कौन हैं प्रांजल यादव, जिन्हें लेकर वाराणसी MLC चुनाव में मचा हंगामा?

रजत सिंह

• 10:02 AM • 30 Oct 2026

वाराणसी MLC चुनाव में बीजेपी की हार के बीच IAS प्रांजल यादव क्यों चर्चा में आ गए? मतगणना में धांधली के आरोप, आधी रात का हंगामा और 2014 का बेनियाबाग विवाद, जानिए कौन हैं ये अधिकारी जिनकी भूमिका पर फिर छिड़ी सियासी बहस.

IAS Pranjal Yadav

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उत्तर प्रदेश के चर्चित वाराणसी विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को शिक्षक और स्नातक दोनों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा है. हालांकि इन नतीजों के बीच वरिष्ठ IAS अधिकारी प्रांजल यादव अचानक सुर्खियों में आ गए. स्नातक चुनाव की मतगणना के दौरान चुनाव पर्यवेक्षक (इलेक्शन ऑब्जर्वर) के रूप में तैनात आईएएस प्रांजल यादव पर बीजेपी प्रत्याशी और कार्यकर्ताओं ने मतगणना में धांधली का गंभीर आरोप लगाते हुए धरना दिया. 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान पीएम मोदी की बेनियाबाग रैली को मंजूरी न देने के बाद विवादों में आए 2006 बैच के इस आईएएस अधिकारी की भूमिका को लेकर अब सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है.

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पांचवें राउंड की मतगणना के दौरान देर रात बवाल और रिकाउंटिंग का फैसला

वाराणसी स्नातक एमएलसी सीट पर बीजेपी के केदारनाथ सिंह और सपा के निवर्तमान एमएलसी आशुतोष सिन्हा के बीच मुकाबला था. प्राथमिकता (वरीयता) के आधार पर बैलेट पेपर से हो रही मतगणना में शुरुआती राउंड से ही सपा उम्मीदवार आशुतोष सिन्हा ने बढ़त बनाई हुई थी.

पांचवें राउंड की गिनती के दौरान देर रात तब हंगामा खड़ा हो गया जब बीजेपी प्रत्याशी केदारनाथ सिंह और उनके समर्थकों ने आरोप लगाया कि जब उनके एजेंट खाना खाने बाहर गए थे, तब उनकी अनुपस्थिति में पांचवें राउंड की काउंटिंग करा दी गई.

आक्रोशित बीजेपी कार्यकर्ताओं ने हॉल के बाहर धरना शुरू कर दिया और चुनाव पर्यवेक्षक आईएएस प्रांजल यादव के खिलाफ नारेबाजी की. विवाद बढ़ता देख स्थानीय प्रशासन और कमिश्नर के हस्तक्षेप के बाद पांचवें राउंड की दोबारा (रिकाउंटिंग) गिनती कराने का आश्वासन दिया गया, तब जाकर हंगामा शांत हुआ.

2014 का 'बेनियाबाग' विवाद और प्रांजल यादव से जुड़ा पुराना घटनाक्रम

बीजेपी नेताओं द्वारा प्रांजल यादव का नाम सपा समर्थक के रूप में जोड़े जाने के पीछे 2014 का पुराना मामला है. साल 2013-15 के दौरान प्रांजल यादव वाराणसी के जिलाधिकारी (DM) पद पर तैनात थे. 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान जब नरेंद्र मोदी वाराणसी से चुनाव लड़ रहे थे, तब उनके बेनियाबाग में प्रस्तावित चुनावी जनसभा की अनुमति प्रांजल यादव ने सुरक्षा कारणों और एलआईयू रिपोर्ट का हवाला देकर खारिज कर दी थी.

इस फैसले के बाद बीजेपी ने बनारस से लेकर दिल्ली तक जोरदार प्रदर्शन किया था. हालांकि बाद में मोदी को शहर में रोड शो करने की अनुमति दी गई थी. लेकिन तभी से प्रांजल यादव राजनीतिक बहसों के केंद्र में रहे हैं.

कौन हैं आईएएस प्रांजल यादव?

प्रांजल यादव 2006 बैच के यूपी कैडर के प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं. उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया है. वे पहली बार 2011 में रामपुर के डीएम बने थे. इसके बाद उन्होंने हाथरस, महराजगंज, आजमगढ़ और फरवरी 2013 से अगस्त 2015 तक वाराणसी के डीएम के रूप में जिम्मेदारी संभाली.

अखिलेश यादव सरकार के दौरान वे मुख्यमंत्री कार्यालय में विशेष सचिव भी रहे. 2017 में सत्ता परिवर्तन के बाद उनका तबादला स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन तथा कौशल विकास विभाग में हुआ. वर्तमान में वे एमएसएमई (MSME) एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग में सचिव पद पर कार्यरत हैं और उन्हें वाराणसी चुनाव में ऑब्जर्वर बनाकर भेजा गया था.

चुनाव परिणाम और राजनीतिक दायरा

तमाम हंगामे और आपत्तियों के बावजूद वाराणसी स्नातक सीट पर अंतिम परिणाम समाजवादी पार्टी के पक्ष में रहा और आशुतोष सिन्हा ने अपनी जीत दर्ज की. उल्लेखनीय है कि वाराणसी एमएलसी सीट का दायरा सिर्फ बनारस शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पूर्वांचल के छह अन्य जिले जौनपुर, गाजीपुर, बलिया, भदोही और मिर्जापुर भी शामिल हैं. सपा की इस जीत और बीजेपी के प्रशासनिक अधिकारियों पर लगाए गए आरोपों ने प्रदेश की भावी राजनीति में नए सवाल खड़े कर दिए हैं.

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