकड़ा बताता है कि गन्ना अब उत्तर प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था की ताकत बन चुका है.
भुगतान के आंकड़े खोलते हैं असली फर्क
गन्ना किसान के लिए सबसे बड़ा सवाल उसकी फसल के भुगतान का होता है. इसी मोर्चे पर योगी सरकार और पिछली सरकारों के बीच तुलना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है.
अप्रैल 2017 से फरवरी 2025 तक गन्ना किसानों को ₹3,12,928 करोड़ से अधिक का रिकॉर्ड मूल्य भुगतान किया गया. वहीं, 2007 से 2017 तक कुल भुगतान ₹1,47,346 करोड़ ही हो सका था.
यानी जिस गन्ना किसान के लिए भुगतान उसकी खेती और परिवार की पूरी आर्थिक व्यवस्था से जुड़ा है, उसके खाते तक पहुंचने वाली रकम के पैमाने में बड़ा अंतर दिखाई देता है. यही वह आंकड़ा है, जो किसान के मुद्दे पर सिर्फ राजनीतिक दावों और वास्तविक काम के बीच फर्क समझने का आधार देता है.
गन्ने के दाम में भी चार बार बढ़ोतरी
योगी सरकार के कार्यकाल में अप्रैल 2017 से मार्च 2025 तक गन्ने के मूल्य में चार बार बढ़ोतरी की गई. पेराई सत्र 2025-26 के लिए गन्ने के मूल्य में ₹30 प्रति कुंतल की वृद्धि की गई और गन्ने का मूल्य ₹400 प्रति कुंतल निर्धारित किया गया.
किसान की आय के लिहाज से यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि गन्ने की कीमत में वृद्धि सीधे उसकी फसल के मूल्य से जुड़ी होती है. ऐसे में भुगतान के साथ कीमत में बढ़ोतरी को भी गन्ना किसानों के लिए सरकार की नीति के महत्वपूर्ण हिस्से के तौर पर देखा जा सकता है.
बंद मिलों से नई क्षमता तक
गन्ना किसान की आय सिर्फ खेत में तय नहीं होती. उसके लिए चीनी मिलों का चलना और उनकी क्षमता बढ़ना भी उतना ही जरूरी है. मार्च 2017 के बाद 4 नई चीनी मिलें स्थापित की गईं, 6 मिलें दोबारा शुरू हुईं और 44 मिलों की क्षमता का विस्तार किया गया.
इससे दैनिक पेराई क्षमता 7.50 लाख टीसीडी से बढ़कर 8.48 लाख टीसीडी हो गई. इसके साथ लगभग 10 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की बात सामने आती है. यानी गन्ने को केवल खेत की फसल तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उसे मिल, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर भी जोर दिया गया.
गन्ने से चीनी ही नहीं, एथेनॉल भी
गन्ना अर्थव्यवस्था में एथेनॉल एक बड़ा बदलाव लेकर आया. 2017 में प्रदेश का एथेनॉल उत्पादन 42 करोड़ लीटर था, जो 2025-26 में बढ़कर 187.80 करोड़ लीटर हो गया. प्रदेश एथेनॉल उत्पादन में देश में प्रथम है.
इसका सीधा मतलब यह है कि गन्ने की अर्थव्यवस्था को केवल चीनी उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय उससे जुड़े दूसरे औद्योगिक अवसरों को भी विस्तार दिया गया.
सहफसली खेती से अतिरिक्त आय
पिछले 9 वर्षों में 46.80 लाख हेक्टेयर में गन्ने के साथ सहफसली खेती की गई, जिससे किसानों को लगभग 25 प्रतिशत अतिरिक्त आय हुई. यह मॉडल इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसान अपनी जमीन से गन्ने के साथ दूसरी फसल के जरिए भी अतिरिक्त आमदनी हासिल कर सकता है. यानी किसान की आय बढ़ाने की कोशिश सिर्फ गन्ने के मूल्य बढ़ाने तक सीमित नहीं रही.
तकनीक से पर्ची और भुगतान में पारदर्शिता
गन्ना किसानों की व्यवस्था को डिजिटल बनाने पर भी जोर दिया गया. 1.48 लाख महिला गन्ना किसानों को पर्ची जारी की गई. 158 सहकारी समितियों के जरिए स्मार्ट गन्ना किसान परियोजना, caneup.in पोर्टल और e-Ganna ऐप के माध्यम से सर्वे, पर्ची और भुगतान को पारदर्शी बनाने की व्यवस्था की गई.
इसके अलावा, पहली बार 285 नई खांडसारी इकाइयों को लाइसेंस देकर 73,700 टीसीडी अतिरिक्त पेराई क्षमता सृजित की गई. गन्ने से जुड़ी समस्याओं के लिए 1800-121-3203 टोल फ्री नंबर भी उपलब्ध कराया गया है, जहां शिकायत दर्ज कर निश्चित समय में निस्तारण की व्यवस्था है.
गन्ना किसानों के मुद्दे पर योगी सरकार की तस्वीर को देखें तो एक तरफ बढ़ता रकबा और उत्पादकता है, दूसरी तरफ भुगतान का बड़ा आंकड़ा है. गन्ने के मूल्य में चार बार बढ़ोतरी हुई, चीनी मिलों की संख्या और क्षमता बढ़ी, एथेनॉल उत्पादन में विस्तार हुआ, सहफसली खेती से अतिरिक्त आय का रास्ता खुला और डिजिटल व्यवस्था के जरिए पर्ची व भुगतान में पारदर्शिता लाने की कोशिश हुई.
ऐसे में इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि योगी सरकार के कार्यकाल में गन्ना किसानों को लेकर कई सुधार हुए हैं, जो पिछली सरकार में नहीं हुए थे.
(लेखक, डॉ. अश्वनी अवस्थी भूगोल विषय में पीएचडी हैं. चित्रकूट में वर्ष 2019 से 2024 तक दो कार्यकाल में जिला महामंत्री का दायित्व निभा चुके हैं. सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक विषयों में गहरी रुचि है.)
(Disclaimer: यहां व्यक्त विचार लेखक की व्यक्तिगत राय हैं.)
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