सहारनपुर में कलेक्ट्रेट की मस्जिद के नीचे कुएं में क्या मिला, ASI अधिकारी मनोज यादव ने बताया

राहुल कुमार

• 10:30 AM • 08 Sep 2026

सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद के नीचे मिली करीब 20 फीट गहरी संरचना की ASI ने जांच की. अधिकारी मनोज यादव ने इसे लखौरी ईंटों से बना कुएं जैसा ढांचा बताया, जिसकी उम्र करीब 200-250 साल हो सकती है.

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सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद नीचे मिली करीब 20 फीट गहरी और तीन फीट व्यास की संरचना ने रहस्य बढ़ा दिया है. सोमवार को लखनऊ से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के सहायक पुरातत्व अधिकारी मनोज कुमार यादव जांच के लिए मौके पर पहुंचे. वह सीढ़ी के सहारे संरचना के अंदर उतरे और करीब 10 मिनट तक निरीक्षण किया. बाहर आने के बाद उन्होंने प्रथम दृष्टया इसे लखौरी ईंटों से बनी कुएं जैसी संरचना बताया. हालांकि अंदर मलबा भरा होने के कारण अभी इसकी पूरी पहचान नहीं हो सकी है.
 

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मनोज कुमार यादव के मुताबिक संरचना में लगी ईंटों का आकार करीब 20×10×5 सेंटीमीटर है. ऊपरी हिस्से में लगभग तीन फीट मिट्टी और अन्य सामग्री का डिपॉजिट भी मिला है. लखौरी ईंटों और निर्माण शैली के आधार पर यह संरचना उत्तर मध्यकालीन वास्तुकला से जुड़ी प्रतीत होती है. अधिकारी ने इसकी संभावित प्राचीनता करीब 200 से 250 वर्ष बताई. अंदर चूने का प्लास्टर भी दिखाई दिया है, लेकिन मलबे के चलते फिलहाल कोई विशेष आकृति या स्पष्ट पुरातात्विक साक्ष्य नहीं मिला है.

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संरचना को शाहजहां काल से जोड़ने या मंदिर होने की संभावना को लेकर ASI अधिकारी ने कहा कि केवल अनुमान से इतिहास तय नहीं किया जा सकता. किसी संरचना को किसी विशेष शासक या कालखंड से जोड़ने के लिए सिक्का, सील या अन्य प्रमाणिक पुरातात्विक साक्ष्य जरूरी होंगे. इसी तरह इसे मंदिर या किसी अन्य धार्मिक स्थल से जोड़ने की बात भी प्रमाण मिलने के बाद ही कही जा सकती है. अधिकारी ने स्पष्ट कहा 'संभावनाओं में इतिहास नहीं लिखा जा सकता.'

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ASI अधिकारी ने यह भी कहा कि सहारनपुर की जमीन में अलग-अलग कालखंडों की मानवीय गतिविधियों से जुड़े अवशेष मिलने की संभावना जरूर है. हालांकि मौजूदा संरचना को लेकर अभी किसी निश्चित निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी. इसके लिए संरचना के साथ-साथ आसपास की जमीन की स्थिति और वहां मौजूद परतों का अध्ययन भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
 

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अधिकारी ने संभावना जताई कि यदि यह संरचना कुआं साबित होती है तो पुराने समय में यह पानी का स्रोत रही होगी. बाद में पानी सूखने या अनुपयोगी होने के बाद इसे बंद कर दिया गया होगा. इसके ऊपर मिट्टी भरकर निर्माण किए जाने की भी संभावना है. हालांकि यह केवल प्रारंभिक संभावना है और इसकी पुष्टि आगे की वैज्ञानिक जांच से ही हो सकेगी.

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संरचना की वास्तविक प्राचीनता और स्वरूप पता करने के लिए आगे वैज्ञानिक जांच जरूरी होगी. इसके अलावा आसपास की जमीन की परतों का अध्ययन भी अहम होगा. अभी अंदर मलबा होने के कारण संरचना से जुड़े पर्याप्त प्रमाण सामने नहीं आए हैं. ऐसे में फिलहाल इसे केवल कुएं जैसी संरचना के रूप में देखा जा रहा है, अंतिम पहचान अभी बाकी है.

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फिलहाल ASI की प्राथमिक जांच में यह ढांचा कुएं जैसा दिखाई दे रहा है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच और प्रमाण मिलने के बाद ही सामने आएगा. इसकी खुदाई होगी या नहीं, इसका निर्णय शासन-प्रशासन और संबंधित विभाग के स्तर पर लिया जाएगा. करीब 20 फीट नीचे मिली इस संरचना को लेकर अब आगे होने वाली वैज्ञानिक जांच पर नजर है, क्योंकि इसी के बाद इसकी वास्तविक उम्र और इतिहास से जुड़े सवालों का जवाब मिल सकेगा.
 

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