Shankaracharya Avimukteshwaranan News: प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दिन संगम नोज तक पालकी ले जाने से रोके जाने के बाद से धरने पर बैठे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने माघ मेला छोड़ने का ऐलान कर दिया है. 11 दिनों के लंबे धरने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने काशी के लिए प्रस्थान करने का ऐलान किया है. मगर प्रयागराज से जाते-जाते प्रशासन और प्रदेश की योगी सरकार पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने तीखा हमला बोला है.
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'सरकारी रेवड़ी बांटकर जाल में फंसाना चाहता है प्रशासन'
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन के प्रस्तावों को खारिज करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि प्रशासन सुविधाएं देकर उन्हें संतुष्ट करने की कोशिश कर रहा है. लेकिन जो मारपीट की गई है उसके बारे में एक शब्द भी नहीं कहा गया. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, "प्रशासन अपने प्रस्ताव में हमारी अंतरात्मा को बड़ी चोट पहुंचा रहा है. लोभ-लालच देकर हमारी जो टेक (संकल्प) है उसे खत्म करना चाहते हैं. प्रशासन केवल सरकारी रेवड़ी बांटकर हमें अपने जाल में फंसाना चाहता है."
मिला जीवन का सबसे बड़ा दुख: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
योगी सरकार पर निशाना साधते हुए शंकराचार्य ने कहा कि उनके जीवन में अब तक बहुत सारे दुख हुए हैं, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के द्वारा सनातन धर्मियों को जो दुख दिया गया, वह उनके जीवन का सबसे बड़ा दुख है. उन्होंने कहा कि पता नहीं भविष्य में कौन सा नेता या कौन सी पार्टी आएगी, जो इस दुख की भरपाई करेगी.
'हार-जीत का फैसला समय और समाज करेगा'
शंकराचार्य ने कहा कि मौनी अमावस्या की घटना से उनकी आत्मा को गहरी चोट पहुंची है. उन्होंने कहा, "किसकी हार है और किसकी जीत, यह समय बताएगा. सनातन धर्म की जनता को अभी इस पर निर्णय लेना बाकी है. हार-जीत की घोषणा तब होगी जब समाज अपना निर्णय लेगा." उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन ने जो अपराध किया है वह उस पर चर्चा नहीं करना चाहता इसीलिए उन्होंने वहां से निकल जाने का निर्णय लिया.
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