फ्री इलाज करने वाले पद्मश्री से सम्मानित डॉ. टीके लहरी के साथ BHU में मारपीट, गाल और आंख पर दिखे गंभीर चोट के निशान

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के चिकित्सा संस्थान में एक शर्मनाक मामला सामने आया है. पद्मश्री से सम्मानित वरिष्ठ सर्जन डॉ. टीके लहरी के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई है. परिजनों का आरोप है कि डॉ. अरविंद पांडेय ने आईसीयू में उनके साथ मारपीट की है, जिससे उनके चेहरे पर चोट के निशान आए हैं.

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वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के चिकित्सा संस्थान से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां के वरिष्ठ कार्डियोथोरेसिक सर्जन और पद्मश्री से सम्मानित डॉ. टीके लहरी के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई है, जिससे विश्वविद्यालय परिसर और चिकित्सा जगत में हड़कंप मच गया है.
 

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डॉ. टीके लहरी ने BHU में एक लंबा समय मरीजों की सेवा में बिताया है. साल 2003 में रिटायर होने के बावजूद वह सर सुंदरलाल अस्पताल में मरीजों का लगातार मुफ्त इलाज कर रहे हैं. वह अपनी पेंशन भी विश्वविद्यालय को दान कर देते हैं और सिर्फ अपने निजी खर्च के लिए जरूरी रकम पास रखते हैं.
 

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बीते कुछ महीनों से अस्वस्थ होने के कारण डॉ. लहरी BHU के कार्डियोलॉजी विभाग के ICU में भर्ती हैं. उनके परिजनों का गंभीर आरोप है कि इसी दौरान अस्पताल परिसर में उनके ही विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अरविंद पांडेय ने उनके साथ मारपीट की है.
 

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मारपीट के दावों को पुख्ता करने के लिए परिजनों ने डॉ. लहरी की एक तस्वीर भी साझा की है. उनका दावा है कि इस तस्वीर में डॉ. लहरी के गाल पर उंगलियों के निशान, आंख में लालिमा और आंख के ऊपर गहरे काले निशान साफ तौर पर दिखाई दे रहे हैं.
 

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परिजनों का कहना है कि यह घटना 29 अगस्त की है. उन्होंने BHU के कुलपति और कुलसचिव समेत कई बड़े अधिकारियों को ईमेल के जरिए लिखित शिकायत भी भेजी है. इसके बावजूद, घटना के करीब एक सप्ताह बाद भी मामले में कोई प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की गई है, जिससे लोगों में भारी आक्रोश है.
 

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इस पूरे विवाद पर आरोपी एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अरविंद पांडेय की प्रतिक्रिया भी सामने आई है. BHU के IMS के आधिकारिक ग्रुप में मैसेज करते हुए उन्होंने डॉ. लहरी के साथ अपनी बहस या कहासुनी होने की बात तो स्वीकार की है, लेकिन थप्पड़ मारने या किसी भी तरह की मारपीट के आरोपों से साफ इनकार किया है.
 

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BHU हृदय विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. ओम शंकर ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं. उन्होंने प्रशासन पर मामले को टालने का आरोप लगाते हुए मांग की है कि घटना का सच सामने लाने के लिए ICU के CCTV फुटेज की जांच की जाए, ताकि यह साफ हो सके कि डॉ. लहरी को इतनी गंभीर चोटें कैसे आईं हैं.
 

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