बेटी संबंध बनाते वक्त रिकॉर्ड करती थी प्राइवेट वीडियो, फिर पिता करता था ब्लैकमेल! SO की मौत के बाद बस्ती में खुला हनीट्रैप का बड़ा खेल!

यूपी तक

• 11:31 AM • 07 Sep 2026

Basti Honeytrap Case: बस्ती में SO सूर्य प्रकाश सिंह की मौत के बाद कथित हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग नेटवर्क का खुलासा हुआ है. पुलिस ने प्रियंका चौधरी, उसके पिता और वकील को गिरफ्तार कर मामले की जांच तेज कर दी है.

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बस्ती में वाल्टरगंज थाने के प्रभारी सूर्य प्रकाश सिंह की मौत के बाद सामने आए कथित हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग नेटवर्क ने पुलिस जांच को कई नए सवालों के बीच ला खड़ा किया है. पुलिस ने इस मामले में 32 साल की प्रियंका चौधरी, उसके पिता राम नयन चौधरी और अधिवक्ता विजय प्रकाश यादव को गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक, प्रियंका कथित तौर पर लोगों से पहले संपर्क और नजदीकी बढ़ाती थी और इसी दौरान उनकी निजी तस्वीरें, वीडियो या दूसरी व्यक्तिगत जानकारियां हासिल की जाती थीं. इसके बाद आरोप है कि इन्हीं निजी चीजों का इस्तेमाल लोगों पर दबाव बनाने और कथित तौर पर पैसे वसूलने के लिए किया जाता था. पुलिस अब इस मामले की जांच कर रही है. पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और कॉल डिटेल के आधार पर जांच आगे बढ़ाई है.

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पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, कथित हनीट्रैप का तरीका अचानक नहीं बल्कि एक तय पैटर्न के तहत काम करता था. बताया जा रहा है कि पहले संबंधित व्यक्ति से बातचीत और मुलाकात का सिलसिला शुरू होता था. इसके बाद धीरे-धीरे दोस्ती और निजी नजदीकियां बढ़ाई जाती थीं. पुलिस का दावा है कि इसी दौरान निजी बातचीत, तस्वीरें, वीडियो या अन्य व्यक्तिगत जानकारी जुटाई जाती थी. आरोप है कि जब पर्याप्त निजी सामग्री हाथ लग जाती थी, तब उसे दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था. संबंधित व्यक्ति से पैसे की मांग की जाती और रकम देने से इनकार करने पर निजी फोटो या वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी दी जाती थी. पुलिस को आशंका है कि इस कथित तरीके का इस्तेमाल एक से अधिक लोगों के खिलाफ किया गया. अब जांच एजेंसियां संभावित पीड़ितों की पहचान करने और उनसे जानकारी जुटाने में लगी हैं, ताकि यह साफ हो सके कि कथित नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था और इसमें और कौन-कौन लोग जुड़े हो सकते हैं.

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मामले ने गंभीर रूप तब लिया, जब वाल्टरगंज थाने के प्रभारी सूर्य प्रकाश सिंह की 29 अगस्त को उनके सरकारी आवास पर मौत हो गई. पुलिस के मुताबिक उन्होंने फांसी लगाकर आत्महत्या की. एक पुलिस अधिकारी की इस तरह हुई मौत के बाद परिस्थितियों को लेकर सवाल उठने लगे. इसके बाद उनके बेटे संदीप सिंह ने 5 सितंबर को बस्ती कोतवाली में FIR दर्ज कराई. शिकायत में कई लोगों पर आपसी मिलीभगत से ऐसे कृत्य करने का आरोप लगाया गया, जिनसे सूर्य प्रकाश सिंह कथित तौर पर मानसिक दबाव में आए और उन्होंने आत्मघाती कदम उठाया. FIR दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच तेज की. जांचकर्ताओं ने मृतक के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल और संपर्क में रहे लोगों की जानकारी खंगालनी शुरू की. इसी जांच में पुलिस को प्रियंका चौधरी और अधिवक्ता विजय प्रकाश यादव से सूर्य प्रकाश सिंह के संपर्क की जानकारी मिली.

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बस्ती के पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) संजीव त्यागी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जांच से जुड़ी जानकारी साझा की. पुलिस के मुताबिक, सूर्य प्रकाश सिंह के इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और कॉलिंग पैटर्न की जांच में प्रियंका चौधरी और विजय प्रकाश यादव से संपर्क सामने आया. इसके बाद पुलिस ने दोनों के साथ प्रियंका के पिता राम नयन चौधरी की भूमिका की भी पड़ताल की. जांच में पुलिस ने कथित तौर पर यह कड़ी जोड़ने की कोशिश की कि प्रियंका लोगों से संपर्क बनाने के बाद प्राइवेट सामग्री हासिल करती थी और बाद में उसके पिता तथा वकील पर उस सामग्री के जरिए कथित ब्लैकमेलिंग में भूमिका निभाने का आरोप है. हालांकि, पुलिस अभी पूरे नेटवर्क की संरचना और कथित लेन-देन की जानकारी जुटा रही है. जांचकर्ताओं का फोकस इस बात पर भी है कि प्राइवेट तस्वीरें और वीडियो किन परिस्थितियों में हासिल किए जाते थे और बाद में उनका इस्तेमाल किस तरह दबाव बनाने के लिए किया जाता था.
 

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पुलिस की जांच में प्रियंका चौधरी के साथ उसके पिता राम नयन चौधरी और अधिवक्ता विजय प्रकाश यादव की भूमिका भी सामने आने का दावा किया गया है. पुलिस के अनुसार, कथित तौर पर प्रियंका लोगों से बातचीत और नजदीकी बढ़ाने का काम करती थी, जबकि बाद के चरण में उसके पिता और अधिवक्ता पर प्राइवेट सामग्री के जरिए दबाव बनाने तथा कथित वसूली में शामिल होने का आरोप है. पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान ऐसे संकेत मिले हैं कि इस कथित नेटवर्क के जरिए एक से ज्यादा लोगों से पैसे मांगे या वसूले गए. हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कुल कितने लोग इस कथित गतिविधि के शिकार हुए. पुलिस आरोपियों से पूछताछ के साथ-साथ पुराने संपर्कों और संभावित पीड़ितों की जानकारी भी जुटा रही है. जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना है कि कथित ब्लैकमेलिंग की घटनाएं केवल बस्ती तक सीमित थीं या इसके तार दूसरे शहरों तक भी जुड़े हुए थे.

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पुलिस के मुताबिक प्रियंका चौधरी वाल्टरगंज थाना क्षेत्र के गंधार गांव में अपने पिता राम नयन चौधरी के साथ रहती थी. बताया गया है कि वह करीब 10 साल से अपने पति से अलग रह रही थी. पुलिस जांच में यह जानकारी भी सामने आई है कि प्रियंका मुंबई में ब्यूटी पार्लर और स्पा सेंटरों में काम कर चुकी है. अब जांच अधिकारी उसके पुराने संपर्कों और गतिविधियों की भी पड़ताल कर रहे हैं. पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि अलग-अलग लोगों से उसकी मुलाकात कैसे होती थी, बातचीत किस माध्यम से आगे बढ़ती थी और कथित तौर पर प्राइवेट तस्वीरें या वीडियो किस तरह हासिल किए जाते थे. इस बीच, घटना वाले दिन की कॉल डिटेल भी जांच का अहम हिस्सा बनी हुई है. DIG संजीव त्यागी के मुताबिक 29 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 41 मिनट पर अधिवक्ता विजय प्रकाश यादव ने सूर्य प्रकाश सिंह को आखिरी कॉल की थी. 
 

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पुलिस जांच का सबसे अहम सवाल फिलहाल यही है कि क्या सूर्य प्रकाश सिंह कथित ब्लैकमेलिंग या किसी अन्य दबाव से परेशान थे और क्या इसी वजह से उन्होंने आत्मघाती कदम उठाया. पुलिस इस पहलू की पुष्टि के लिए कॉल डिटेल, मोबाइल से मिले इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, आरोपियों से पूछताछ और संभावित पीड़ितों की जानकारी को एक साथ जोड़ रही है. अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकता. इसी आधार पर पुलिस संभावित पीड़ितों की पहचान और उनके बयान दर्ज करने की तैयारी कर रही है. DIG संजीव त्यागी के मुताबिक, पुलिस ने प्रियंका चौधरी, राम नयन चौधरी और विजय प्रकाश यादव को हॉस्पिटल चौराहे से गिरफ्तार किया. अब तीनों से पूछताछ के जरिए कथित नेटवर्क की दूसरी कड़ियां तलाशने की कोशिश की जा रही है. साथ ही पुलिस यह भी जांच रही है कि आरोपियों के अलावा कोई और व्यक्ति इसमें शामिल था या नहीं और क्या इसी तरह की गतिविधियों के जरिए बस्ती के बाहर भी लोगों को निशाना बनाया गया था. आगे की जांच और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से इस मामले में कई और तथ्य सामने आने की उम्मीद है.
 

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