अफसर बेटी ने काली कमाई छिपाने के लिए के मां के खिलाफ ही रच दी साजिश, DSO सीमा चौधरी के साथ अब क्या होगा?

DSO Seema Chaudhary: सहारनपुर में हापुड़ की जिला पूर्ति अधिकारी सीमा चौधरी पर अपनी ही मां के बैंक खाते में काली कमाई छिपाने, जमीन हड़पने और जाली दस्तखत करने के आरोप लगे हैं. एसएसपी के निर्देश पर एफआईआर दर्ज, पुलिस जांच में जुटी है.

Saharanpur DSO Seema Chaudhary

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राहुल कुमार

• 03:54 PM • 02 Jul 2026

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Saharanpur News: कहते हैं मां-बच्चों का रिश्ता दुनिया में सबसे पवित्र होता है. लेकिन जब इस रिश्ते के बीच पैसा और पावर आ जाए तो कहानी कितनी खौफनाक हो सकती है. इसका जीता-जागता उदाहरण उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में देखने को मिला है. यहां एक बेबस मां ने अपनी ही अधिकारी बेटी के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और जान से मारने की धमकी देने का संगीन मुकदमा दर्ज कराया है. आरोपी बेटी कोई आम इंसान नहीं बल्कि हापुड़ में तैनात जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) सीमा चौधरी हैं. आरोप है कि सरकारी पद पर बैठी बेटी ने अपनी काली कमाई को सफेद करने के लिए अपनी बूढ़ी मां के बैंक खाते का इस्तेमाल किया और जब इतने से भी मन नहीं भरा तो भू-माफियाओं के साथ मिलकर मां की ही जमीन हड़पने के लिए जाली दस्तखत तक कर डाले.

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मोबाइल पर आए 15 लाख के मैसेज ने खोला अफसर बेटी का राज

यह पूरी सनसनीखेज दास्तान सहारनपुर के थाना सरसावा क्षेत्र की है. पीड़िता मां मुनेश रानी का आरोप है कि उनकी बेटी DSO सीमा चौधरी ने गाजियाबाद के ICICI बैंक में उनके नाम पर एक खाता खुलवाया था. भोली-भाली मां को लगा कि बेटी मदद कर रही है. लेकिन उन्हें क्या पता था कि इस खाते की आड़ में कोई और ही खेल चल रहा है. खाते की पासबुक, चेकबुक और संचालन खुद सीमा चौधरी ही करती थीं और मां को कभी लेनदेन की भनक तक नहीं लगने दी।

एक दिन अचानक मुनेश रानी के मोबाइल पर बैंक का एक मैसेज आया जिसे देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. खाते में बिना उनकी अनुमति के 15 लाख रुपये जमा किए गए थे. जब मां ने बैंक जाकर तफ्तीश की तो परतें खुलीं. आरोप है कि अफसर बेटी सीमा चौधरी ने अपनी काली कमाई को विजिलेंस और सरकारी नजरों से छिपाने के लिए अपनी ही मां के खाते को डंपिंग ग्राउंड बना दिया था.

भू-माफियाओं से साठगांठ और मां के जाली दस्तखत

काली कमाई को ठिकाने लगाने के बाद लालच और बढ़ा. शिकायत के मुताबिक, DSO सीमा चौधरी ने संजीव कुमार, गंभीर, राजेंद्र राणा और नरेश कुमार जैसे रसूखदार और भू-माफियाओं के साथ मिलकर अपनी सगी मां की जमीन हड़पने की साजिश रच डाली. इन लोगों ने मिलकर 16 सितंबर 2023 की एक फर्जी रसीद तैयार की जिस पर मां मुनेश रानी के जाली हस्ताक्षर कर दिए गए.

जब तहसील प्रशासन से मुनेश रानी को इस हेरफेर की जानकारी मिली तो उन्होंने प्राइवेट स्तर पर अपने हस्ताक्षरों की फॉरेंसिक जांच कराई. रिपोर्ट में साफ हो गया कि दस्तखत जाली थे. आरोप है कि जब मां ने अपनी ही बेटी की इस करतूत का विरोध किया तो उसे डराया-धमकाया गया और जान से मारने की धमकी दी गई. खौफ के इसी माहौल के कारण मजबूर होकर मुनेश रानी को अपनी जमीन देहरादून की रहने वाली नैंसी जोशी के नाम बेचनी पड़ी.

जब सरसावा थाने ने नहीं सुनी तो SSP के दरबार पहुंची मां

अपनी ही कोख से पैदा हुई बेटी के इस जुल्म के खिलाफ मां ने इंसाफ की लड़ाई शुरू की. मुनेश रानी ने सबसे पहले 13 मई को थाना सरसावा में लिखित शिकायत दी थी. लेकिन अधिकारी बेटी के रसूख के आगे पुलिस ने डेढ़ महीने तक फाइल दबाए रखी और कोई कार्रवाई नहीं की. हार मानकर पीड़ित मां सहारनपुर के एसएसपी (SSP) के दरबार पहुंची. एसएसपी के कड़े निर्देश के बाद आखिरकार 30 जून 2026 की शाम करीब 4.30 बजे जिला पूर्ति अधिकारी सीमा चौधरी समेत पांच लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई.

इस पूरे मामले पर नकुड़ क्षेत्र के क्षेत्राधिकारी (CO) पवन कुमार ने बताया कि 'मुनेश रानी नाम की एक महिला ने अपनी पुत्री जो अधिकारी पद पर हैं और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ एक शिकायती पत्र दिया था. इसमें धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे. पुलिस द्वारा कराई गई प्राथमिक जांच में ये आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए हैं जिसके आधार पर सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. फिलहाल मामले की विवेचना प्रचलित है और जांच के तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.'

एक तरफ जहां योगी सरकार भ्रष्टाचार और भू-माफियाओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाए हुए है. वहीं एक प्रशासनिक अधिकारी द्वारा अपनी ही मां के साथ ऐसी जालसाजी की खबर ने प्रशासनिक अमले को हिला कर रख दिया है. अब देखना यह है कि विवेचना के बाद सहारनपुर पुलिस इस रसूखदार बेटी और उसके सिंडिकेट पर क्या एक्शन लेती है.